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हरियाणा फार्मेसी कौंसिल के पूर्व चेयरमैन ने किया लाखों रुपये का घोटाला

August 10, 2019 07:25 PM

चंडीगढ़ ,फेस2न्यूज:

Arun Prashar
  
KC Goyal
  
हरियाणा राज्य फार्मेसी कौंसिल में लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। पूर्व चेयरमैन कृष्ण चंद गोयल द्वारा कौंसिल के लाखों रुपये के गबन का मामला हरियाणा राज्य विजीलेंस ब्यूरो की जांच में सामने आया है। ब्यूरो के डीएसपी बलवीर सिंह द्वारा की जा रही जांच में बड़े खुलासे हुये हैं। कौंसिल के रजिस्ट्रार अरुण पराशर ने बताया कि पूर्व प्रधान कृष्ण चंद गोयल ने हरियाणा राज्य फार्मेसी कौंसिल में लाखों रुपये का घोटाला किया। चौकसी ब्यूरो द्वारा पूर्व गोयल के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। 

विजीलेंस ब्यूरो के डीएसपी बलवीर सिंह ने कहा है कि कृष्ण चंद गोयल के खिलाफ जल्द ही कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा। उन पर कौंसिल के लाखों रुपये के घोटाले करने का विजीलैंस ब्यूरो के पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं। 

हरियाणा विजीलेंस ब्यूरो की जांच में अहम खुलासे 

हरियाणा फार्मेसी कौंसिल के पूर्व चेयरमैन ने किया लाखों रुपये का घोटाला
-चेयरमैन रहते हुये वकीलों की फर्जी रसीदें लगाकर लाखों रुपये लूटे
-गलत तरीके से फार्मेसी से ले लिया लाखों रुपये का टीए/डीए
-कर्मचारियों का एफिडेविट, घर नहीं जाते थे गोयल, कार्यालय में ही सोकर लिया टीए/डीए
-कौंसिल के प्रस्तावों को टेंपर करके पहुंचाया नुकसान


यह है मामला
15 दिसंबर 2017 को राज्य चौकसी ब्यूरो द्वारा लंबी जांच के बाद वित्तीय अनियमितताएं मिलने पर केस दर्ज किया गया था। ब्यूरो की जांच पाया गया है कि 4 मई 2015 को मुख्य सचिव ने चौकसी विभाग व महानिदेशक को जांच के आदेश दिए थे। कौंसिल के उस समय के उपाध्यक्ष पंकज जैन व अन्य मेंबरों ने इस संबंध में शिकायत दी थी। गोयल पर निजी केसों में कोर्ट में पैरवी के लिए कौंसिल से फीस लेकर हानि पहुंचाने का आरोप लगा था। जांच में पाया गया कि 10 जून 2014 को प्रस्ताव को टेंपर करके निजी फायदे के लिए फार्मेसी कौंसिल को हानि पहुंचाने की नियत से प्रस्ताव को बढ़ा दिया गया। 
यूं दिया गोयल ने घोटाले को अंजाम
कृष्ण गोयल के खिलाफ हरियाणा राज्य विजीलेंस ब्यूरो में भ्रष्टाचार का केस दर्ज है। उसने अपने कार्याकाल में फार्मेसी कौंसिल के लाखों रुपये का गबन किया है। जब कौंसिल के सदस्यों ने कृष्ण गोयल द्वारा लगातार फार्मेसी कौंसिल के लाखों रुपये के गबन के खिलाफ आवाज उठाई, तो सरकार ने मामले की जांच विजीलेंस ब्यूरो को सौंप दी। लंबी जांच के खिलाफ विजीलेंस ब्यूरो ने कृष्ण गोयल को भ्रष्टाचार का आरोपी पाया और उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया। गोयल ने फार्मेसी कौंसिल हरियाणा में लूट मचा रखी थी। गलत तरीके से टीए/डीए बिल क्लेम करके ले लिये। टीए/डीए क्लेम करने वाले की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होती है कि वह सही रसीद पेश करे। इसके अलावा लगभग 3 लाख 61 हजार रुपये  का मैडीकल क्लेम ले लिया, जबकि कौंसिल के प्रावधानों में ऐसा नहीं है और सदस्यों ने भी इससे पूर्व ऐतराज जताया था, जिसके बाद नियमों की उल्लंघना करते हुए गोयल ने दबाव बनाकर यह पैसा कौंसिल से निकलवा लिया। साथ ही प्रतिमाह 12 विजिट का डीए/डीए लेने के अलावा 3 हजार रुपये प्रति सीटिंग अलाउंस ले लिया।  गोयल ने कौंसिल में इतना फर्जीवाड़ा किया, जिसका कोई अंत नहीं था। 
टीए/डीए के लाखों रुपये निकलवा लिये
गोयल सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को कौंसिल कार्यालय में आते थे, जिसका टीए/डीए वह प्रतिमाह की पहली तारीख को क्लेम करके ले लेते थे, परंतु जो कर्मचारी उनके साथ रहते थे, उन्होंने विजीलैंस में ब्यान एवं एफिडेविट देकर दावा किया है कि कृष्ण गोयल सोमवार से शुक्रवार तक कौंसिल कार्यालय में रहते थे और रात को भी कौंसिल कार्यालय में सोते थे, जिसके बावजूद उन्होंने टीए/डीए फर्जी तरीके से लिया। गोयल यहीं नहीं रुके, बल्कि सप्ताह के तीन दिनों के अलावा उन्होंने लगभग 6 महीने के बाद ज्यादातर मंगलवार और वीरवार का पिछले महीनों का टीए/डीए यह कहकर ले लिया कि वह हाइकोर्ट या कहीं अन्य जगह गये थे। इसी तरह गोयल ने कौंसिल से पांच दिन का टीए/डीए क्लेम ले लिया। गोयल ने लगभग 900 कार्यदिवसों में से लेकिन 750 दिन का टीए/डीए ले रखा है। 

