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पंजाब

स्टाफ की कमी से कौंसिल प्रशासन कर रहा है बिलडिंग बाईलाज़ की अनदेखी

October 18, 2019 09:07 PM

जीरकपुर, जे एस कलेर:
कारपोरेशन एक्ट 1976 में बिलडिंग बाईलाज़ में प्रोवीजन है समय समय पर उसमें संशोधन करके आम लोगों की ज़रूरतों का ख़ास ध्यान रखा जाये। वर्ष 2010 में बिलडिंग बाईलाज़ में हुए संशोधन के बाद किसी निर्माण की जांच पाँच स्तर पर करने पर निर्माण पूरी होने के बाद नगर कौंसिल से ऑक्यूपेंसी और कम्पलीशन प्रमाण पत्र लेना ज़रूरी बनाया गया है।

इसके बावजूद न तो ज़ीरकपुर नगर कौंसिल कम्पलीशन प्रमाण पत्र जारी करता है और न ही कोई पाँच स्तर की जांच होती है। जबकि शहर बिलडिंग बाइलॉज 2010 में आम जनता की ज़रूरत को ध्यान में रखते ख़ास कर ट्रैफ़िक समस्या को देखते हुए प्लाट के अनुसार छता हुआ इलाका, पार्किंग के लिए जगह छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं परन्तु नगर कौंसिल ज़ीरकपुर की तरफ से खानीपूरती वाली जांच ही की जा रही है। पाँच स्तर की जांच में पहली चैकिंग खुदाई समय, दूसरी नींव भरने समय, तीसरी ग्राउंड स्तर पर, चौथी पहली मंजिल पर पाँचवी अन्य मंजिलों की जांच के बाद सब कुछ ठीक-ठाक होने की स्थिति में छटा कम्पलीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।

बिलडिंग विभाग नक्शा के पास करने के बाद निर्माण के समय प्लाट के आकार अनुसार छता एरिया और पार्किंग के लिए छोड़ी जाने वाली जगह की भी जांच ठीक के साथ नहीं होती है। बाईलाज़ 2010 के शड्यूल -8 अनुसार निर्माण के दौरान बिलडिंग इंस्पेक्टर की ड्यूटी यह देखना है कि निर्माण नक्शो के अनुसार हो रहा है या नहीं। जांच खुदाई से लेकर आखिरी मंजिल तक करके निर्माणकर्ता को प्रमाण पत्र जारी करना ज़रूरी किया गया है परन्तु ज़ीरकपुर नगर कौंसिल कोई प्रमाण पत्र भी जारी नहीं करता। यही कारण है कि शहर में बड़े स्तर पर नाजायज निर्माण हो रहे हैं। यही वजह है कि विजीलैंस को बार बार कौंसिल में छापे मारने पड़ रहे हैं।

मौजूदा समय में शहर में करीब 80 अवैध निर्माण हैं। ज़ीरकपुर शहर इतना बड़ा होने के बावजूद यहाँ प्रमाण पत्र जारी करने की प्रीक्र्या शुरू नहीं हो सकी है हालाँकि कम्पलीशन सर्टिफिकेट और आकूपेशन सर्टिफिकेट लेना भी ज़रूरी है। रिहायशी निर्माण में तो प्रमाण जारी ही नहीं होता है। शहर में लोगों के काम किस तरह के साथ होंगे या फिर अवैध निर्माण पर किस तरह के साथ रोक लगेगी, इससे ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि 5 बिलडिंग इंस्पेक्टरों की बदले सिर्फ़ 1 इंस्पेक्टर ही काम कर रहा है जिसको इमारतों के मामलों में अदालतों में भी जाना पड़ता है। ब्रांच में अवैध निर्माणों की करीब सैंकडो शिकायतें हैं जिन पर स्टाफ न होने कारण कार्यवाही नहीं हो रही है।

बिलडिंग ब्रांच में नया स्टाफ लगाने के लिए स्थानीय नगर कौंसिल के अफ़सर कई बार नगर निकाय विभाग के डायरैक्टर के पास कई बार मसला उठा चुके हैं परन्तु दफ़्तर की तरफ से भी नया स्टाफ अजय तक उपलब्ध नहीं करवाया गया है। स्टाफ की कमी ही कारण है कि शहर में कई जगह नाजायज बनायीं जारी हैं। लोहगढ़ रोड, नगला रोड, गाजीपुर रोड, सनोली, पभात, वीआईपी रोड, सिंघपुरा, रामगढ़ भूड़ा में 3 मंजिला फ़लैट बन गए परन्तु बिलडिंग ब्रांच का और नगर कौंसिल के अधिकारी सिर्फ़ नोटिस देने तक सीमित रहा है जबकि मामूली कमरे का लैंटर डालने पर भी बिलडिंग इंस्पेक्टर उसे तोड़ फोड़ के लिए चले जाते हैं।

मुझे जॉइन किए थोड़ा ही समय हुआ है जब कोई अवैध निर्माण या बिल्डिंग बाइलॉज का उलंघन होने की खबर मिलती है तो तुरत उपलब्ध स्टाफ को मौके पर भेज काम बंद करवा समान उठवा लिया जाता है। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए नगर निकाय विभाग को लिखा जय है जल्द ही स्टाफ मिलने की उम्मीद है।
सुखजिंदर सिंह सिधु, कार्यकारी अधिकारी नगर कौंसिल, जीरकपुर

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