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पंजाब

पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे किसके सरंक्षण में चल रहे अवैध आटो?

August 25, 2019 09:13 PM

ज़ीरकपुर, जेएस कलेर

शहर में आटो लॉबी इतनी मज़बूत हो गई है कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे नाजायज आटो धडल्ले से चल रहे हैं; पिछले लंबे समय से बेलगाम आटो चालक अपना साम्राज्य चला रहे हैं और मनमर्ज़ी से ट्रैफ़िक नियमों की धज्जियाँ उड़ा कर शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं।                                                                                                  आटो लॉबी के हावी होने का संकेत इस बात से मिल जाता है कि पुलिस प्रशासन सब कुछ देखते हुए भी नजरअन्दाज कर हर तरह का कानून तोड़ने की इजाज़त दे रही है। इन आटो वालों के आगे पुलिस प्रशासन ने घुटने ही टेक दिए प्रतीत होते हैं और बेलगाम आटो चालक नियमों और कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए सड़कों पर दनदना रहे हैं। शहर में दौड़ते बेलगाम आटो रिक्शा जहाँ ट्रैफ़िक व्यवस्था के लिए ख़तरा हैं वहीँ ट्रैफ़िक में खलल डाल आम लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहे हैं।                                                                                                                                      बेलगाम दौड़ते आटो रिक्शा चालक अपनी मनमर्ज़ी से आटो को बीच सड़क में रोक कर सवारियों उतारते और चढाते हैं और जहाँ दिल करता है वहाँ ही बिना किसी इशारो के मोड़ देते हैं जिसके साथ पीछे आ रहे वाहन चालक हादसो का शिकार हो जाते हैं। शहर के पटियाला चौंक और पंचकुला लाईटों के अलावा सुखना नदी के पुल के नजदीक आटो रिक्शा चालक सड़क को पूरी तरह घेर कर रखते हैं जिस के साथ दूसरे वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है और शहर की ट्रैफ़िक व्यवस्था बिगड़ जाती है। इन आटो चालकों को रोकनो में ट्रैफ़िक पुलिस के साथ साथ ज़िला प्रशासन भी पूरी तरह नाकाम नज़र आता है। हालाँकि ज़िला प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि शहर में सिर्फ़ वह ही आटो रिक्शा चलेंगे जिनके दस्तावेज़ पूरे होंगे। जुगाड़ू और अपनी वेलिडिटी पूरा कर चुके आटो रिक्शा को चलने नहीं दिया जायेगा। इस के बावजूद आटो रिक्शा वाले शहर में बेलगाम घूम रहे हैं जिन पर स्थानिक ट्रैफ़िक पुलिस की ओर से केवल वीआईपी रूट लगे होने के चलते ही सख्ती करती है। शहर में चल रहे आटो रिक्शा की सही जानकारी ज़िला परिवहन विभाग (डीटीओ दफ़्तर) को भी नहीं है।            कई आटो तो ऐसे भी हैं जिनका का संबंध किसी भी आटो रिक्शा यूनियन के साथ नहीं है और कई लोग आटो रिक्शा चलाने की आड़ में मुसाफिरों के साथ लूट-पाट भी करते हैं। ऐसे आटो चालक जब किसी मुसाफिर को अपना निशाना बनाते हैं और कुछ समय बाद पुलिस उन्हें काबू करती है तो हैडलाइन बनने पर ज़िला पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद हो जाता है। यदि पहले से ही पुलिस और ज़िला प्रशासन सख्ती कर इन आटो चालकों के दस्तावेज़ चैक करते हुए केवल सही आटो चालकों को सड़क पर आटो चलाने की इजाज़त दे तो ट्रैफ़िक की समस्या से तो बचा ही जा सकता है बल्कि आपराधिक घटनाएँ से भी निजात मिल सकती है-

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