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हिमाचल प्रदेश

संगीत सदन में जीवंत प्राचीन पारंपरिक संस्कृति, गूंजे संस्कार गीत

March 24, 2019 09:26 AM

मण्डी, (विजयेन्दर शर्मा) जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग ने शहर के संगीत सदन में प्राचीन संस्कृति के सरंक्षण व संवर्धन को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में एडीएम श्रवण मांटा ने बतौर मुख्यातिथि लोक संपर्क विभाग की डिप्टी डायरेक्टर मंजूला मुरीद ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की।
इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्यातिथि एडीएम श्रवण मांटा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि लोकगीतों व लोकनृत्यों पर आधारित संस्कृति को धरोहर के रूप में संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोए रखना होगा। उन्होंने कहा हमारी प्राचीन संस्कृति उन संस्कारों से प्रेरित है जिन्हें आज भी विवाह-शादियों व अन्य विभिन्न समारोहों में निभाया जाता है। जिसका भविष्य में भी एक धरोहर के रूप में संवर्धन जरूरी है।
इस अवसर विषेष अतिथि सूचना एवं सम्पर्क विभाग मंजुला मुरीद ने कहा कि हिमाचल लोक मानस में पारंपरिक लोक गीतों, गाथाओं, सामाजिक धार्मिक रीति-रिवाजों, लोक आस्थाओं, देव गाथाओं, लोक संगीत, संस्कार गीतों में देवी-देवताओं के इतिहास, उनकी उत्पत्ति से संबन्धित अनेक धारणाएं प्रचलित हैं। इन्हें लेकर वृहद शोध की जरूरत है।
कार्यक्रम में संस्कार गीतों का प्रलेखन (डॉक्यूमेंटरी), नागरीय नृत्य, लोकगीतों की एकल प्रतिस्पर्धाएं करवाई गई। जिसमें जिला भर के विभिन्न स्थानों से कलाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर प्राचीन संस्कृति को जीवंत किया।
प्रतियोगिता में पंडोह से विशाल, आकाश, शिव कुमार, त्रयांवली से शवनम, हणोगी से अमर चंद, नसलोह से कमला, धर्मपुर से गोपाल सिंह व संजय भारद्वाज व शिवांगी, राहुल, उर्मिला, कमला, अनुपमा ने प्रतिस्पर्धा में भाग लेकर एक से बढ़कर गीत प्रस्तुत कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। संगीत सदन की छात्राओं ने नागरीय नृत्य कर व बारा मासा गीत गाकर प्राचीन संस्कृति की झलक पेश की।
इसके अलावा शहर की जानी मानी लोकगायिका व कवियत्री रूपेश्वरी शर्मा ने संस्कार गीतों में बधाई व विवाह शादियों में गाए जाने वाले गीतों से समा बांधा। आशा ठाकुर व सरिता गुलेरिया ने पारंपरिक विवाह गीत जो आधुनिकता की दौड़ में डीजे की धूनों में लुप्त होते जा रहे हैं को पेश कर अपनी प्राचीन संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।
बल्ह क्षेत्र की महिलाओं सत्या गुप्ता, कांता सैनी, व रमा शर्मा ने पारंपरिक गीत गाकर दर्शकों का मन मोह लिया।
जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने बताया कि विभाग अपनी प्राचीन संस्कृति का सरंक्षण व संवर्धन करने के लिए हरसंभव प्रयासरत है। जो समय-समय पर अपनी संस्कृति के संवर्धन के लिए कार्य कर उन विधाओं की तलाश कर मंच प्रदान कर रहा है। ताकि अपनी प्राचीन संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए सरंक्षित किया जा सके।
इस मौके पर एकल प्रतियोगिता में गोपाल सिंह ने प्रथम, शवनम व शिवांगी ने दूसरा तथा राहुल ने तीसरा स्थान हासिल किया। मुख्यातिथि ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में संगीत सदन के विनय ने हारमोनियम, राजन ने ढोलक, जोगेंद्र ने तबले पर संगत कर कलाकारों का बेहतरीन साथ दिया। वहीं मंच संचालक के रूप में सर्वज्ञ शर्मा ने अपने संचालन का बखूबी निर्वहन किया।

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