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ज़ीरकपुर की इमारतों में सुरक्षा प्रबंधों की कमी, सूरत कांड से डरे लोगों में दहशत

May 25, 2019 09:31 PM

ज़ीरकपुर, जे एस कलेर:
गुजरात के शहर सूरत की एक बिल्डिंग में आग लगने कारण 20 बच्चों की मौत होने से ज़ीरकपुर इलाके में भी दहशत का माहौल है क्योंकि शहर में भी इस तरह के कई भयानक अग्नि कांड हो चुके हैं, हालांकि अभी तक किसी की जान नहीं गई है लेकिन लाखों रुपए कीमत के समान का नुक्सान हो चुका है। लोगों में ज़्यादा डर इस कारण भी है क्योंकि शहर में 3 लाख की आबादी होने के बावजूद अपना आग बुझाने का कोई प्रबंध नहीं ऊपर से शहर में फायर ब्रिगेड से एन.ओ.सी लिए बगैर और फायर सेफ्टी नियमों का उलघंना कर बनी बहु मंजिला इमारतों में लोगों की जान खतरे में है। लगातार हर साल ही किसी न किसी इमारत या गोदाम में लाखों का समान जल कर राख हो रहा है। इसके बावजूद प्रशासन व फायर बिग्रेड विभाग इन घटनाएँ से सबक नहीं ले रहा। क्षेत्र में चल रहे गोदामों की मंज़ूरी भी मालिकों ने नगर कौंसिल से नहीं ली हुई। दरअसल ज़ीरकपुर के कई हिस्सों में रिहायशी इलाके ऐसे हैं, जिनकी सड़कें कम चौड़ी हैं। इसके बावजूद इन इलाकों में धड़ल्ले से फ्लैटों का निर्माण कार्य चल रहा है। यह फ़लैट न तो बिल्डिंग बाईलाज़ को पूरा करते हैं और न ही फायर ब्रिगेड के नियमों को। पुराना शहर बलटाना, शिवालिक विहार, ए.के.एस कालोनी, पभात गाँव, लोहगढ़, बिशनपुरा, ढकोली, पीरमुछाला आदि क्षेत्र ऐसे हैं, जहाँ रिहायशी इलाके में बिना मंज़ूरी से फ्लैटों का निर्माण किया जा रहा है जहाँ फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी अंदर नहीं जा सकती। ऐसे इलाकों में तीन से चार मंजिल की बड़ी इमारतें बनाई गई हैं, जिनमें सैंकडों लोग रहते हैं। शहर की ज़्यादातर इमारतों में फायर सेफ्टी के उपकरण भी नहीं हैं, जिसके साथ अगर थोड़ी सी भी आग लगती है तो वह पूरी ही इमारत में फैल सकती है। हालाँकि ज़्यादातर अग्निकांड की मुख्य वजह तकनीकी ख़राबी या मानवीय भूल ही होती है। नगर परिषद में पार्षद बने बैठे कुछ बिल्डर अपने पद को दुरूपयोग कर करोड़ों के मालिक बने बैठे हैं। जो वहां के वाशिंदों की जान से खिलवाड़ करने से गुरेज न करते हुए अपनी रोटियां व गोटियां फिट करने में व्यस्त हैं।
सूरत अग्निकांड में आग का कारण मानवीय गलतियाँ थी, वहाँ मरने वालों की ज़्यादा संख्या भी मानवीय लापरवाही ही थी। अग्निकांड में जानमाल के बड़े नुक्सान के मुख्य कारण हादसे वाली जगह पर आग बुझाने के यंत्रों का न होना, निकासी द्वारों की कमी, कर्मचारियों की ओर से हादसो की गंभीरता को न समझ पाना ही बनते हैं। बड़े हादसे सबक देते हैं कि घनी होती मानवीय बस्तियों में अपर्याप्त सुरक्षा प्रबंधों के रहना हर पल मौत के साए में रहने जैसा है। यहाँ समस्या यह भी है कि हादसे के बाद भी आपातकालीन सेवाएं लोगों की जान बचाने में नाकाम हो जातीं हैं। ज़ीरकपुर शहर के बिलडरों की सोच ही ऐसी है कि यहाँ रहने और काम करने की जगह की बात ही होती है, बाकी सुरक्षा प्रबंधों की बातों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है, जबकि किसी भी बड़ी इमारत, कारख़ाने में सुरक्षा प्रबंध, सबसे पहले होने, उसके बाद ही बाकी सुविधाओं और निर्माण की बात होनी चाहिए। ज़ीरकपुर में अभी भी सैंकडों बहु-मंजिला इमारतें हैं जहाँ सुरक्षा मानक को ताक पर रखा गया है। ऐसे ही लाखों लोगों को इमरजेंसी के समय सुरक्षा की कोई जानकारी नहीं है, जो कि उनको दी जानी बेहद ज़रूरी है।

इमारतों की होगी जांच: फायर अफ़सर
फायर अफ़सर मनजीत सिंह ने कहा कि शहर की इमारतों और गोदामों को भी फायर एन.ओ.सी लेने के लिए नोटिस जारी किये जाएंगे।

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