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हरियाणा

बढ़ती जनसंख्या पहुँचाती है देश और पर्यावरण दोनों को नुकसान

July 12, 2019 12:28 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
किसी भी देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी, अपराध, अशिक्षा, गरीबी, कुपोषणता को बढ़ावा देती है और प्राकृतिक संसाधनों के सीमित होने से उनका दोहन भी बढ़ जाता है और ऐसे में ज्यादा दोहन विध्वंस की ओर ले जायेगा।
यह जानकारी करनाल में विश्व जनसंख्या दिवस-2019 के उपलक्ष्य में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में जनस्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में दी गई। गौरतलब है कि पूरे विश्व में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाया जाता है ताकि बढ़ती जनसंख्या के भयावह परिणामों से जन मानस को सचेत किया जा सके। इस दौरान बताया गया कि बढ़ती जनसंख्या देश और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुँचाती है और आज के डिजिटल युग में भी बहुत से दम्पति अभी भी अशिक्षा, भ्रांतियों और जानकारी के अभाव में परिवार नियोजन के तरीकों को नहीं अपनाते जिससे वो गरीबी के दलदल से बाहर नहीं निकल पाते।
इस मौके पर कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और संस्था के जन-स्वास्थ्य जागरूकता के नोडल अधिकारी डॉ राजेश गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 जुलाई 1987 को विश्व की आबादी 5 अरब हो गयी थी और उसके बाद से ही सन 1989 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाये जाने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया की करीब 17 प्रतिशत आबादी रहती है जिसका मतलब है कि दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है।
डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि जनंसख्या दिवस का मतलब सिर्फ परिवार नियोजन की बात करने तक सीमित नहीं है। ये महिलाओं के मानवाधिकार, लैंगिक समानता, परिवार नियोजन की जानकारी और स्वास्थ्य सुविधाओं की प्राप्ति के अधिकार के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के मुद्दों को भी प्रासंगिक बनाने का दिवस है। हर महिला को ये हक होना चाहिए कि वो अपने परिवार को सीमित रखने का फैसला ले सके। उन्होंने बताया कि सरकार परिवार कल्याण से जुड़ी बेहतरीन व उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कृतसंकल्प है ताकि लोगों को बिना किसी भेदभाव या असमानता के परिवार कल्याण के साधनों की सम्पूर्ण और सटीक जानकारी मिल सके।
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की डॉ प्रीती ने वहां मौजूद लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने माला - एन की गोलियों, इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियों, कॉपर-टी, कॉन्डोम, इंजेक्शन अंतरा के बारे में बताया कि किन-किन महिलाओं में कौन-कौन सा तरीका ज्यादा बेहतर है। उन्होंने कहा कि ये सभी परिवार नियोजन के साधन सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त उपलब्ध हैं। उन्होंने पुरुष और महिला नसबंदी के बारे में भी बताया और इसमें सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भी उल्लेख किया। वहां मौजूद पुरुषों से भी परिवार नियोजन में हिस्सेदारी का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के समापन उद्बोधन में डॉ राजेश गर्ग ने बताया कि कि परिवार नियोजन से जुड़े फैसलों में सास की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने वहां मौजूद बुजुर्ग महिलाओं से आग्रह किया कि वो अपनी बहू पर दो से ज्यादा बच्चे करने का दबाव ना बनाएं।

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