गोयल का भ्रष्टाचार यहीं नहीं रुका, उन्होंने अदालतों के वकीलों की फर्जी रसीदें लगाकर लगभग 8 लाख 40 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लिये। जबकि रसीदें यदि वकीलों की थी, तो पैसा भी वकीलों के खातों में ट्रांसफर करना चाहिए था। जब इस संबंध में वकीलों से इंक्वायरी की गई, तो पता चला कि एक वकील की मृत्यु तो 2002 में हो चुकी है, लेकिन उसकी रसीद 2014 में बनाकर पैसे कौंसिल से निकलवा लिये। जबकि दूसरे वकील ने किसी भी तरह की रसीद जारी करने से इंकार कर दिया। गोयल ने फार्मेसी कौंसिल को लाखों रुपये की चपत लगा दी।

अरुण पराशर ने बताया कि चौकसी ब्यूरो द्वारा लगभग 2 साल पूर्व गोयल के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था, परंतु उसमें अभी तक चौकसी ब्यूरो द्वारा चालान पेश नहीं किया गया, जिसके लिये वह मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करके इस मामले में दखल देने की मांग करेंगे, ताकि गोयल द्वारा फार्मेसी कौंसिल से लूटे गये लाखों रुपये की रिकवरी की जा सके।
अदालत को भी कर दिया गुमराह
वहीं अरुण पराशर ने बताया कि17 दिसंबर 2017 को कृष्ण चंद गोयल ने स्वयं ही फार्मेसी कौंसिल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी सदस्यों की सहमति से मेरे (अरुण पराशर) को रजिस्ट्रार को एक साल के लिये लगाये जाने की अनुमति सरकार से ली थी। अरुण पराशर की एक साल की टर्म खत्म होने के बाद फिर से एक साल बढ़ाये जाने की अनुमति अपना हस्ताक्षरयुक्त पत्र सरकार को भेजकर अनुमति मांगी। अरुण पराशर ने बताया कि गोयल की अध्यक्षता में ही कौंसिल के सदस्यों की बैठक में रजिस्ट्रार का वेतन 40 हजार रुपये मासिक फिक्स किया गया। गोयल यह वेतन 50 हजार रुपये करवाना चाहते थे, परंतु सदस्यों ने इस पर सहमति नहीं दिखाई और 25 हजार रुपये मासिक से वेतन 40 हजार रुपये कर दिया गया। अरुण पराशर ने आरोप लगाया कि गोयल मुझ पर दबाव बनाकर अवैध रजिस्ट्रेशन करवाना चाहता था, जिसका मैंने अपने पद की गरिमा को बनाये रखने के लिये लगातार विरोध किया। जिसके कारण गोयल ने मेरी खिलाफत शुरु कर दी और मेरी पढ़ाई को लेकर भी सभी को गुमराह कर रहा है। 
गोयल पर एक ओर केस दर्ज होना चाहिए
अरुण पराशर के मुताबिक उन्होंने 12वीं कक्षा दिल्ली के जिस बोर्ड से की है, उसे वर्ष 2003 में दिल्ली हाइकोर्ट और 2015 में पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट से केस जीते है और इसी बोर्ड से पासआउट हजारों लोग सरकारी एवं निजी कंपनियों में कार्यरत है। गोयल ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट को गुमराह किया है। जिस बोर्ड से मैंने 12वीं कक्षा पास की है, उसके दस्तावेज ना लगाकर दूसरे बोर्ड के सार्टीफिकेट कोर्ट में पेश करके अदालत को गुमराह कर दिया। इसलिये कृष्ण चंद गोयल के खिलाफ वह पुलिस को शिकायत दर्ज करवायेंगे कि उन्होंने कोर्ट को धोखा दिया है। मैं जिस बोर्ड से पासआउट हूं और कोर्ट में जिस बोर्ड के दस्तावेज गोयल की ओर से पेश किये गये, वह दोनों ही अलग-अलग हैं। इसलिये गोयल के खिलाफ 420 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए। 
खुद ही मांगी गोयल ने रजिस्ट्रार की एक्सटेंशन
अरुण पराशर ने कहा कि इतना ही नहीं यदि मैं क्वालीफाई परर्सन नहीं था, तो मेरी गोयल ने एक्सटेंशन सरकार से क्यों मांगी। साथ ही जब मैंने बतौर रजिस्ट्रार फार्मासिस्टों की रजिस्ट्रेशन सार्टीफिकेट पर साइन किये और यदि गोयल जोकि मेरे कार्यकाल में लगभग दो साल तक कौंसिल के चेयरमैन रहे, उन्हें लगता था कि मेरी क्वालीफिकेशन फर्जी है, तो उन्होंने रजिस्ट्रेशन सार्टीफिकेटों पर काउंटर साइन क्यों किये। मेरे हस्ताक्षरयुक्त सार्टीफिकेटों पर काउंटर साइन करके कृष्ण गोयल इस बात को खुद ही वैरीफाई कर चुके हैं कि मैं पूरी तरह से क्वालीफाई हूं। अरुण पराशर ने बताया कि 12वीं परीक्षा के बाद मैंने करुपानिधि कॉलेज ऑफ फार्मेसी बैंगलोर जहां से देश के बड़े-बड़े फार्मासिस्ट पासआउट हैं, वहां से फार्मेसी डिप्लोमा हूं। पिछले 15 साल से हरियाणा का रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूं। अरुण पराशर ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि मेरे फार्मेसी डिप्लोमा की किसी भी एजेंसी से जांच करवा सकते हैं, ताकि दूध का दूध, पानी का पानी हो सके। 

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