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हिमाचल प्रदेश

आर्किमिडीज, न्यूटन और आइंस्टाइन के सिद्धांत को चुनौती

August 18, 2019 09:25 PM

धर्मशाला, (विजयेन्दर शर्मा) बरसों पहले आर्किमिडीज, न्यूटन और आइंस्टाइन जैसे महान वैज्ञानिकों ने भौतिकी में कुछ ऐतिहासिक नियमों का आविष्कार किया था। इन नियम और सिद्धांतों को हम आज तक पढ़ते आ रहे हैं। लेकिन हिमाचल प्रदेश से सम्बंध रखने वाले भारतीय वैज्ञानिक अजय शर्मा ने इसको चुनौती दी है। अजय शर्मा के मुताबिक न्यूटन का नियम वस्तु के आकार की अनदेखी करता है। यह नियम की महत्वपूर्ण खामी है।
न्यूटन के अनुसार वस्तु चाहे गोल, अर्ध गोलाकार त्रिभुज, लम्बी पाइप, शंकु, स्पाट या अनियमित आकार की हो, क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर होनी चाहिए। वस्तु का आकार पूरी तरह बेमानी है, पर प्रयोगों में प्रतिक्रिया वस्तु के आकार पर निर्भर करती है। इसकी अंतिम मान्यता के लिए कुछ प्रयोगों की आवश्यकता है। आज तक न्यूटन के नियम को बिना कुछ महत्वपूर्ण प्रयोगों के ही सही माना जा रहा है। यह अवैज्ञानिक है। अजय शर्मा के अनुसार इन नये प्रयोगों से न्यूटन का नियम बदल जाएगा।
22 अगस्त 2018 की रिपोर्ट में अमेरिकन एसोसिएशन आफॅ फिजिक्स टीजर्ज के प्रेजीडेंट प्रोफैसर गौर्डन पी रामसे ने प्रयोगों को करने की सलाह दी है। 1 अगस्त, 2018 को प्रस्तुति के दौरान एक अमेरिकी प्रोफैसर ने कहा था कि यदि इन प्रयोगों द्वारा न्यूटन की खामी को सिद्ध कर दिया जाए तो भारत नोबेल प्राइज का हकदार होगा।

प्रयोगों के लिए सुविधाओं की दरकार:
पिछले करीब 36 सालों से विज्ञान के आईंस्टाइन, न्यूटन और आर्कि मिडीज के सिद्धांतों पर शोध कर रहे उप जिला शिक्षा अधिकारी अजय शर्मा की शोध को 2018 में इंडियन साइंस कांग्रेस ने फ़िजिकल साइंसिज की प्रोसीडिग्ज में प्रकाशित किया है। यदि 10 से 12 लाख के खर्च, लैब जैसी सुविधाएं और शोध उजागर करने के लिए सरकार की मदद मिली तो वह न्यूटन के सिद्धांत को दी गई अपनी चुनौती को साबित कर दिखाएंगे। अजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय साइंस एंड टैक्नोलॉली मंत्री डा० हर्षवर्धन, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, से आग्रह किया है कि वे प्रयोगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवायें।

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