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पंजाब

कैंसर की चपेट में गांव बडबर, 6 से अधिक लोगों की हो चुकी मौत

January 24, 2020 09:36 PM

बरनाला, अखिलेश बंसल/करन अवतार

कैंसर की चपेट आ कर जिला के गांव बडबर में 6 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, उनका इलाज करवाते हुए तकरीबन सभी परिवार आर्थिक तौर पर पूरी तरह कमजोर ही नहीं बल्कि रिश्तेदारों के ऋणी हो चुके हैं। उन्हें जवान बेटे-बेटियों के विवाह करवाने मुश्किल हो गए हैं। जो सदस्य अभी भी इस नामुराद बीमारी की चपेट में हैं उनका इलाज करवा रहे परिवारिक सदस्यों को कैंसर के कारणों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं जा रही। गांव वालों का आरोप है कि सेहत विभाग की टीम की तरफ से फर्जी रिपोर्टें तैयार की जा रही हैं। जिसको लेकर आक्रोशित लोगोंं ने ऐलान किया है कि चुनावों के दौरान राजसी नेताओं को वोटों बदले कैंसर की रिपोर्टें भेंट की जाएंगी।

डाक्टर बोल रहे झूठ -सरपंच
सरपंच जगतार सिंह का कहना है कि उसके पिता समेत गांव में 6 मौतें कैंसर से और एक की मौत काला पीलिया से हुई है। जीता राम, गुड्डी कौर, महेन्दर कौर, अमर सिंह, इशर राम, स्वर्न सिंह की मौत कैंसर के साथ हुई थी जबकि काली देवी की मौत काला पीलीया से हुई। लेकिन हमें यह नहीं बताया जा रहा कि आखिर हमारे इलाका में कैंसर ने पैर कैसे पसारा है। बीमारी का पता लगाने या कोई समाधान निकालने की जगह सिविल सर्जन दफ़्तर की ओर से फर्जी रिपोर्टें बना कर सरकार के पास भेजी जा रही हैं। वक्त आने पर इसका जवाब सेहतमंत्री व मुख्यमंत्री  और केन्द्र से लिया जायेगा। जो इन्हें मोटे वेतन व अवार्ड देते हैं।

 

यह बताया मामला -
गांव बडबर निवासी समाजसेवी हरबंस लाल का कहना है कि उनके गांव में कैंसर की बीमारी ने पैर पसार रखे हैं। गांव मेें आठ सालों दौरान कईयों की मौत हो चुकी है। आर्थिक तंगी के चलते गांव के गरीब लोगों ने इलाज करवाना तो दूर की बात जांच-पड़ताल व टैस्ट करवाने को भी पैसे नहीं हैं। पीने वाले पानी के आरओ. भी काम नहीं कर रहे। इस बाबत वे राजनेताओं से लेकर डिप्टी कमिश्नर, सहायक डिप्टी कमिश्नर, डीडीपीओ, सेहत विभाग के सिवल सर्जन को भी मिल चुके हैं। किसी अधिकारी व किसी नेता ने गांव को इस बीमारी से निजात दिलाने के लिए कदम नहीं उठाए।

सेहत विभाग की तरफ से गांवों और कस्बों में कैंप लगाने की कागज़ी कार्यवाही करके काम चलाया जाता है। कैंसर से निपटने के लिए सरकार की ओर से प्रति मरीज को डेढ़ लाख रुपए की सहायता राशि देने की योजना है। सरकार की तरफ से भी बड़े बड़े बैनर/विज्ञापन प्रकाशित कर लोगों को इन्टरनेट पर जानकारी हासिल करने के लिए कहा जाता है। आलम यह है कि गांव के पीडित परिवार अपने सदस्यों का इलाज करवाते हुए लाखों-लाखों रुपए के ऋणी हो चुके हैं और गरीबी अनपढ़ता के कारण लोग सरकारी सहायता लेने से वंचित रह जाते हैं।

  दिहाडिय़ां कर रही बेटियां -
कैंसर पीडि़त टहल सिंह उर्फ टैहलू राम की पत्नी ने बताया कि उसके पति के इलाज के लिए पैसे पूरे नहीं हो रहे, सरकारी और प्रशास्निक कोई मदद नहीं मिली। उसकी दो जवान बेटियां हैं, दोनों ही अविवाहित हैं। पिता का इलाज करवाने के लिए जवान बेटियां दिहाड़ीयां कर रही हैं।

यह कहते हैं पीडि़त परिवार -
* रिंपी का कहना है कि उसके पिता जीता राम की मौत करीब चार महीने पहले कैंसर की बीमारी से हुई थी। उसके गले में कैंसर था। ब्याज पर उधारे पैसे लेकर उसका इलाज करवाया था। रिश्तेदारों से भी पैसे पकड़े हुए हैं। रिंपी ने बताया कि वह और उसका भाई रह गए हैं, जो कर्ज चुकता करने में लगे हुए हैं।

