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राष्ट्रीय

जल संरक्षण पर कार्य करने की जरूरत

October 13, 2019 09:25 PM

ऋषिकेश, (ॐ रतूड़ी) भारतीय आबादी की अभी सुरक्षित पेयजल तक पहुंच नहीं है। वर्ष 2025 में भारत की अनुमानित प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1,341 घन मीटर होगी। वहीं यह आंकड़ा वर्ष 2050 में 1,140 क्यूबिक मीटर तक नीचे जा सकता है, जिससे जल दुर्लभ हो जायेगा।
यह कहना है परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती का। रविवार को उन्होने कहा कि स्वच्छ जल की आपूर्ति हेेतु हमें ऐसी तकनीक इजाद करनी होगी जिसमें 99 प्रतिशत शुद्ध जल प्राप्त हो और केवल एक या दो प्रतिशत अशुद्ध जल बाहर निकले जिसका उपयोग उन्य कार्यो के लिये किया जा सकता है। इससे शुद्ध जल भी प्राप्त होगा और जल का अपव्यय भी बचेगा। हमें जन संरक्षण की तरह जल संरक्षण पर कार्य करने की जरूरत है।
अमेरिका से आये संस्थापक केसन इंद्र शर्मा, पीटर हेलवेल, टोनी एरिकसन ने परमार्थ निकेतन में जल को शुद्ध करने वाली मशीन केसन वाॅटर प्यूरिफायर का प्रदर्शन किया।
स्वामी ने सुझाव दिया कि केसन वाॅटर प्यूरिफायर का फिल्टर भले अमरीका या अन्य कहीं बना हो परन्तु बाकी के भागों का निर्माण भारत में किया जाये तो बेहतर होगा तथा इसे भारत के हर घर, स्कूल और कार्यालयों में पहुंचाया जाये का प्रयास किया जाये ताकि सभी की पहुंच स्वच्छ जल तक हो सके।
केसन का उद्देश्य भारत में व्यप्त स्वच्छ जल की समस्याओं का कुछ हद तक समाधान करना है। भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्राकृतिक स्रोतों यथा तालाब, कुआँ, झरने व नदियों से प्राप्त जल का उपयोग करते है। इन स्रोतों से प्राप्त जल से डायरिया, टायफाइड, पोलियो जैसे अनेक रोगों के होने की सम्भावना बनी रहती है। केसन जल फिल्टर द्वारा मात्र 22 पैसे प्रति लीटर की दर से शुद्व जल प्राप्त किया जा सकता है।
केसन संस्था के संस्थापक इन्द्र शर्मा जो कि एनआरआई है और विगत 37 वर्षो से अमरीका में निवास कर रहे है। वे समाजसेवी और पर्यावरणविद् है। उनकी टीम के द्वारा बनायी गयी केसन जल फिल्टर पूर्णरूप से गुरूत्वीय प्रवाह विधि पर आधारित है। इसके संचालन हेतु किसी भी प्रकार के विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता नहीं होती। इस प्यूरिफायर की 3 लीटर प्रतिधन्टा उत्पादन क्षमता है।

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