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हिमालय और पर्यावरण की रक्षा के लिए कपड़ों को अधिक बार प्रयोग करे :भिक्खू संघसेना

March 24, 2019 09:28 PM

वस्त्र निर्माण का 63 प्रतिशत कच्चा माल पेट्रोलियम से प्राप्त होता है। इस प्रकार, हर साल लाखों टन पेट्रोलियम की बर्बादी होती है। यह ग्लोबल वार्मिंग की वजह बनती है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे कपड़ों को अधिक बार प्रयोग करें।

चंडीगढ़,सुनीता शास्त्री

पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है। वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वैश्विक तापमान इतनी तेजी से क्यों बदल रहा है। इस बीच, एक कारण यह भी सामने आया है कि आजकल लोग बहुत कम इस्तेमाल के बाद ही कपड़े बदल लेते हैं, इस कारण से पेट्रोलियम पदार्थों का दुरुपयोग हो रहा है और दुनिया के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार, आजकल लोग कपड़ों को ज्यादा बार प्रयोग नहीं करते और जल्दी ही उन्हें फेंक देते हैं।

कपड़े दिन-ब-दिन सस्ते होते जा रहे हैं और बहुत जल्दी बेकार कर दिये जाते हैं। इन्हें या तो कूड़े में फेंका जाता है या जलाया जाता है।

दुनिया की जीडीपी की तुलना में कपड़ों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2000 में, दुनिया में 50 अरब कपड़े बेचे गये थे, जबकि 2015 में यह आंकड़ा बढकरक़100 अरब हो गया। इसके कारण हर जगह बेकार कपड़ों के पहाड़ खड़े होते जा रहे हैं।अतर्राष्ट्रीय ख्याति के विचारक एवं बौद्ध गुरु, भिक्खू संघसेना, जो सेव दि हिमालया फाउंडेशन के संस्थापक हैं, ने कहा, समय आ गया है कि हम पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें और अपनी आने वाली पीढियों की खातिर हिमालय और पर्यावरण की रक्षा के लिए उचित उपाय करें।

वे सेव दि हिमालया फाउंडेशन की चंडीगढ़ शाखा की स्थापना के सिलसिले में इन दिनों लेह (लद्दाख) से यहां आये हुए हैं। उल्लेनीय है कि वस्त्र निर्माण का 63 प्रतिशत कच्चा माल पेट्रोलियम से प्राप्त होता है। इस प्रकार, हर साल लाखों टन पेट्रोलियम की बर्बादी होती है। यह ग्लोबल वार्मिंग की वजह बनती है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे कपड़ों को अधिक बार प्रयोग करें।

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