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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव : 18 हजार विद्यार्थी, 18 अध्यायों के 18 श्लोकों के वैश्विक गीता पाठ की तरंगें गूंजी

December 08, 2019 05:54 PM

चंडीगढ़:कुरुक्षेत्र, फेस2न्यूज

मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन अवसर पर 18 हजार विद्यार्थियों द्वारा पवित्र ग्रंथ गीता के 18 अध्यायों के 18 श्लोकों के वैश्विक गीता पाठ की तरंगें पूरे विश्व में गुंजायमान हुई हैं। इस वैश्विक गीता पाठ को गीता जयंती के अवसर पर हर घर में किया जाए, इसके लिए गीता महोत्सव 2020 को हरियाणा के हर जिले में गीता जयंती के पावन अवसर पर 3 दिनों के सामूहिक वैश्विक गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा।

Geeta Mahautsav in Sonepat
 
 
 मुख्यमंत्री आज कुरुक्षेत्र के थीम पार्क में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम में प्रदेशवासियों को सम्बोधित कर रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी, स्वामी ज्ञानानंद जी महारज, महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी महाराज, खेलमंत्री संदीप सिंह, सांसद नायब सिंह सैनी, विधायक सुभाष सुधा, विधायक कमल गुप्ता, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कृष्ण कुमार बेदी सहित गणमान्य व्यक्तियों ने दीपशिखा प्रज्जवलित करके विधिवत रूप से 18 हजार विद्यार्थियों के 18 श्लोकी वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस दौरान सभी विद्यार्थियों को बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड लंदन तथा वैश्विक गीता पाठ से अंकित मैडल भी प्रदान किए गए।

मुख्यमंत्री ने वैश्विक गीता पाठ में शिरकत करने वाले विद्यालयों में सोमवार को एक दिन का अवकाश करने की घोषणा भी की

श्री मनोहर लाल ने गीता स्थली कुरुक्षेत्र की भूमि से पूरे विश्व को गीता जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पिछले वर्ष इसी जगह इसी समय 18 विद्यार्थियों के वैश्विक गीता पाठ को बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड लंदन में दर्ज किया गया था। इस रिकॉर्ड से अंकित मैडल विद्यार्थियों को दिया गया है। सरकार पूरी दुनिया में गीता के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रही है। आज गीता जयंती के पावन अवसर पर भारतीय समयानुसार 12 बजे बहुत से देशों में पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों की गंूज सूनी जा रही है। इन श्लोकों की तरंगों से पूरी मानव जाति का कल्याण होगा। पवित्र ग्रंथ गीता एक धर्मगं्रथ ही नहीं है अपितु यह ग्रंथ जीवन जीने की एक शैली है और इसके उपदेश शास्वत और अमर हैं जो पूरे विश्व को ज्ञान का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि
आज से 5157 वर्ष पूर्व इसी धरा से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का जो उपदेश दिया था, उसी का अनुसरण आज भी पूरी दुनिया कर रही है। कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर लगभग 17 दिनों के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। राज्य सरकार का प्रयास रहेगा कि गीता महोत्सव-2020 के पावन अवसर पर गीता जयंती के दिन हरियाणा के हर जिले में, चाहे लघु स्वरूप हो, 3 दिवसीय सामूहिक वैश्विक गीता पाठ का आयोजन किया जाए। इसके अलावा, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, जूना पीठ के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी महाराज और बाबा भूपेन्द्र सिंह के सहयोग से प्रयास किया जाएगा कि आगामी वर्ष से देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में भी 3 दिवसीय वैश्विक गीता पाठ व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 20 देशों में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की भागीदारी रही है। फरवरी-2019 में मारीशस और फिर लंदन में गीता महोत्सव का आयोजन किया गया। अब मार्च-2020 में आस्टे्रलिया और जुलाई में कनाडा में गीता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष नेपाल ने सहभागी देश के रूप में अपनी भागीदारी की है और नेपाल सरकार ने आश्वासन दिया है कि वहां भी 3 दिनों के लिए गीता जयंती का आयोजन किया जाएगा।
श्री मनोहर लाल ने कहा कि पूरी दुनिया में गीतामय वातावरण बने और हर जगह छोटे और बड़े कार्यक्रमों का आयोजन हो, प्रत्येक घर में मार्गशीर्ष एकादशी के दिन गीता का पाठ हो, इस प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता मानव जाति को कर्म करने का संदेश देती है। जो व्यक्ति लालसा और चिंता से ग्रस्त होता है, उसका निवारण पवित्र ग्रंथ गीता में निहित है। 9 दिसम्बर को एंटी करप्शन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिन अगर सभी लोग गीता को अपने जीवन का आधार बनाने का संकल्प लें तो देश और प्रदेश से भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने गीता स्थली ज्योतिसर तीर्थ पर पंहुचकर वटवृक्ष के नीचे मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ गीता पाठ किया और ज्योतिसर तीर्थ का अवलोकन भी किया। यहां पर विद्वान ब्राह्मïणों द्वारा गीता जयंती पर गीता पाठ का आयोजन किया जा रहा है।

