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हरियाणा

पराली प्रबंधन में सहयोग करें गौशालाएं: डीसी

November 05, 2019 07:56 PM

सिरसा, बांसल:
पराली जलाने से बढ रहा प्रदूषण बेहद चिंता का विषय है और प्रदूषित जहरीली हवा के कारण मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशुओं के लिए भी घातक है। इस आपातकाल जैसे हालात से निपटने के लिए हम सबको सामूहिक प्रयास करने होंगे तथा सिरसा जिला को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हर नागरिक को हर संभव सहयोग देना होगा।   

पराली से उत्पन्न हुए प्रदूषण पर अंकुश के लिए सामूहिक योगदान दे नागरिक 


यह बात उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग ने मंगलवार को स्थानीय पंचायत भवन में आयोजित जिला की गौशालाओं के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि गौशालाएं व पंचायतें आपसी तालमेल से कार्य करें और पराली को खेतों से उठा कर गौशालाओं में भिजवाएं। कृषि विभाग द्वारा पराली प्रबंधन के लिए किसानों को भारी भरकम अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा पंचायतों को भी कृषि यंत्र भेजे जा रहे हैं। गौशालाएं पंचायत से मिलकर इन यंत्रों का प्रयोग कर सकती हैं और गौशालाएं भी विभाग से अनुदान पर कृषि यंत्र के लिए आवेदन कर सकती है। उन्होंने कहा कि पराली खेतों में न जले इसके लिए प्रशासन बेहद गंभीरता से कार्य कर रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि जहरीली हवा से उत्पन्न इस संकट से निपटने के लिए गौशालाएं, ग्राम पंचायतें व सभी नागरिक जिला प्रशासन का सहयोग करें। जिन गांवों में धान की कटाई लंबित है उन गांवों में प्रशासन द्वारा अधिकारियों की ड्यूटियां लगा दी गई है, ये अधिकारी धान की कटाई के दौरान न केवल खेतों पर निगरानी रखेंगे बल्कि पराली जलाने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। सभी सरपंच अपने-अपने गांवों में मुनादी करवा कर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करें। गांवों में पराली जलाने की घटना होने पर संबंधित सरपंच की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हवा में घुलकर धुंआ जहरीला हो जाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गो, महिलाओं एवं खासकर दमा एवं ह्दय के रोगियों को काफी परेशानी होती है। दूषित वातावरण से आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत व अन्य परेशानियां होती है। उन्होंने कहा कि पराली जलाना समाधान नहीं है, इसका प्रबंधन किया जाना चाहिए। पराली जलाने से जहां वातावरण दूषित होता हैं वहां खेत की जमीन को भी हानि पहुंचती है। इस दौरान गौशाला प्रतिनिधियों ने पराली से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश से संबंधित सुझाव भी दिए और उपायुक्त को प्रदूषण रोकने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

जिला सिरसा में पराली प्रबंधन के पर्याप्त कृषि यंत्र है और 198 कस्टम हायरिंग सैंटर भी स्थापित किए गए हैं, जिससे किसान रियायती दरों पर या किराये पर भी कृषि यंत्र लेकर पराली प्रबंधन कर सकते हैं। सिरसा में 100 स्ट्रा बेलर यूनिट अनुदान पर दिए जा रहे हैं, जिससे किसानों को पराली प्रबंधन मेें सहायता मिलेगी। इसके अलावा 60 पंचायतों को जहां धान की पैदावार ज्यादा होती है, कस्टम हेयरिंग सैंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

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