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राष्ट्रीय

रेरा में अधिकारी होने के बावजूद भी उपभोक्ता मंच में सुने जा सकते है हाउसिंग मामले

April 18, 2019 08:30 AM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने अपने एक अहम फैसले में ब्यवस्था देते हुए कहा है कि - रीयल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (रेरा) 2016 में अधिकारी होने के बावजूद भी रियल स्टेट या हाउसिंग से संबन्धित शिकायतें उपभोक्ता मंच में सुनी जा सकती है। लेकिन उपभोक्ता अपने शिकायत निवारण के लिए कोई एक ही रास्ता चुन सकता है। मसलन अगर मामला उपभोक्ता मंच में दिया गया है तो इसी मामले को रेरा अधिकारी के पास नहीं ले जा सकते या मामला रेरा अधिकारी के पास लंबित है तो उसी मामले को उपभोक्ता मंच में नहीं उठा सकते।
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के जस्टिस आर के अग्रवाल एवं श्रीमती एम श्रीशा की खंडपीठ ने शिकायत संख्या 1764/ 2017 सहित करीब 49 मामले को एक साथ निपटाते हुए 15 अप्रैल 2019 को अपने निर्णय मे उपरोक्त ब्यवस्था दी। आयोग ने प्रतिपक्ष टुडे होम्स की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि- रेरा अधिनियम 2016 के बनने के बाद उपभोक्ता मंच में इसकी शिकायत नहीं सुनी जा सकती। आयोग ने टुडे होम्स के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि रेरा अधिनियम की धारा 79 के तहत रेरा अधिकारी के क्षेत्राधिकार से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई कोई सिविल कोर्ट या अन्य अधिकारी नहीं कर सकता। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता मंच सिविल कोर्ट नहीं है और रेरा अधिकारी का होना उपभोक्ता मंच के अतिरिक्त उपचार के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकता। आयोग ने कहा रेरा अधिनियम 2016 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 दोनों एक दूसरे के पूरक है और उपभोक्ता अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं है जो रेरा अधिनियम 2016 के विरोधाभाषी हो।

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