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी ने गीता जयंती की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र की धरा पवित्र ग्रंथ गीता की जननी है। इस भूमि पर दिया गया गीता का उपदेश आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की तरफ से गीता जयंती को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया है। इस कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड को सहभागी राज्य के रूप में देखना एक सौभाग्य का विषय है। देवभूमि उत्तराखंड और उपदेश स्थली कुरुक्षेत्र का संगम अनुकरणीय है।

उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता हिन्दू सभ्यता के लिये ही नहीं बल्कि पूरी मानव जाति के लिये प्रेरणादायक है। आज 45 देशों के 100 विद्यार्थी हिन्दी और संस्कृत का ज्ञान लेने के लिये उत्तराखंड में पहुंचे हैं। ये विद्यार्थी गीता का ज्ञान लेकर अपने-अपने देशों में ग्रंथ गीता के उपदेशों के प्रचार-प्रसार करेंगे। इस प्रकार के प्रयासों से गीता पूरे विश्व का ग्रंथ बन जायेगा।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने कहा कि आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि से पूरी मानवता को गीता का उपदेश दिया था। सरकार की तरफ से पिछले चार सालों से गीता जयंती को अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है और तीन सालों से सेमिनार, विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान और केडीबी के सौजन्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन गीता जयंती के दिन 18 हजार विद्यार्थियों का वैश्विक गीता पाठ सबसे अहम कार्यक्रम है। पिछले वर्ष भी अठारह अध्यायों के 18 श्लोकों के उच्चारण का विश्व रिकॉर्ड बन चुका है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और मन में सात्विक विचार पनपते हैं।

जूनापीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज ने कहा कि सरकार और स्वामी ज्ञानानन्द के प्रयासों से गीता जयंती को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप मिला है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से आने वाले कुछ सालों में भारत की संस्कृति को विशेष दर्जा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बॉस्टन के एक अखबार ने उल्लेख भी किया है कि आज भारत की सभ्यता सबसे तेज गति से विकसित हो रही है। इतना ही नहीं, अब मुस्लिम देशों में भी पवित्र ग्रंथ गीता की आवाज उठने लगी है। इस ग्रंथ को पूरी मानवता के कल्याण के रूप में देखा जा रहा है। आज भी 18 देशों में प्राइमरी शिक्षा में गीता का पाठ पठाया जा रहा है।

सांसद नायब सिंह सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से और स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज की देखरेख में गीता जयंती को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप मिला है। यह महोत्सव हर वर्ष नये मुकाम की तरफ आगे बढ़ रहा है। थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि इस महोत्सव के कारण पूरी दुनिया में कुरुक्षेत्र की पहचान बनी है। पिछले वर्ष जहां 40 लाख लोगों ने महोत्सव में शिरकत की थी, वहीं इस वर्ष भी लाखों की संख्या में पर्यटक महोत्सव में पंहुचे हैं।

इस कार्यक्रम में प्रशासन की तरफ से मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी, खेल मंत्री संदीप सिंह व अन्य मेहमानों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 कैलाश चंद्र शर्मा, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी, पूर्व विधायक डॉ0 पवन सैनी सहित अन्य अधिकारीगण और गणमान्य लोग उपस्थित थे।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव जनमानस के लिए एक अनूठे संगम के रूप में परिवर्तित

