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हरियाणा

मरीजों के साथ हो रहा है खिलवाड़ पीजीआई रोहतक में

February 20, 2020 07:14 PM

रोहतक, फेस2न्यूज:

पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रोहतक में सर्जरी के दौर से गुजरने वाले मरीजों की जिंदगी उन लोगों के हाथ में दी हुई है जो केवल 12वीं पास करके वहां ऑपरेशन थियेटर में बतौर तकनीशियन के रूप में काम करते हैं। इस पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम आवश्यक योग्यता ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी में बीएससी है, लेकिन जिनके पास ऐसी कोई डिग्री नहीं है, उन्हें सीएमजे यूनिवर्सिटी के फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्त कर दिया गया है। 

मरीजों को जोखिम में डाल रहे फेक डिग्री धारक ऑपरेशन थियेटर तकनीशियन


आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ राजिंदर के सिंगला द्वारा खुंगाले गए दस्तावेजों में महिपाल और राहुल जैसे कम से कम दो उम्मीदवारों का खुलासा हुआ है जो बिना किसी ऑपरेशन थियेटर टेक्नोलॉजी की योग्यता के सर्जरी में डॉक्टरों का सहयोग दे रहे हैं।
सिंगला ने आरोप लगाया कि यह नियुक्तियां सीएमजे यूनिवर्सिटी, शिलॉन्ग से खरीदी गई नकली मार्कशीट के आधार पर की गई हैं।
पद के लिए बनाए सिनॉप्सिस में दिए 8 उम्मीदवारों के सारांश से पता चलता है कि उनमें से किसी के भी पास बीएससी की डिग्री नहीं थी। तदनुसार, 6 को अयोग्य घोषित किया गया, जबकि शेष दो, महिपाल और राहुल, को सीएमजे विश्वविद्यालय की संदिग्ध मार्कशीट के आधार पर 'प्रावधिक योग्य’ घोषित किया गया था।
हालांकि सर्जरी विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर और यूनिट हेड, जिन्होंने सिनोप्सिस तैयार किया था, ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि महिपाल और राहुल को प्रोविजनल रूप से माना जाएगा जब तक उनकी मार्कशीट की सत्यता स्थापित नहीं हो जाती, लेकिन संस्थान की चयन समिति ने बिना ऐसे किए प्रक्रिया को आगे बढाते हुए 31 अगस्त 2012 को महिपाल और राहुल की नियुक्ति की सिफारिश की।
डॉ एसएस सांगवान ने सक्रिय रूप से भूमिका निभाई, शुरुआत में महिपाल और राहुल को चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में चुनने में, और बाद में इन नियुक्तियों को कुलपति के रूप में मंजूरी देने में।
वीसी के अलावा, प्रो-वीसी डॉ एसएन चुघ, निदेशक-पीजीआईएमएस डॉ सीएस ढुल, डीन-पीजीआईएमएस डॉ वीके जैन, मेडिकल सुपडेट डॉ अशोक चौहान, रजिस्ट्रार डॉ सरला हुड्डा और संस्थान के दो प्रोफेसर भी चयन समिति में शामिल थे।
सीएमजे विश्वविद्यालय, शिलांग अक्टूबर 2010 में अस्तित्व में आया, जबकि इन दोनों उम्मीदवारों ने बीएससी जुलाई, 2012 से पहले पास कर ली। सिंगला ने सवाल उठाया है कि 3 वर्ष की अवधि वाली डिग्री 2 वर्ष से कम समय में कैसे हासिल की जा सकती है।
सीएमजे विश्वविद्यालय के गवर्नर और राज्यपाल मेघालय, आर.एस. मोसोहारी, ने 30 अप्रैल 2013 को सीएमजे यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गई सभी डिग्रियों को गैरकानूनी घोषित करते हुए वापस लेने का आदेश दिया था। सीएमजे यूनिवर्सिटी सुप्रीम कोर्ट तक गई जिसने इन डिग्रियों की अवैधता की पुष्टि की। सुप्रीम कोर्ट के 13 सितंबर, 2013 के आदेश के अनुपालन में मेघालय सरकार ने पुनः डिग्री धारकों को सुनवाई का मौका देते हुए और उनके दस्तावेजों की छानबीन के पश्चात मार्च 2014 में सभी 3592 आवेदकों की डिग्री को अमान्य घोषित कर दिया था।
इतना ही नहीं, हरियाणा के महानिदेशक (डीजीएचई) ने 4 अक्टूबर, 2013 को सभी राज्य और निजी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ हरियाणा में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों को कहा था कि सीएमजे विश्वविद्यालय की डिग्री के आधार पर किए गए सभी प्रवेश/ नियुक्तियों को रद्द किया जाए।
सिंगला ने बताया कि पीजीआई एमएस रोहतक के सूचना अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक (एमई-द्वितीय) ने इस संस्थान के अन्य कर्मचारियों का खुलासा करने से इनकार कर दिया है, जिन्हें सीएमजे विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्रीयों पर नियुक्त किया गया है।
चूंकि ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन सर्जिकल उपकरणों की sterilization करने और सर्जरी के अनुसार उनकी व्यवस्था का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि बहुत मरीज इन अयोग्य फर्जी प्रमाणपत्र वाले ओ.टी. तकनीशियनों की वजह से मरे होंगे।
सिंगला का कहना है कि वर्ष 2013 में ही DGHE हरियाणा ने स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, रोहतक के रजिस्ट्रार को ऐसी सभी नियुक्तियों को रद्द करने के लिए कहा था, उसके बाद भी महिपाल और राहुल कैसे वहां कार्यरत हैं, जांच होनी चहिए। सिंगला ने इस मामले को हरियाणा के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान मंत्री अनिल विज तथा राज्य सतर्कता के महानिदेशक डॉ केपी सिंह के संज्ञान में लाया है।

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