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धर्म

व्यक्ति की सामाजिक व आध्यात्मिक प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है अहंकार: शास्त्री

August 11, 2019 12:37 PM

चण्डीगढ़,फेस2न्यूज:
जो व्यक्ति अहंकारी होता है वह अपने आप को सर्वश्रेष्ठ समझने लगता है। अपनी प्रशंसा व सम्मान चाहता है। व्यक्ति की प्रगति में अहंकार बहुत बड़ी बाधा है, अहंकारी व्यक्ति भगवान को अच्छे नहीं लगते हैं। भगवान को जब लगता है कि मेरे भक्त में अहंकार का अंकुर प्रस्फुटित होने लगा है तो भगवान उसे समाप्त कर देते हैं, यही भक्त के हित में है। से. 28 स्थित प्राचीन शिव खेड़ा मंदिर में शिव पुराण के माध्यम से नारद मोह की कथा सुनाते हुए पंडित ईश्वरचंद शास्त्री, जो देवालय पूजक परिषद्, चण्डीगढ़ के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि जब नारद जी भगवान की कृपा से गंगा के किनारे पर ध्यान में बैठे तो उनकी समाधि लग गई। इंद्र ने उनकी समाधि भंग करने के लिए कामदेव को भेजा परंतु कामदेव नारद जी की समाधि भंग करने में सफल नहीं हुए। आखिर कामदेव ने नारद जी के चरणों में प्रणाम किया। जिस साधक की रक्षा भगवान स्वयं करते हों तो काम आदि विकार उस साधक का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते,परंतु नारद के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया कि मैं ने कामदेव को जीत लिया है। अपनी काम विजय की सारी कथा भगवान नारायण के पास जा कर अहंकार सहित सुनाई। भगवान ने अपने लीला से नारद के अहंकार का विनाश किया, क्योंकि भगवान अपने भक्तों का कल्याण चाहते हैं। अंहकार किसी भी क्षेत्र में व्यक्ति के लिए बाधक है, हमें अहंकार का त्याग करके नम्रता को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

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