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव जनमानस के लिए एक अनूठे संगम के रूप में परिवर्तित हो गया है, जिसने हर आयुवर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। महोत्सव में संस्कृति और संस्कार है तो यहां अध्यात्म भी है। यहां गीत-संगीत है तो लोगों के लिए घरेलू सामान व साज-सज्जा तथा वस्त्रों की भी भरमार है। मनोरंजन के लिए मेला भी लगा है तो धर्मलाभ के लिए रोजाना महाआरती का आयोजन किया जा रहा है।

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन के लिए विश्व स्तर पर अलग पहचान मिल रही है। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटकों तथा कलाकारों से सुसज्जित महोत्सव एक लघु भारत की छठा बिखेर रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये कलाकार अपने-अपने राज्य की संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वहीं शिल्पकार सरस व क्राफ्ट मेले में अपने प्रदेशों की सभ्यता व वेशभूषा आदि का प्रचार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह संगम उत्सुकता का विषय बना हुआ है। कुरुक्षेत्र के गांव बाबैन की सुधा रानी कहती हैं कि वैसे तो उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में जाने का अवसर पता नहीं कब मिलेगा, लेकिन गीता महोत्सव में उन्हें देश की अद्भुत संस्कृति के दर्शन हो रहे हैं।

संस्कृति व संस्कार की जड़ों को मजबूती देने में गीता महोत्सव मील का पत्थर साबित हो रहा है। मेले में लोग परिवार सहित आ रहे हैं, जिन्हें अपने देश की संस्कृति से रू-ब-रू होने का स्वर्णिम अवसर मिल रहा है। ब्रह्मसरोवर में प्रतिदिन सांयकाल महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृत के श्लोकोच्चारण तथा गीता पर आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रम हमें हमारी समृद्धशाली संस्कृति का बोध कराते हैं। इस महोत्सव में वाटर लेजर शो के माध्यम से लोगों को गीता का संदेश दिया जा रहा है। आयोजन स्थल में प्रवेश मात्र से ही गीता के संदेशों से किसी न किसी रूप में परिचित होने का अवसर मिल रहा है। साथ ही इस प्रकार के आयोजन व विचार गोष्ठियां विषय को विस्तार से समझने में मदद करते हैं। महोत्सव में लाखों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालुगण पहुंच रहे हैं, जो हर तरह से महोत्सव का आनंद ले रहे हैं। हरियाणा के साथ-साथ अन्य प्रदेशों की संस्कृति लोगों के लिए दर्शनीय है। विभिन्न विभागों के स्टॉलों पर सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
महोत्सव स्थल पर जगह-जगह बजने वाले बीन तथा नगाड़े वहां से गुजरने वाले युवक-युवतियों को कलाकारों के साथ थिरकने को विवश कर देते हैं। इससे सरस व क्राफ्ट मेले में स्टॉल लगाने वाले शिल्पकारों का भी भरपूर मनोरंजन हो रहा है। हिमाचल से आई कविता कहती हैं कि महोत्सव में समय कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता। ब्रह्मसरोवर से हटकर भी गीता महोत्सव की छठा देखने लायक है। मेला ग्राउंड में बच्चों के लिए झूले लगाये गये हैं तो संध्या को संगीतमय बनाने के लिए प्रतिदिन प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। सोनीपत से आये बिजेन्द्र सिंह व यमुनानगर के सतबीर तथा राजस्थान के बृज मोहन का कहना था कि महोत्सव अपने आप में एक अनूठा व बेहतरीन आयोजन है। यहां लोगों को नायाब वस्तुओं की खरीददारी के लिए भी बेहतरीन मंच मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहने चाहिए।

