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चंडीगढ़

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर नुक्कड़ नाटक, स्लोगल राइटिंग प्रतियोगिता आयोजित

April 01, 2019 10:19 PM
चंडीगढ़, सुनीता शास्त्री।
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर, ग्रिड ने कई कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए कार्यशाला, स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता और ऑटिज्म के प्रति लोगों में जागरूकता के विषय पर सुखना लेक पर एक नाटक का आयोजन शामिल था।ऑटिज्म के प्रति जागरूकता पैदा करने संबंधी स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता ग्रिड (जीआरआईआईडी) में आयोजित की गई। प्रतियोगिता तीन अलग-अलग भाषाओं यानी हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आयोजित की गई थी।
पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले विजेताओं को पुरस्कार राशि क्रमश: 1000/-, 750/- और 500/- रुपए थी। सभी स्लोगन शाम 5:30 बजे सुखना लेक में प्रदर्शित किए गए।  जिनका उदेश्य लोगों को ऑटिज्म  के बारें में जागरूक करना था।
विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार वितरित किए गए।इस प्रतियोगिता में ग्रिड के डी.एड., बी.एड., और एम.एड के सभी 92 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। उनके साथ ही एम.फिल (पीएसडब्ल्यू एंड सीपी) और एमडी के स्टूडेंट्स ने भी इस प्रतियोगिता में भाग लिया।
यह प्रतियोगिता तीन अलग-अलग भाषाओं में आयोजित की गई थी जिसको जज और मूल्यांकन एक टीम ने किया, जिसमें डॉ.गुरविंदर सिंह, डॉ. शिवांगी मेहता, सुश्री नाजली और डॉ. वसीम अहमद द्वारा शामिल थे और इस टीम का नेतृत्व प्रो.प्रीति अरुण ने किया था।हिंदी में पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार सुश्री ज्योति (एम.एड.), (सुश्री आरती (बी.एड.), और श्री कमलजीत (डी.एड.) ने जीता। वहीं अंग्रेजी और पंजाबी में ये प्रतियोगिता क्रमश: सुश्री हर्षदीप (डी.एड.), सुश्री अबाबील (बी.एड.), सुश्री रिनी मैथ्यू, और सुश्री हिमांशी (एम.एड.), सुश्री दिवनीत (बी.एड.), सुश्री तमन्ना (डी.एड.) ने जीती। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक कार्यशाला भी आयोजित की गई थी।
इस कार्यशाला में 100 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को संबोधित करने वालों में बी.एस.चवन, डायरेक्टर प्रिंसिपल, जीएमसीएच, डॉ. प्रीति अरुण, ज्वाइंट डायरेक्टर, ग्रिड, डॉ.शिवांगी मेहता, डॉ. वसीम अहमद, अस्सिटेंट प्रोफेसर ग्रिड, डॉ.अर्चना, साइक्रेट्री डिपार्टमेंट, जीएमसीएच और डॉ.दीप्ति रैना (चाइल्ड स्पेशलिस्ट-ग्रिड) शामिल थे। इस कार्यशाला के दौरान इन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ऑटिज्म की मुख्य विशेषताओं जिनमें सामाजिक व्यवहार, संचार और प्रतिबंधित दोहराव व्यवहार के बारे में प्रशिक्षित किया गया।
उनको बताया गया कि कैसे ऐसे बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है, इस पर उन्हें जागरूक किया गया। वहीं चंडीगढ़ ऑटिज्म स्क्रीनिंग इंस्ट्रमेंट (सीएएसआई) का उपयोग करके कम उम्र में ऑटिज़्म से पीडि़त बच्चों की पहचान की गई। यह टूल डॉ.प्रीति अरुण और प्रो. चवन द्वारा हेल्थ वर्कर्स द्वारा कम उम्र में ऑटिज्म से पीडि़त बच्चों की पहचान करने और उनकी स्क्रीनिंग के लिए विकसित किया गया जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए ग्रिड कॉलेज के स्टूडेंट्स द्वारा लिखे गए विभिन्न स्लोगन के साथ एक जागरूकता रैली सुखना लेक पर प्रदर्शित की गई।
ऑटिज्म से पीडि़त बच्चों की चुनौतियों, सीमाओं और उनकी ताकत को समझने के लिए उनके साथ एक नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किया गया। 
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