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राष्ट्रीय

आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह पर प्राथमिकी, हाईकोर्ट ने डीजीपी हरियाणा एवं अन्य को भेजा नोटिस

October 29, 2019 05:40 PM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह महेंद्र चावला पर FIR मामले में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक, मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल एवं डीएसपी करनाल सहित 7 लोगो को चंडीगढ़ हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर 3 दिसंबर तक जवाब माँगा है।
महेंद्र चावला के वकील संजय गहलावत ने बताया कि जून 2018 में गुजरात में आसाराम के विरुद्ध होने वाली महेंद्र चावला की गवाही को रोकने व महेंद्र चावला पर दबाव बनाने के उद्देश्य से गवाही के ठीक 15-20 दिन पहले यानी मई 2018 में गांव सनोली खुर्द पानीपत की सरपंच प्रियंका शर्मा ने आसाराम के गुर्गों के इशारे पर एक षड़यँत्र तहत महेंद्र चावला के विरुद्ध करनाल थाना सिविल लाइन्स में धारा 294, 506, 509 के अंतर्गत एक झूठा केस दर्ज करवा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार महेंद्र चावला 24 घण्टे हरियाणा पुलिस की सुरक्षा में होने कारण दिनांक 11 जुलाई 2018 को ASI जितेंद्र करनाल सेक्टर 13 चौंकी इंचार्ज ने चावला के तीनों सुरक्षा कर्मियों के बयान दर्ज किए और इन्ही बयानों के आधार पर यह FIR रद्द होनी चाहिए थी लेकिन ASI जितेंद्र ने आसाराम के गुर्गों व प्रियंका शर्मा से मिलीभगत करते हुए तीनों सुरक्षा कर्मियों के बयानों की कॉपी जानबूझकर गायब कर दी।
जब महेंद्र चावला ने सूचना अधिकार के तहत तीनों के बयानों की कॉपी मांगी तो धारा 8(1)h का हवाला देकर सूचना अधिकारी डीएसपी करनाल ने कॉपी देने से मना कर दिया। प्रथम अपील के बाद महेंद्र चावला ने सेकंड अपील दर्ज करवाई तो मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल ने सुरक्षा कर्मियों के बयानों की प्रतियां महेंद्र चावला को उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए। लेकिन इसके बाद करनाल DSP मुख्यालय वीरेंद्र कुमार ने भी ASI जितेंद्र का पक्ष लिया व तीनो सुरक्षा कर्मियों के बयानों की कॉपी देने की बजाय स्पीकिंग आर्डर में कहा कि तीनों के बयान दर्ज नहीं किए गए थे। जबकि तीनों सुरक्षाकर्मी ने दिनांक 14 नवम्बर 2018 को DSP मुख्यालय वीरेंद्र सैनी के सामने भी बयान दर्ज करवाये थे जिसमें ASI जितेंद्र के सामने बयान दर्ज करवाने की बात कही गयी थी।
ASI जितेंद्र द्वारा तीनों सुरक्षा कर्मियों के बयानों की कॉपी चोरी किये जाने के बाद तथा मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश बाद भी न तो तीनों सुरक्षा कर्मियों के बयानों की कॉपी दी गयी और न ही दोषियों के विरुद्ध कोई कारवाई की गई।
एडवोकेट संजय गहलावत ने आगे बताया कि बार—बार रिमाइंडर देने के बाद भी जब महेंद्र चावला को कोई राहत नहीं मिली तो चावला ने हाई कोर्ट की शरण ली जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार की कोर्ट ने यशपाल सिंघल मुख्य सूचना आयुक्त, SP करनाल, ASI जितेंद्र सहित कुल सात लोगों को नोटिस जारी कर 3 दिसम्बर तक जवाब मांगा है।
महेंद्र चावला ने बताया कि प्रियंका शर्मा परिवार के राजनीतिक रसूख के कारण व आसाराम के गुंडों के दबाव के चलते मुझे बार—बार परेशान किया जा रहा है और मेरी जान को लगातार खतरा बना हुआ है। प्रियंका शर्मा परिवार के लोग कभी भी आसाराम के गुंडों के इशारे पर कभी भी मेरे ऊपर जानलेवा हमला करवा सकते हैं।

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