हरियाणवी लोकगीतों, नृत्यों, रागनियों और सांग की धूम

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा आयोजित अंन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2019 के अवसर पर ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में ‘विरासत’ हेरिटेज विलेज में पिछले 5 दिनों से हरियाणवी लोकगीतों, नृत्यों, रागनियों और सांग की धूम मची हुई है। यहां पर हर रोज हजारों की संख्या में पर्यटक हरियाणवी संस्कृति का ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। विरासत हेरिटेज विलेज में हरियाणा की गायन शैलियों के विविध प्रयोग सांगी सूरज बेदी, सोमबीर कथूरवाल और बाबा धुणिनाथ द्वारा प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही एसडी कॉलेज नरवाना की छात्राओं ने हरियाणवी सांग प्रस्तुत कर सांस्कृतिक संदेश दिया। हरियाणा के खोडिय़ा, घूम्मर, धमाल सहित अनेक नृत्य भी यहां पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं।

इसके अलावा, हेरिटेज विलेज में हरियाणवी ताऊ भी रैम्प पर चले। हेरिटेज विलेज के मुख्य मंच पर आच्छी पगड़ी, चोक्खी मूछ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें 20 से अधिक बुजुर्ग ताऊओं ने भाग लिया, जिसमें पहला स्थान अभय राम को प्राप्त हुआ। साहब सिंह दूसरे, जबकि कुरुक्षेत्र के राजाराम तीसरे स्थान पर रहे। ईशम सिंह को इस प्रतियोगिता में सांत्वना पुरस्कार प्राप्त हुआ।

इस प्रतियोगिता के अंतर्गत सूरजा, सूरता, बीर सिंह, अभय राम, मंगल राम, राजा राम, रामेश्वर, शेर सिंह, ईशम सिंह, लीला राम, साहब सिंह, संत राम, अंत राम, चत्तर सिंह, रामधन, रामफल, रामचन्द्र, मान सिंह आदि बुजुर्ग ताऊओं ने भाग लिया। आच्छी पगड़ी, चोक्खी मूच्छ कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य हरियाणा की परम्परागत संस्कृति पगड़ी एवं मूछ को गरिमामयी तरीके से प्रस्तुत करना था। इस कड़ी में हरियाणवी लोकजीवन की विरासत की झांकी को देखने के लिए दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ा। यह प्रतियोगिता सोशल मीडिया में लाइव भी की गई। वहां पर उपस्थित जनसमूह का उत्साह देखते ही बन रहा था। विरासत हेरिटेज के मंच पर इस प्रतियोगिता का आयोजन दूसरी बार किया गया है।

‘विरासत’ हेरिटेज विलेज के माध्यम से लोक पारम्परिक रेज़ा फैब्रिक

अंन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2019 के अवसर पर ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में स्थापित ‘विरासत’ हेरिटेज विलेज के माध्यम से लोक पारम्परिक रेज़ा फैब्रिक को विकसित किया जाएगा। वर्तमान दौर में बाजार के साथ जोडकऱ रेजे को नये परिधानों के साथ नये स्वरूप में प्रस्तुत करने का काम विरासत हेरिटेज विलेज के माध्यम से किया जाएगा।

आज पूरे हरियाणा में जिला हिसार के आदमपुर के सुभाष के अलावा शायद ही कोई जुलाहा अपने पुराने ताम-झाम अर्थात करघे पर सक्रिय मिलेगा। इनके दो-पैडल ‘पिट-लूम’ को दुबारा से सक्रिय करने का श्रेय प्रोफेसर महासिंह पूनिया को जाता है, जो पिछले 20 वर्ष से हरियाणा में परम्पराओं के संरक्षण एवं संस्कृति कर्मियों के संयोजक के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम कर चुके हैं।

सुभाष ने 15 वर्ष पहले महासिंह पूनिया के आग्रह पर अपने करघे को पुनर्जीवित किया और जहां भी संस्कृति और हरियाणवी धरोहर का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर मिला वहीं पर करघा चालू करवाया। एक विस्मृत परंपरा को जीवित रखने का हरियाणा में यह प्रथम प्रयास है जिसके लिए सुभाष जैसे व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। इनकी इच्छा है कि ‘पिट-लूम’ को उन गांवों में पुनर्जीवित किया जाए, जहां करघे के जानकार बुजुर्ग अभी जिंदा हैं। वे खुद काम नहीं कर सकते तो उत्साही युवकों को इस काम की जानकारी देकर उन्हें दक्ष कर सकते हैं।

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