ENGLISH HINDI Wednesday, November 20, 2019
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
पुलिस फोर्स तथा मोबाइल फौरेसिंग युनिट को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा: अनिल विज पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी की 102वी जयन्ती पर श्रद्धासुमन अर्पितदादागिरी पर उतरे ओकेशन मैरिज पैलेस के संचालक,पुलिसकर्मियों व शिकायतकर्ता से मारपीट, 35 पर कटा पर्चाअवैध माइनिंग: गुंडा टैक्स को लेकर प्रशासन हरकत में, माइनिंग में लगी मशीनरी की जब्तप्रधानमंत्री को हिमाचली टोपी पहनाना दस लाख रुपये में पड़ा : कुलदीप राठौरप्रिंस बंदुला के प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की शुरुआत, संजय टंडन ने किया उद्घाटनपंडित यशोदा नंदन ज्योतिष अनुसंधान केंद्र एवं चेरिटेबल ट्रस्ट (कोटकपूरा ) ने वार्षिक माता का लंगर लगायाछतबीड़ जू में व्हाइट टाइगर 'दिया' ने दिया 4 शावकों को जन्म
राष्ट्रीय

चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मचारियों का ट्रॉमा केयर में दक्ष होना नितांत आवश्यक

October 15, 2019 09:17 PM

ऋषिकेश, रातुड़ी: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में डिपार्टमेंट ऑफ ट्रॉमा सर्जरी की ओर ट्रॉमा केयर विषय पर आयोजित पांचवीं एटीएलएस व चौथी एटीसीएन नेशनल वर्कशॉप में विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागी चिकित्सकों को दुर्घटना में बुजुर्ग व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं व आग से झुलसे मरीजों के उपचार संबंधी जानकारियां दी। ऐसे मौके पर इलाज में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों से प्रतिभागियों को विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने दुर्घटना में दुपहिया वाहन सवारों के गंभीर चोटिल होने व सिर की चोट से होने वाली मौतों के ग्राफ को कम करने के लिए हेलमेट के उपयोग को नितांत जरुरी बताया।
कार्यशाला में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक आपदाओं, वाहनों में तकनीकि खराबी व मानवीय लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाएं आम बात है। ऐसी स्थिति में राज्य में कार्यरत चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मचारियों का ट्रॉमा केयर में दक्ष होना नितांत आवश्यक है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसी के मद्देनजर दिल्ली एम्स के बाद ऋषिकेश एम्स में भी एटीएलएस व एटीसीएन प्रशिक्षण कोर्स को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोट,स्पाइन इंजरी, प्रेगनेंसी ट्रॉमा आदि विषयों के कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। निदेशक ने बताया कि आपदाओं व बड़ी दुर्घटनाओं की स्थिति से निपटने के लिए ऋषिकेश एम्स चिकित्सकीय तौर पर पूरी तरह से तैयार व बचनबद्ध है। कार्यशाला में दक्षिण भारत के कोजीकोड केरला के एस्टर अस्पताल से आए डा.राधीश नम्भियार ने दुर्घटना में घायल गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करते वक्त रखी जाने वाली आवश्यक सावधानियों और मरीज को भेजने व रिसीव करने वाले चिकित्सक की जिम्मेदारी, उनके मध्य पारस्परिक संवाद स्थापित करने पर जोर दिया, जिससे मरीज के उपचार में होने वाली किसी भी प्रकार की चूक से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में सिर पर लगने वाली गंभीर चोटों की वजह से ज्यादातर होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। डा. नाम्भियार ने बताया कि देश में अधिकांश दुर्घटनाओं में बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चलाने वाले सवार सिर की गंभीर चोट से ग्रस्त हो जाते हैं। कई दफा ऐसे मरीज ठीक तो हो जाते हैं, मगर अधिकांश हैड इंजरी के शिकार रोगी के उपचार से पड़ने वाले आर्थिक बोझ से परिवार, सोसाइटी पर भारी पड़ने लगते हैं। ऐसे मरीजों की देखरेख में परिवार के एक से अधिक सदस्यों को जुटना पड़ता है। लिहाजा कुछ सावधानियों व नियमों का पालन करने से ऐसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और राष्ट्रीय ख़बरें
सड़क दुर्घटना में पौड़ी गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत समेत तीन घायल सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ साधु संतों ने की बैठक अमेज़न फ्लिपकार्ट के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के लिए 10 नवम्बर को दिल्ली में व्यापारियों की राष्ट्रीय बैठक आरसीईपी को अपनाने के केंद्र के निर्णय का सीआईआई ने किया समर्थन इस्‍पात मंत्री ने निवेशकों को भारत के विकास क्रम में भागीदार बनने का न्‍यौता दिया नराकास पंचकूला द्वारा स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता आयोजित ईपीएफओ पेंशन न्यूनतम 7500 रूपये करने की मांग तेज झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के कार्यक्रम की घोषणा वॉट्सऐप में जल्द शुरू होगा पेमेंट की खास सर्विस: सीईओ ज़करबर्ग राष्ट्रपति करेंगे 2 से 4 नवम्बर तक सिक्किम और मेघालय का दौरा