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राष्ट्रीय

गुरद्वारा बंगला साहिब में प्लास्टिक सामाग्री का नहीं होगा उपयोग

October 08, 2019 08:13 PM

नई दिल्ली, फेस2न्यूज:
दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबन्धक समिति ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के 550 बे जन्मदिवस के उपलक्ष्य में राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े सिख धार्मिक स्थल गुरद्वारा बंगला साहिब में सभी प्रकार की प्लास्टिक समाग्री को बैन करके तथा हेरिटेज परिसर में विभिन्न पर्यावरण उपयोगी क़दमों से गुरद्वारा परिसर को राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा ग्रीन परिसर तथा सबसे स्वास्थ्यबर्धक स्थल के रूप में विकसित करने का फैसला किया है।

सन 1783 में निर्मित इस पवित्र स्थल पर सामान्य दिनों में प्रीतिदिन पचहत्तर हज़ार तथा छुट्टी, त्याहारों के दिनों में डेढ़ लाख श्रद्धालु नसिक शान्ति, सान्त्वना तथा आध्यात्मिक शान्ति प्राप्त करने के लिए नतमस्तक होते हैं जबकि यहाँ प्रतिदिन लगभग पेंतीस हज़ार लोग लंगर ग्रहण करते हैं। छुट्टी व त्याहारों के दिन संख्या दौगुनी हो जाती है।


गुरद्वारा प्रबन्धक समिति के प्रधान श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि राजधानी दिल्ली के केन्द्र कनॉट प्लेस में स्थित प्रतिष्ठित सिख गुरद्वारा परिसर में डिस्पोजेबल प्लेट, ग्लास, चमचों, थर्मोकोल कप, प्लेटों आदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सामान पर दो अक्टूबर से पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया गया है तथा अब श्रद्धालुओं को लंगर का खाना स्टील की प्लेटों तथा पीने का पानी स्टील के प्यालों में परोसा जा रहा है ताकि परिसर को प्लास्टिक कचरे से पूरी तरह मुक्त रखा जा सके। श्रद्धालुओं को प्रसाद बाँटने के लिए अब जूट बैग/डोना पत्तल कटोरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
परिसर में फूलों /लंगर की बची सामग्री, मालाओं, सूखी पत्तियों आदि के निपटारे के लिए दो टन प्रति दिन क्षमता का रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित किया गया है जो बची सामग्री को आर्गेनिक खाद/वर्मीकम्पोस्ट में रूपान्तरित करेगा। इस प्लांट को अभी प्रयौगिक तौर पर चलाया जा रहा है।
सन 1783 में निर्मित इस पवित्र स्थल पर सामान्य दिनों में प्रीतिदिन पचहत्तर हज़ार तथा छुट्टी, त्याहारों के दिनों में डेढ़ लाख श्रद्धालु नसिक शान्ति, सान्त्वना तथा आध्यात्मिक शान्ति प्राप्त करने के लिए नतमस्तक होते हैं जबकि यहाँ प्रतिदिन लगभग पेंतीस हज़ार लोग लंगर ग्रहण करते हैं। छुट्टी व त्याहारों के दिन संख्या दौगुनी हो जाती है।
गुरद्वारा प्रबन्धक समिति ने परिसर में पानी संरक्षण के लिए अनेक उपाय शुरू किये हैं जिनके अन्तर्गत जल संरक्षण उपकरण स्थापित करके पानी की फिजूल खर्ची को रोकने के लिए वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित किया है।

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