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पंजाब

शताबगड़ में देह शामलात ज़मीन को लेकर हुआ विवाद, दलित परिवारों ने पुलिस पर धक्केशाही करने का लगाया आरोप

April 21, 2019 08:59 PM

पुलिस ने आरोप नकारे

ज़ीकरपुर, जेएस कलेर
छतबीड रोड पर पड़ते गाँव शताबगड़ में आज शामलात ज़मीन को लेकर विवाद हो गया। गाँव के दलित परिवारों ने आरोप लगाया कि एक उच्चप्रभाव वाला व्यक्ति पुलिस को साथ लेकर धक्के से उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा था। गाँव के दलित भाईचारे की ओर से इसका डट कर विरोध किया गया। दूसरी ओर पुलिस ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
मामलो की जानकारी देते गाँव के सरपंच बलजीत सिंह ने बताया कि उनके गाँव में 18 एकड़ ज़मीन देह शामलात है जिस पर गाँव के आठ दलित परिवारों का साल 1946 से कब्ज़ा है। उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि बीते दिन एक व्यक्ति की ओर से इस ज़मीन की गांव वालों से धोखे से पावर ऑफ अटार्नी अपने नाम करवा ली। जब उनकों पता चला तो उनकी ओर से पावर ऑफ अटार्नी रद्द करवा दी गई। उक्त व्यक्ति की ओर से ए.डी.सी. की अदालत में केस डाला गया है जो उनके हक में हो गया। परन्तु इसके बावजूद आज वह व्यक्ति पुलिस की शह पर ज़मीन पर कब्ज़ा करने की नीयत से पहुँच गया। जबकि ज़मीन पर 1946 से ही उनका कब्ज़ा है जहाँ उन्होंने इस समय पर गेहूँ बीजी हुई है। गाँववासियों ने कथित आरोप लगाया कि सुबह से गाँव में माहौल तनावपूर्ण हुआ है और गाँव का दलित परिवार देर रात तक अपनी ज़मीन में ही डटे हुए थे।  बात करने पर थाना प्रमुख इंस्पेक्टर गुरजीत सिंह ने कहा कि ज़मीन को ले
कर विवाद होने की सूचना मिली थी जिस पर उनकी ओर से मौके पर पहुँच कर स्थिति को बिगड़ने से रोक दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों की ओर से ज़मीन पर कब्ज़े का दावा किया जा रहा है जिस बारे माल विभाग ही स्पष्ट करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को कानून हाथों में लेने की इजाज़त नहीं दी जाऐगी।
बात करने पर अनिल शर्मा ने कहा कि तकरीबन एक साल पहले यह ज़मीन उन्होंने दलित भाईचारे से खरीदी थी जिसके सभी दस्तावेज़ उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने ने कहा कि गाँव वासियों की ओर से पूरे पैसे लेने पर ज़मीन बेची गई थी और अब मन में बईमानी आने कारण झूठ बोल रहे हैं। ए.डी.सी. की अदालत में केस हारने बारे उन्होंने कहा कि अभी केस विचारधीन है जिसका कोई फ़ैसला नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से अपनी 56 बीघे 7 बिसवे ज़मीन में गेहूँ बीजी गई थी जिसकी कटाई करने के लिए गए थे जिसका उक्त दलित भाईचारे ने विरोध किया था।

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