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राष्ट्रीय

देश में सिर्फ आमजन जिम्मेवार, आमजन के प्रति किसी की जिम्मेदारी नहीं

August 24, 2019 07:41 PM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
देश में आम नागरिको की जितनी जिम्मेदारी तय की गई है एवं उनपर जुर्माना लगाने, सजा देने के प्रावधान को जिस कड़ाई से अधिकारियों द्वारा लागू किया जाता है, वैसे ही प्रावधान एवं जिम्मेवारी अधिकारियों, सरकार या प्रशासन की क्यों तय नहीं की गई है? आजकल सोशल मीडिया में इस तरह का संदेश काफी वायरल हो रहा है।
आमजन द्वारा कहा जा रहा है कि जहां एक तरफ —
बिना हेलमेट-जुर्माना 200 रूपये,
नो पार्किंग में पार्किंग-जुर्माना 300 रूपये
नो एंट्री में वाहन-जुर्माना 500 रूपये,
प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं-जुर्माना 1200 रूपये
दोपहिया वाहन पर ट्रिपल राईडिंग-जुर्माना 2000 रूपये,
प्लास्टिक उपयोग - जुर्माना 5000
तो दूसरी तरफ आमजन यानि जनता के टैक्स से ही पल रहे जिम्मेदारों को किसी प्रकार का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा— यानि कि
खराब सिग्नल लाइट - कोई जिम्मेदार नहीं,
सड़क पर बड़े बड़े गड्ढे - कोई जिम्मेदार नहीं
फुटपाथ पर अतिक्रमण - कोई जिम्मेदार नहीं
सड़क एवं गलियों में रौशनी नहीं - कोई जिम्मेदार नहीं
सड़क पर गटर का बदबूदार पानी - कोई जिम्मेदार नहीं
सड़क खुदाई करके खड्डे नहीं भरे - कोई जिम्मेदार नहीं
ट्रैफिक सिग्नल के कैमरे खराब - कोई जिम्मेदार नहीं
और तो और 2017 में मध्यप्रदेश में वकीलों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाया गया एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आप अपने वकीलों से बदतमीजी से पेश नहीं आ सकते और धमकी देने पर आपको 10000 रूपये का जुर्माना या सात साल की कैद या दोनों हो सकती है। चाहे आपके वकील आपसे मोटी फीस लेकर आपकी तरफ से न्यायालय में उपस्थित न भी होता हो, तो भी आपको उनसे विनती भरे लहजे में ही बात करनी होगी। कोई दिक्कत नहीं है अगर वकील अपनी फीस पर सरकार को सर्विस टैक्स न भी भरता हो और पूरी फीस कैश में लेता हो, लेकिन आमजन अगर 5 रूपये की तक चोरी में भी नामजद हो गया तो फिर जिंदगी पर भागते रहो। कमाल की बात है ना, वकीलों को फीस देकर उनसे मिलनी वाली उपरोक्त खराब सेवा को आप उपभोक्ता अधिनियम के तहत चैलेन्ज भी नहीं कर सकते, आपको ये हक़ नहीं दिया गया है।   


ऐसी बात नहीं है कि अधिकारियों की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, जिम्मेदारी है लेकिन एक अधिकारी की जिम्मेदारी को देखने वाले दूसरे अधिकारी ही होते है, जब आप एक अधिकारी की शिकायत दूसरे अधिकारी से करेंगे वो उतने एक्टिव नहीं होंगे जितने वो आमजन के खिलाफ शिकायत पर एक्टिव होते है। लेकिन आमजन के खिलाफ किसी शिकायत पर ये सभी अधिकारी इकट्ठे हो जाते है।
एक पाठक ने सोशल मीडिया के उपरोक्त मैसेज पर अपनी टिपण्णी देते हुए लिखा कि सरकार ने कानून के नाम पर एक अपरोक्ष कोल्हू तैयार कर लिया है जो शायद नए भारत में भी सिर्फ आमजन को ही पीसना जानता है, अधिकारियों के जिम्मेवारी की बात आने पर जड़वत हो जाता है।

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