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धर्म

अपने परिवेश को स्वच्छ रखना नैतिक जिम्मेदारी

May 21, 2019 09:53 PM

ऋषिकेश (ओम रतूड़ी) परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आज राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, माँ गंगा सहित देश की सभी नदियों को समर्पित मानस कथा में मेयर ऋषिकेश अनीता ममगाई ने सहभाग किया। प्रख्यात मानस कथाकार मुरलीधर महाराज के मुखारबिन्द से माँ गंगा के साथ-साथ मानस की ज्ञान रूपी गंगा भी प्रवाहित हो रही है तथा स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के श्रीमुख से प्रतिदिन अध्यात्म के साथ-साथ, राष्ट्रभक्ति, वृक्षारोपण, स्वच्छता और नदियों के संरक्षण का संदेश प्रसारित किया जाता है।
श्रीराम कथा के मंच से स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने-अपने शहरों को स्वच्छ, सुन्दर और प्रदूषण से मुक्त बनाये रखने का संदेश दिया। उन्होने कहा कि उत्तराखंड धरती पर स्वर्ग है, और इस स्वर्ग को स्वर्ग बनायें रखने के लिये हम सभी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझना होगा और उसे निभाना भी होगा। हमारे परिवेश को स्वच्छ रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होने कहा कि देश का हर व्यक्ति स्वच्छता राजदूत हो तभी देश स्वच्छ हो सकता है। सफाई से तात्पर्य केवल सड़कों को साफ करने से नहीं है बल्कि स्वच्छता तो दिलों में भी होनी चाहिये। आज भारत से भ्रष्टाचार, जातिवाद, नक्सलवाद, वाद विवाद, अराजकता और आंतकवाद जैसे विचारों की भी सफाई होनी चाहिये वहीं सम्पूर्ण स्वच्छता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मेरा शहर, मेरी पहचान, मेरी शान है अगर शहर स्वच्छ, सुन्दर और सुरम्य होगा तो वहां रहने वाले लोग भी कम बीमार होंगे। उन्होने कहा कि बाहर सफाई होगी तो दिलों में सच्चाई होगी तो हमारा जीवन स्वस्थ भी होगा और समृद्ध भी होगा।
मेयर श्रीमती अनीता ममगाई जी ने कहा कि जब भी मैं स्वामी जी महाराज से मिलती हूँ तो अक्सर वे ऋषिकेश को स्वच्छ और सुन्दर बनाने के विषय में ही चर्चा करते है और मुझे कार्य करने की एक नई प्रेरणा मिलती है। उन्होने ऋषिकेश शहर के लोगों से निवेदन किया कि वे शहर को स्वच्छ रखने में सहयोग प्रदान करें, कूडादान का प्रयोग करें कूड़े को भी बिल्कुल भी न जलायें इससे खतरनाक प्रदूषण होता है, जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। तथा सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ बनायें रखे।
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी जी ने कहा कि ऋषिकेश देवभूमि है और पूरे विश्व से यहां पर अनेक लोग योग और गंगा दर्शन के लिये आते हैं यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने शहर को स्वच्छ बनायें रखें। स्वच्छ रहेंगे तो स्वस्थ रहेंगे।
कथा के छटवे दिन श्रीराम कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के लिये मन की निर्मलता आवश्यक है। निर्मल मन से ही परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है और मन निर्मल और शान्त तभी हो सकता है, जब बाहरी वातावरण निर्मल होगा, शुद्ध होगा एवं सात्विक होगा। हम अपने आसपास, गली-मोहल्ला साफ रखे, स्वच्छता में ही प्रभु का वास होता है। उन्होने कहा कि निर्मल मन और स्वच्छता का सबरी से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। सबरी निर्मल मन के साथ धैर्य से प्रतिदिन प्रभु के आने का इंतजार करती और अपने प्रभु के लिये जंगल के रास्ते साफ करती थी उसकी यह लगन देखकर प्रभु श्री राम सबरी से मिलने आये और उसके झूठे बेर भी खाये यही है निर्मलता का श्रेष्ठ उदाहरण।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं श्रीराम कथा व्यास संत मुरलीधर जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा मेयर ऋषिकेश श्रीमती अनीता ममगाई जी एवं सभी पाषदों को भेंट कर आशीर्वाद दिया तथा विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की।

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