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धर्म

भागवत को तो रसिक बनकर बार बार श्रवण करना चाहिए : डॉ रमनीक कृष्ण

August 23, 2019 11:06 AM

मनीमाजरा : श्री ठाकुर द्वारा मन्दिर में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सद्भावनादूत भागवताचार्य डॉ रमनीक कृष्ण जी महाराज ने भागवत के मंगलाचरण की कथा सुनाते हुए बताया कि जगत में जो सत्य है वास्तव में वही परमात्मा है। जब जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है तब तब भगवान कोई ना कोई स्वरूप धारण करके आते हैं। वो सत्पुरुषों की रक्षा करके है दुष्टो का संहार करते है और पुनः धरती पर धर्म की स्थापना करके वास्तव में अपने सत्य स्वरूप का परिचय देते है।

भक्ति ज्ञान व वैराग्य को जीवन मे धारण कराने में श्रीमद्भगवत सक्षम सद्ग्रन्थ है। भागवत के महात्म्य में इसकी पुष्टि करते हुए महृषि वेदव्यास कहते हैं, "पिबेत भागवतम रसमालयम मुहूरहो रसिका भुवि भावुका" अर्थात इस भागवत रूपी रस को जीवन मे बार बार पीते रहो। प्रतिदिन मानव भोजन करता है प्रतिदिन जल पीता है परंतु फिर भी उसकी भूख और प्यास नही मिटती तो जब हमारी भौतिक भूख-प्यास आज तक नही मिटी तो आध्यात्मिक भूख कैसे मिट जाए।

उन्होंने आगे कहा कि हम कैसे कह सकते है कि जीवन मे हमने अनेको बार कथा सुन रखी अपितु भागवत को तो रसिक बनकर बार बार श्रवण करना चाहिए क्योंकि ये हर बार पुरानी होकर भी नई है यानी पुरातनम इति नवः। कथा के पश्चात ठाकुर द्वारा मन्दिर कमेटी की ओर से विशाल शोभा यात्रा निकाली गई जो पूरे मनीमाजरा के बाजारों से होती हुई मन्दिर परिसर में पहुंची।

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