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राष्ट्रीय

मन की शांति व शक्ति हेतु शिविर, श्रेष्ठ कर्म और संस्कार हमारी पहचान

December 13, 2019 07:22 AM

भिलाई, फेस2न्यूज:
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा बोरसी के प्रगति मैदान में चल रहे मन की शांति व शक्ति शिविर के पाँचवे दिन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी ने कहा कि हमारे द्वारा बार-बार किए कर्मों से हमारे संस्कार बनते हैं और यही संस्कार मृत्यु के पश्चात हमारे साथ जाते हैं और हम इन्हीं संस्कारों को लेकर पुनरजन्म लेते हैं इसीलिए श्रेष्ठ संस्कार ही हमारी मूल्यवान संपत्ति इसे खोना नहीं है हमारी पहचान हमारे श्रेष्ठ कर्मों और संस्कारों से ही है।
परमात्मा के परिचय के बारे में बताते हुए कहा कि परमात्मा वह है जो सर्वमान्य हो और सर्व शक्तियों का भंडार है तथा वह सर्वोच्च है। जन्म मरण से न्यारे हैं। ऐसे भगवान से हमें मांगना नहीं है लेकिन हम उनके अधिकारी बच्चे हैं यदि हम स्वच्छ निर्मल मन से हर कार्य करेंगे तो हमारी सफलता निश्चित है और परमात्मा का सदा साथ और हाथ हमारे साथ रहेगा।
जब हम राजयोग मेडिटेशन द्वारा परमात्मा के संग में आते है तो पुराने संस्कार भस्म हो नये दैवीय संस्कार बनते है जिससे मन शान्त और शक्तिशाली होता है।
कोई भौतिक वस्तु हमारे साथ नहीं जाती पर आज जीवन की सारी भागदौड़ भौतिक सुख सुविधाओं का संचय करने में हमारी मन की शांति व् शक्ति नष्ट हो रही है। हमारे साथ श्रेष्ठ कर्म और संस्कारों की पूंजी ही जाती है।

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