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पंजाब

पंजाब स्टेट लैजिसलेचर एक्ट 1952 में संशोधन को मंजूरी

November 01, 2019 08:09 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब मंत्रीमंडल ने पंजाब स्टेट लैजिसलेचर (प्रीवेन्शन ऑफ डिस्कुआलीफिकेशन) एक्ट 1952 में संशोधन करने का फ़ैसला किया है जिससे मुख्यमंत्री के योजना और राजनैतिक मसलों के सलाहकारों को लाभ के पद से अयोग्य ठहराए जाने से बाहर रखा जा सकेगा।
एक्ट की धारा 2 में संशोधन का बिल पंजाब विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जायेगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस संशोधन से पंजाब विधानसभा के मैंबर की इस कैटागरी में नियुक्ति होने पर उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकेगा।
यहाँ यह बताने योग्य है कि राज्य विधानसभा के मैंबर होने के नाते कुछ लाभ वाले पदों के धारकों को अयोग्य न ठहराने के लिए पंजाब स्टेट लैजिसलेचर (प्रीवेन्शन ऑफ डिस्कुआलीफिकेशन) एक्ट 1952 को संविधान की धारा 191 के अधीन बनाया गया था। इस एक्ट में समय -समय पर छोटे संशोधन किए गए, परन्तु ऐसे संशोधन करते समय आज के समय की प्रशासनिक उलझनों को ध्यान में नहीं रखा गया। इसके अलावा एक्ट में संशोधन करते हुए विभिन्न संसदीय कमेटियों के लाभ वाले पदों को संबंधित रिपोर्टों और अध्ययनों को नहीं विचारा गया। इस कारण मंत्रीमंडल ने महसूस किया कि पंजाब स्टेट लैजिसलेचर (प्रीवेन्शन ऑफ डिस्कुआलीफिकेशन) एक्ट 1952 के सैक्शन 2 में संशोधन करने की ज़रूरत है।
एक अन्य फ़ैसले में, मंत्रीमंडल ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग (संशोधन) ऑर्डीनैंस 2019 को विधानसभा के आगामी सत्र में लाने की मंजूरी दे दी है। इस कानून के साथ आयोग के चेयरपर्सन की नियुक्ति के लिए उम्र सीमा मौजूदा 70 साल से 72 साल हो जायेगी। इसी तरह पंजाब राज्य के अनुसूचित जाति के वर्गों के लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानून को असरदार तरीके से लागू करवाने के लिए अधिक तजुर्बेकार चेयरपर्सन को लाने में मदद मिलेगी।
इसी दौरान मंत्रीमंडल ने पंजाब रैगूलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडिड ऐजुकेशनल इंस्टीट्यूशनज़ एक्ट, 2016 को बिल के रूप में पंजाब विधानसभा में पेश किया जायेगा जिससे राज्य में ग़ैर -सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में फीस को रैगूलेट करने के लिए विधि मुहैया होगी।
यह संशोधन ग़ैर -सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में वह अभागे बच्चे जिनके परिवार के कमाऊ मैंबर की मौत के कारण फ़ीसों की अदायगी नहीं की जा सकती, इन शैक्षिक संस्थाओं में अपनी पढ़ाई पूरी होने तक बिना फीस दिए पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। शिकायतकर्ताओं को पेश आने वाली दिक्कतों को दूर करने और शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए उपरोक्त एक्ट अधीन रेगुलेटरी अथॉरिटी को डिवीजनल स्तर की बजाय जि़ला स्तर पर फिर गठित करने का प्रस्ताव है। इसी तरह ग़ैर -सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थाओं में चल रही वर्दियों /किताबों सम्बन्धी खऱीद- फऱोख्त की मन -मर्जी को रोकने के लिए भी इस एक्ट में अपेक्षित संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया है।

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