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पंजाब

नई शिक्षा नीति पर गहन चिंतन हेतू गोष्ठी का आयोजन

November 07, 2019 06:32 PM

फिरोजपुर, मनीष बावा:
देश में बन रही नई शिक्षा नीति पर गहन चिंतन करने हेतू नैशनल इंडीपैंडेंट स्कूल एलांयस -नीसा- द्वारा वीरवार को दास एंड ब्राऊन वल्र्ड स्कूल में नीसा क्वालिटी एंड एडवोकेसी इनीशिएटिव विषय पर आधारित बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता नीसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा: कुलभूषण शर्मा व डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के सीईओ व नीसा के नैशनल एडवाइजर अनिरूद्ध गुप्ता द्वारा की गई। गौरतलब है कि भारत के 22 राज्यों के करीब 65 हजार से अधिक स्कूल नीसा के सदस्य है, जिसमें डीसीएम समूह वशिष्ट स्थान रखता है।
बैठक में समस्त भारत से नीसा के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें तमिलनाड्डू से नीसा के राष्ट्रीय कोआर्डीनेटर थोमस एंटनी, आंध्रा प्रदेश से नीसा के क्वालिटी उपाध्यक्ष तुलसी प्रशाद, तेलांगना से मधु सूदन के अलावा कोषाध्यक्ष व अध्यक्ष पीएलपीएस दिल्ली प्रेम चंद देशवाल, अशोक ठाकुर, लक्ष्य छाबरिया, प्रशांत मुंजाल, राजीव मेहत्ता, नीसा के नैशनल क्वालिटी एडवाइजर डा: कुलदीप आन्नद, फैडरेशन ऑफ प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमित मेहत्ता, पंकज सिडाना, विक्रांत शिवालिक, बंसी लाल कपूर सहित राज्य व केन्द्र शासित प्रदेशों से शिक्षाविद्वो ने विशेष रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आज की मीटिंग में जो फैसले लिए जाएंगे नीसा द्वारा उसे नीति आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय को भेजे जाएंगे कि और मांग की जाएगी सरकार द्वारा जो नई शिक्षा नीति बनाई जा रही है उस कमेटी में बड़े शिक्षण संस्थानो के प्रतिनिधियों के अलावा नीसा के पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएं।
बैठक में अनिरूद्ध गुप्ता डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स की उपलब्धियों के बारे में अवगत करवाया। बैठक के हरेक सत्र में सदस्यों द्वारा शिक्षा संबंधी विषयों पर विचार करने के अलावा विभिन्न फैसले लिए गए। भारत सरकार द्वारा विचाराधीन नई शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए नीसा सदस्यों ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जो नीति बनाई जा रही है, उसे पंजाबी भाषा में भी बनाया जाएं। कुलभूषण शर्मा ने कहा कि भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है, जबकि सरकार ने अभी तक पंजाबी व डौगरी भाषा में इस नीति को नहीं बनाया है। जिसके चलते नीसा द्वारा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक रिट भी दायर की गई है। डॉयरैक्ट बैनीफिट ट्रांस्फर -डीबीटी- के तहत मांग रखते हुए नीसा के नैशनल कोआर्डीनेटर थोमस एंटनी ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सरकार द्वारा तीन हजार रूपएं प्रति माह विद्यार्थियों के खाते में ट्रांस्फर किए जाएं, ताकि विद्यार्थी स्वेच्छा से अपनी पसंद के स्कूल में शिक्षा हासिल कर सकेगा।
देश के स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अलावा शिक्षा दे रहे अध्यापकों व प्रिंसिपल की सुरक्षा यकीनी बनाने के हेतू कानून लाय जाना चाहिए ताकि उक्त सभी खुद को सुरक्षित महसूस कर सके और असमाजिक तत्व किसी भी शिक्षण संस्थान में उग्र व्यवहार ना कर सके।
तुलसी प्रसाद ने कहा कि नीसा द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के साथ मिलकर प्रोग्राम चलाएं जा रहे है तथा इसमें डीसीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के सीईओ अनिरूद्ध गुप्ता का अहम योगदान है, जिन्होंने समस्त भारत में शिक्षा के विकास व गुणवत्ता को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि डीसीएम ग्रुप देश के उन बेहतरीन स्कूलों में से एक है, जिन्होंने कम खर्च में विश्व स्तरीय शिक्षा का मॉडल तैयार किया है। उन्होंने कहा कि पिछलें सात दशकों में इस समूह द्वारा किए जा रहे कार्यो पर एक डॉक्यूमैंट्री तैयार की जाएगी। मधु सूदन ने कहा कि 21वीं सदी में जरूरतों को ध्यान में रखे हुए शिक्षा नीति में नएं बदलाव की जरूरत है। आर्टीफिशियल तकनीक के इस युग में मल्टीपल इंटैलीजेंसी के अलावा विद्यार्थियों को वह सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जानी चाहिए ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो सके। उन्होंने कहा कि नीसा द्वारा शिक्षा में सुधार हेतू अनेको कदम उठाएं जा रहे है।

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