* एक नौजवान ने बताया कि उसकी दादी महेन्दर कौर की मौत सांस की नाली में कैंसर होने की वजह से हुई थी। संगरूर व पटियाला अस्पतालों में इलाज करवाया था। दिल्ली में आपरेशन करवाने के लिए कहा गया था। संगरूर अस्पताल द्वारा कोई सरकारी एम्बुलेंस की सुविधा नहीं देने और खुद के पास पैसे नहीं होने पर लोगों से उधार मांग कर रेल गाड़ी द्वारा दिल्ली पहुँचे थे। वहां भी आपरेशन करने से मनाह कर दिया गया। सेहत सुविधाएं मुहैया करवाने का प्रदर्शन करने वाली सरकारों पर लाहनतें हैं। अगामी होने वाले मतदान के दौरान बडबर गाँव की बाज़ीगर बस्ती की तरफ से राजनेताओं को कैंसर की रिपोर्टें भेंट की जाएंगी।

* गोरखा सिंह ने बताया कि उसकी माता काली देवी की मौत कैंसर से हुई जबकि डाक्टर बीमारी को काला पीलीया बता रहे हैं। माता के इलाज पर करीब ढाई लाख रुपए खर्च हुए थे। विधायक व सांसद बन चुके राजसी नेताओं ने मतदान के समय गांव का बड़े स्तर पर विकास करने के वायदे किये थे। विजय हासिल करने के बाद सभी ने अपने चेहरे ही छिपा लिए।

* कैंसर की बीमारी से मरे स्वर्न सिंह के भाई का कहना है कि उसके भाई की मौत कैंसर से हुई थी। जिसके कारणों के बारे में आज तक किसी विभाग ने जानकारी नहीं दी।

डाक्टर बोल रहे झूठ -सरपंच
सरपंच जगतार सिंह का कहना है कि उसके पिता समेत गांव में 6 मौतें कैंसर से और एक की मौत काला पीलिया से हुई है। जीता राम, गुड्डी कौर, महेन्दर कौर, अमर सिंह, इशर राम, स्वर्न सिंह की मौत कैंसर के साथ हुई थी। जबकि काली देवी की मौत काला पीलीया से हुई। लेकिन हमें यह नहीं बताया जा रहा कि आखिर हमारे इलाका में कैंसर ने पैर कैसे पसारा है। बीमारी का पता लगाने या कोई समाधान निकालने की जगह सिविल सर्जन दफ़्तर की ओर से फर्जी रिपोर्टें बना कर सरकार के पास भेजी जा रही हैं। वक्त आने पर इसका जवाब सेहतमंत्री व मुख्यमंत्री पंजाब सरकार और केन्द्र सरकार से लिया जायेगा। जो इन्हें मोटे वेतन व अवार्ड देते हैं।

पैस्टीसाईडस है बीमारियों का कारण -एचएसआरओ
समाजसेवी संस्था एच.एस.आर.ओ. के अध्यक्ष एडवोकेट करन अवतार कपिल का कहना है कि तकरीबन 35 -40 साल पहले खेतों में हमेशा गोबर व रूहडिय़ों की खाद का इस्तेमाल किया जाता था और फसलों पर नीम व निमोलियों से सप्रे की जाती थी। जबसे जहरीले केमिकल युक्त सप्रे का छिडक़ाव करना शुरू हुआ है तबसे भयानक बीमारियों की संख्या बढ़ी है। जिससे साफ़ है कि पेस्टीसाईडस में ऐसे केमिकल हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। कुलमिला कर खेतों में जहर की बोआई होती है और लोगों को जहर ही परोसी जा रही है।

6 नहीं 3 हुई मौतें-सिविल सर्जन
सिवल सर्जन बरनाला डा. जुगल किशोर का कहना है कि बरनाला और धनौला से सेहत विभाग की टीम गांव बडबर पहुंची थी। वहां किए गए सर्वे के दौरान चार मौतें हुई हैं। जिनमें तीन मौतें विभिन्न कैंसर से हुई, जबकि चौथी मौत काला पीलिया के कारण हुई है। पानी में खराबी है या जमीनी मिट्टी में खराबी है, इसकी जांच तो कृषि विभाग करे, लेकिन उनकी टीम को कैंसर की बीमारी का कारण नहीं पता लगा।

पैस्टीसाईडस के साथ नहीं होता कैंसर -सीएओ.
मुख्य कृषि अधिकारी बरनाला सुशील कुमार का कहना है कि वह विज्ञानिक हैं। उन्हें पैस्टीसाईडस की पूरी जानकारी है। पैस्टीसाईडस में कोई ऐसा जहरीला केमिकल नहीं होता जो कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देता हो। जरूरत पडऩे पर ही ज़मीन/मिट्टी और पानी की परख की जाती है।

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