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हरियाणा

पेयजल एवं बिजली प्रबन्ध करने तथा बाढ़ एवं सूखे की स्थिति से निपटने को तैयार रहने के निर्देश

June 14, 2019 06:37 AM

चण्डीगढ़, फेस2न्यूज:
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को प्रदेश में जून एवं जुलाई महीने के दौरान पेयजल एवं बिजली के पर्याप्त प्रबन्ध करने के निर्देश देने के साथ-साथ बाढ़ एवं सूखे जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के किसी भी हिस्से से पेयजल की कमी, बाढ़ और पानी खड़े होने से सम्बंधित कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए।
मुख्यमंत्री यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपायुक्तों के साथ प्रदेश में लू, सूखे एवं बाढ़ से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने ऐसे गांवों और शहरों की पहचान करने के निर्देश दिए जहां इन दो महीनों में पेयजल आपूर्ति की समस्या आ सकती है ताकि इससे निपटने के लिए पर्याप्त प्रबन्ध किए जा सकें। उन्होंने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं सिंचाई और जल संसाधन विभागों को भी राज्य में ऐसे जलघरों की पहचान करने के निर्देश दिए जो खाली हैं या जिनमें पानी कम है ताकि उन्हें पानी से भरा जाना सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि राज्य में कुल 1636 जलघर हैं, जिनमें से 1613 पूरी तरह से भरे हुए हैं और शेष 23 जलघरों को भरने का कार्य प्रगति पर है। बैठक में यह भी बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में इस वर्ष जनवरी माह में हुई बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की बैठक में 167 अल्पावधि परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया था, जिनमें से 104 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष परियोजनाएं 25 जून, 2019 तक पूरी हो जाएंगी। यह भी बताया गया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 560 क्यूसिक पानी की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की नहरों से गाद निकाले जाने के भी निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि राज्य में 825 नहरों में से 568 नहरें यमुना नदी की ओर तथा 257 नहरें घग्गर नदी की ओर हैं। केवल 605 नहरों में से गाद निकाले जाने की आवश्यकता है और यह कार्य प्रगति पर है, जिसे 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इस सम्बंध में सम्बंधित उपायुक्तों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बरसात के मौसम के दौरान यमुनानगर क्षेत्र में पानी खड़े होने की समस्या की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन न हो। इसके अतिरिक्त यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वैध खनन का कार्य भी निर्धारित मानदंडों के अनुसार हो ताकि गहरे खड्डïे न हो, जिनकी वजह से पानी खड़े होने की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने हिमाचल सीमा के साथ लगते क्षेत्रों में खनन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानूसन के दौरान हथनीकुण्ड बैराज से पानी के अधिक बहाव के कारण जिला करनाल और यमुना के साथ लगते गांवों में पानी के प्रवेश को रोकने के लिए समय रहते एक अकास्मिक योजना तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को पानी के टैंकरों की पर्याप्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए ताकि जहां कहीं जब भी पेयजल की आवश्यकता हो उसे पूरा किया जा सके। बैठक में बताया कि पहले की तुलना इस वर्ष अब तक पानी के टैंकरों से आपूर्ति एक तिहाई तक हुई है जो यह दर्शाता है कि प्रदेश में पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। बहरहाल, पर्याप्त संख्या में टैंकरों की व्यवस्था कर ली गई है।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को यह अध्ययन करने और पता लगाने के भी निर्देश दिए कि धान के स्थान पर मक्का और अरहर दाल के साथ-साथ किसी अन्य फसल की पैदावार की जा सकती है ताकि पानी की बचत की जा सके। उन्होंने कहा कि पानी की अधिक खपत करने वाली फसलों के विविधिकरण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि किसानों को धान के स्थान पर मक्का और अरहर दाल की पैदावार करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई ‘‘जल ही जीवन योजना’’ के तहत अब तक 10 हजार एकड़ से अधिक भूमि का पंजीकरण किया जा चुका है।

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