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राष्ट्रीय

आरटीआई में नगर परिषद् का अजीबोगरीब जवाब, हाईकोर्ट ने किया जवाब तलब

December 15, 2019 08:23 AM

जैसलमेर/चंडीगढ, संजय मिश्रा:
राजस्थान हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने के तथ्य की पुष्टि किए बिना ही द्वितीय अपील खारिज करने के राजस्थान राज्य सूचना आयोग के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर परिषद् जैसलमेर और राज्य सूचना आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नगर परिषद् के राज्य लोक सूचना अधिकारी ने इस आधार पर सूचना उपलब्ध नहीं करवाई थी कि आवेदक द्वारा दिया गया पता उनके रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए वह गलत है।
जैसलमेर निवासी महेन्द्र सिंह नरूका ने नगर परिषद् में आरटीआई के तहत आवेदन कर एम्पावर कमेटी की बैठकों के निर्णयों की प्रति चाही थी। जिस पर सूचना नहीं मिलने एवं प्रथम अपील विनिश्चयविहीन रहने पर सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई। आयोग में सुनवाई के दौरान प्रत्यर्थी नगर परिषद् की ओर से कहा गया कि वांछित सूचना आवेदक को प्रेषित कर दी गई है। इस आधार पर सूचना आयोग ने बिना दस्तावेज देखे ही सूचना प्रदत्त मानते हुए अपील खारिज कर दी। जबकि दस्तावेज में कहा कि आवेदक द्वारा दिया गया पता उनके रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए वह गलत है। याचिकाकर्ता की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजाक के. हैदर व पंकज साईं ने हाईकोर्ट को बताया कि नगर परिषद् ने आयोग में जो दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, उनके अवलोकन से स्पष्ट है कि नगर परिषद् ने सूचना उपलब्ध नहीं करवाई है, बल्कि उपलब्ध नहीं करवाने के कारणों का उल्लेख किया है। जो कारण बताए हैं, वह विधि विरुद्ध है। आरटीआई कानून की मूल भावना के खिलाफ होने के कारण आयोग को उन कारणों पर विचार करते हुए अपना निर्णय देना चाहिए था, लेकिन आयोग ने दस्तावेज का अवलोकन किए बिना ही सूचना उपलब्ध करवाने के गलत तथ्य के आधार पर अपील खारिज करने का निर्णय दे दिया, जो कि अपास्त होने योग्य है। प्रारम्भिक सुनवाई के बाद न्यायाधीश दिनेश मेहता ने राजस्थान राज्य सूचना आयोग, प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग और नगर परिषद् जैसलमेर के राज्य लोक सूचना अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के आदेश दिए।
यह था मामला:
आवेदक ने नगर परिषद् की एम्पावर्ड कमेटी की बैठकों का विवरण चाहा था। नगर परिषद् ने अपने जवाब में कहा कि आवेदक द्वारा दिया गया निवास पता उनके रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए आवेदक ने जो पता बताया है, वह गलत बताया है।
जबकि आवेदक का कहना है कि वह 18 वर्ष से इस पते पर निवासरत है और तीन-चार वर्ष से नगर परिषद् उनके इसी पते पर पत्राचार कर रही है। भ्रष्टाचार और अनियमितता उजागर होने के भय से उनको सूचना उपलब्ध नहीं करवाने की मंशा से नगर परिषद ने अजीबोगरीब जवाब भेजा है।

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