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पंजाब

302 टी.बी. मरीज़ों के मामले सामने आए

October 17, 2019 04:52 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
टी.बी. रोग के ख़ात्मे का एकमात्र हल है कि इसकी जल्द शिनाख्त करके मरीज़ को इलाज मुहैया करवाया जाये। राज्यभर में टी.बी. की टेस्टिंग प्रक्रिया को तेज़ी प्रदान करने के लिए, स्वास्थ्य विभाग द्वारा ज़्यादा वर्कलोड वाले जि़ला अस्पतालों और सरकारी मैडीकल कॉलेजों में 29 सी.बी. -एन.ए.ए.टी. (नाटक) मशीनें लगाई गई हैं। इस अत्याधुनिक मशीन में केवल 2 घंटे के समय के अंदर ही टी.बी. का पता लगाने का सामथ्र्य है और यह एंटी टी.बी. ड्रग प्रतिरोधक होने का पता भी लगाती है। उक्त प्रगटावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने जारी एक प्रेस बयान में किया।   

राज्य सरकार द्वारा टी.बी. के मरीज़ों के मुफ़्त एक्स-रे, थूक की जांच और इलाज की सहूलत


जानकारी देते हुये सिद्धू ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 2025 तक पंजाब को टी.बी. मुक्त करने का लक्ष्य निश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए टी.बी. से प्रभावित अनजान मरीजों का पता लगाने के लिए एक नयी प्रणाली विकसित करने की ज़रूरत है जिससे मरीजों को मूलभूत पड़ाव पर मानक इलाज मुहैया करवाया जा सके। उन्होंने बताया कि सी.बी. -एन.ए.ए.टी. (नाट) मशीनें टी.बी. के मरीजों के इलाज के लिए काफ़ी सहायक सिद्ध हो रही हैं और साल 2019 के दौरान सफल इलाज के लिए इन मशीनों के साथ 22,272 संदिग्ध मरीजों का टैस्ट किया गया।
सिद्धू ने आगे कहा कि पंजाब में टी.बी. मरीजों की 89 प्रतिशत उच्चतम इलाज दर होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा इस रोग के ख़ात्मे के लिए कई उपराले किये गए हैं और इन उपरालों में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में टी.बी. के संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए ‘एक्टिव केस फाईंडिंग कैंपेन’ चलाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस रोग के फैलाव को रोकने के लिए सितम्बर 2019 में ‘एक्टिव केस फाईंडिंग कैंपेन’ चलाई गई जिसके अंतर्गत 27,55,189 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई और जिनमें से 302 मरीज़ टी.बी. रोग से पीडि़त पाये गए। इस कैंपेन के अंतर्गत स्वास्थ्य कर्मचारी टी.बी. के संदिग्ध मामलों का पता लगाने के लिए शहरों और गाँवों के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गए। उन्होंने कहा कि टी.बी. के लक्षणों का पता लगाने के बाद मरीज़ों को छाती के एक्स-रे, थूक की जांच और इलाज सम्बन्धी मुफ़्त जांच के लिए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में भेजा गया।
मंत्री ने कहा कि टी.बी. एक छूत की बीमारी है और यह बुज़ुर्गों, कुपोषित बच्चों और नौजवानों में आसानी से फैलती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह देखने में आया है कि बहुत से मामलों में तंदुरुस्त व्यक्ति भी टी.बी. रोग से जूझ रहे हैं जिन्होंने पता होते हुए भी लंबे समय से हुई खाँसी का इलाज नहीं करवाया और अंत में वह भी टी.बी. रोग की गंभीर अवस्था से पीडि़त पाये गए। उन्होंने कहा कि सावधानी और प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार हमारे शरीर को कुदरती तौर पर ताकतवर बनाते हैं और हमारे शरीर को छूत की बीमारियों का मुकाबला करने के समर्थ बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि डी.ओ.टी. सैंटरों में अज्ञात टी.बी. मरीजों का पता लगाना और इलाज करना एक कारगर विधि है और इसके प्रयोग से निश्चित तौर पर राज्य को टी.बी. मुक्त और आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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