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हरियाणा

श्री युवक साहित्य सदन में विमोचन, कवि-गोष्ठी का आयोजन

September 02, 2019 07:39 PM

सिरसा, सतीश बंसल:
हरियाणा प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन, सिरसा द्वारा श्री युवक साहित्य सदन, सिरसा में विमोचन, कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में विक्रमजीत सिंह, एडवोकेट ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर से पधारी चाँद वर्मा ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मेजर शक्तिराज कौशिक उपस्थित थे। समारोह में डॉ० शील कौशिक ने ‘भारतीय जनमानस और हिन्दी’ विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। विमोचन समारोह में ‘जो मैं न कह सका’ (कवि : रूप देवगुण), ‘साथी हैं संवाद मेरे’ (कवि : ज्ञानप्रकाश ‘पीयूष’), दोहों के दीप (दोहाकार : लखविन्द्र सिंह बाजवा), ‘मिलो जब भी हमसे’ (गज़लकार : डॉ० मेजर शक्तिराज), ‘रूप देवगुण की काव्य साधना (समीक्षक : कृष्णलता यादव)’ पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनकी समीक्षा क्रमश: डॉ० आरती बांसल, डॉ० शील कौशिक, डॉ० राजकुमार निजात, दिलबाग सिंह विर्क तथा प्रिं. ज्ञानप्रकाश ‘पीयूष’ ने की। इसके पश्चात् प्रो० रूप देवगुण ने लघुकविताएं, प्रिं. ज्ञानप्रकाश ‘पीयूष’ ने लघु-कविताएं, लखविन्द्र सिंह बाजवा ने दोहे तथा डॉ० मेजर शक्तिराज ने $ग$जल प्रस्तुत की। रविन्द्र ‘प्रीतम’ तथा प्रदीप रहेजा ने $ग$जल तथा गीतों द्वारा श्रोताओं को भाव-विभोर किया। मंच संचालन हरीश सेठी ‘झिलमिल’ ने किया।
कार्यक्रम में प्रो० रूप देवगुण ने अपनी 50 पुस्तकें आने के उपलक्ष्य में उपस्थित सभी श्रोतागण को एक-एक पुस्तक भेंट की। कवि-गोष्ठी में प्रिं० ज्ञानप्रकाश ‘पीयूष’ की ये पंक्तियां द्रष्टव्य हैं - माँ क्या भगवान से भी बड़ी है / लगता है हर संकट में वह पास में खड़ी है। डॉ० राजकुमार निजात की हिन्दी पर लिखी दो पंक्तियां देखिए - हिन्दी मेरे देश की भाषा सर्वप्रधान / मेरे हिन्द महान की हिन्दी है पहचान। डॉ० आरती बांसल की कविता की पंक्तियों की बानगी देखिए - $िजन्दगी हमें आकार देती है / $िजन्दगी हमें संस्कार देती है। प्रो० रूप देवगुण की कविता अवलोकनीय है - कितने साफ-सुथरे होते हैं कबूतर / मन करता है पकड़ लें इन्हें व बिठा लें अपने पास / करें प्यार / व जब ये देखें हमारी तरफ / तो हम सि$र्फ मुस्करा दें। डॉ० शील कौशिक ने हिन्दी के पक्ष में लिखा है - अंग्रेजी संवाद / अरे बाबा न बाबा / गए बहत्तर साल / हुआ न ऊंचा भाल / आई ना मेरी याद / अरे बाबा, हाँ बाबा। इनके अलावा डॉ० जी.डी. चौधरी, प्रिं. हरभगवान चावला, वीरेन्द्र भाटिया, हीरा सिंह, महेन्द्र सिंह नागी, बलवीर ङ्क्षसंह वर्मा, राकेश कुमार, जैन बन्धु, कर्ण दुग्गल, सेवा सिंह, जनकराज शर्मा, उर्मिल शर्मा, सुभाष मेहता, विजय कुमार मोहिल व महेन्द्र सिंह ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

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