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हरियाणा विधानसभा: आठ बिल पारित, हरियाणा की आधिकारिक भाषा घोषित

March 05, 2020 08:36 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
हरियाणा विधानसभा बजट सत्र के अंतिम दिन आज कुल आठ बिल पारित किये गए, जिनमें हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद विधेयक, 2020, हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2020, भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020, हरियाणा राज भाषा (संशोधन) विधेयक, 2020, पंजाब आबकारी (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020, हरियाणा परियोजना भूमि समेकन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2020, हरियाणा अनुसूचित जाति (सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण) विधेयक, 2020 और हरियाण विनियोग (संख्या 2) विधेयक, 2020 शामिल हैं।
हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् विधेयक 2020:
राज्य में भौतिक-चिकित्साविदों के पंजीकरण के प्रयोजन के लिए तथा भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षक प्रदान करने वाली संस्थाओं को मान्यता देने के लिए तथा भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा के मानकों के समन्वयन तथा अवधारण के लिए हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् का गठन करने के लिए तथा उनसे सम्बन्धित या उनके आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करने हेतु यह विधेयक पारित किया है।
राज्य में भौतिक-चिकित्साविदों के पंजीकरण के लिए कोई भी परिषद विद्यमान नहीं है तथा केन्द्र के स्तर पर कोई अपेक्स निकाय भी नहीं है। सरकारी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सरकारी महाविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालयों में स्नातक भौतिक-चिकित्सा तथा स्नातकोत्तर (बीपीटी और एमपीटी) कोर्सों के लिए परीक्षा पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक द्वारा संचालित की जा रही है। सरकारी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सरकारी महाविद्यालयों तथा निजी महाविद्यालयों में स्नातक भौतिक-चिकित्सा और स्नातकोत्तर भौतिक-चिकित्सा के लिए केन्द्रित प्रवेश प्रक्रिया केन्द्रित संयुक्त काउंसलिंग के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग द्वारा संचालित की जाती है। इसलिए राज्य में भौतिक-चिकित्साविदों के पंजीकरण के प्रयोजन के लिए और भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं की मान्यता के लिए और भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा के मानकों के समन्वयन और अवधारण के लिए हरियाणा राज्य में सुसंगत और व्यापक अतिमहत्वपूर्ण निकाय सृजित करने की जरूरत है, चूंकि चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को भौतिक-चिकित्सा शिक्षा की देखभाल के लिए आदेश दिए गए हैं, प्रस्तावित हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् पूर्ण रूप से चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के पर्यवेक्षणाधीन कार्य करेगी।
हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् की स्थापना/गठन हेतु हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद का विधेयक प्रारूप तैयार कर दिया गया है और हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में शासन करने वाली एकमात्र निकाय होगी। इसलिए भौतिक-चिकित्सा शिक्षा के उन्नयन, सरलता और विनियमन के उद्देश्य प्राप्त करने तथा पंजीकरण प्रक्रिया से सम्बन्धित मामलों का निपटान करने और एकल छत्त के अधीन भौतिक-चिकित्सा शिक्षा के सहयुक्त प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं की मान्यता के लिए विधि पारित करना अति अनिवार्य है। इसलिए, यह विधेयक पारित किया गया है।

हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2020:
हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 को संशोधित करने के लिए यह विधेयक पारित किया गया है। ग्राम पंचायत विकास योजना को तैयार करने के लिए वार्ड सभा तथा ग्राम सभा की बैठकें करवाना आवश्यक है, इसलिए इनकी बैठकों को आयोजित करने के लिए कोरम, प्रक्रिया तथा ढंग निर्धारित करना आवश्यक है। पंचायती राज संस्थाओं के पांच साल के कार्यकाल का आरम्भ उनकी प्रथम बैठक की बजाय राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना की तिथि से निश्चित करना आवश्यक समझा गया है।
ग्राम पंचायत के निर्णयों की अंतिम स्थिति तथा सत्यतता सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक समझा गया कि ग्राम पंचायत अपने प्रस्ताव को पारित करने के तीन मास पश्चात्ï उन्हें वापिस या रद्द न करें। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक समझा गया कि ग्राम पंचायतें उनके प्रस्ताव पर समयबद्ध तरीके से कार्यवाही करें। निर्णयों में लोगों की सहभागिता तथा पारदर्शिता लाने के लिए भूमि की बिक्री, पट्टे तथा तबादले के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को अनुमोदन के लिए भेजने से पूर्व ग्राम सभा के समक्ष रखना आवश्यक समझा गया।
ग्राम पंचायतों द्वारा कई अन्य गतिविधियों के अतिरिक्त कुछ अन्य गतिविधियां जैसे आवारा पशुओं, खुले में शौच मुक्त, फसलों के अवशेष जलाने तथा जल संरक्षण को भी ग्राम पंचायतों द्वारा विनियमित तथा प्रबन्धित किया जाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, यह आवश्यक समझा गया कि ग्राम पंचायतों के आदेशों के विरुद्ध अपील की सुविधा राज्य सरकार की बजाय जिला मुख्यालय पर स्थित प्राधिकारी के समक्ष उपलब्ध करवा दी जाएं। अधिनियम के कई प्रावधानों के उल्लंघन की दशा में जुर्माना राशि को बढ़ाना आवश्यक समझा गया ताकि यह प्रभावी निवारक के रूप में काम कर सके।
वर्तमान में हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 176 में प्रावधान नहीं है कि चुनाव याचिका में दिवानी न्यायालय द्वारा पारित आदेश अंतिम होगा। दिवानी न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील दायर करने का भी प्रावधान नहीं है। इसलिए यह आवश्यक समझा गया कि चुनाव याचिका में दिवानी न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील का प्रावधान कर दिया जाए। इसलिए यह विधेयक पारित किया गया है।

भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संशोधन) विधेयक:
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 हरियाणा राज्यार्थ में आगे संशोधन करने के लिए भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020 पारित किया गया है। अधिनियम, 1899 की धारा 47-क में यह संशोधन उस संशोधन के मद्देनजर आवश्यक है जिसे 1995 के हरियाणा अधिनियम 21 में बनाया गया था। भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 47 क के तहत कलैक्टर के आदेश के खिलाफ अपील क े लिए ‘जिला न्यायाधीश’ शब्द के स्थान पर ‘मंडल के आयुक्त’ शब्द प्रतिस्थापित किया गया था। इसके अलावा, मुख्य नियंत्रण राजस्व प्राधिकारी, हरियाणा को आयुक्त की कार्यवाही की जांच करने और संशोधित करने का प्रावधान प्रदान करना है। इस अधिनियम की धारा 47-क के तहत अपने आदेश के खिलाफ राज्य के राजस्व के साथ-साथ सार्वजनिक हित में और सम्पत्ति के हस्तांतरण के कम मूल्यांकन दस्तावेजों में स्टाम्प शुल्क की चोरी को रोकने के लिए संशोधन आवश्यक था। इसलिए यह विधेयक पारित किया गया है।

हरियाणा राजभाषा (संशोधन) विधेयक:
हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969, को आगे संशोधित करने के लिए यह विधेयक पारित किया गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान है कि हिंदी राज्य की आधिकारिक भाषा होगी। विगत 26 जनवरी, 1950 को हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा बनाया गया। भारतीय संविधान के संस्थापकों ने इस बात पर बल दिया कि अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ हिंदी को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है, इसलिए भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में इसका प्रावधान किया गया है। हरियाणा राज्य को 1966 में भाषायी आधार पर पंजाब के पूर्ववर्ती राज्य से अलग कर दिया गया था क्योंकि इस क्षेत्र में मुख्य रूप से बोली जाने बाली भाषा हिंदी है। वर्ष 1969 में हरियाणा राजभाषा अधिनियम की धारा 3 के प्रावधान के अनुसार, हिंदी को हरियाणा की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया।
पंजाब राज्य में, पंजाब राजभाषा अधिनियम, 1967 में, 1969 के पंजाब अधिनियम संख्या 11 द्वारा संशोधन किया गया, जिसमें धारा 3ए और 3बी को जोड़ा गया, कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधीनस्थ सभी सिविल न्यायालयों और आपराधिक न्यायालयों एवं सभी राजस्व न्यायालयों और अधिकरणों में पंजाबी में काम किया जाएगा। हरियाणा सरकार को हरियाणा राज्य के 78 विधायकों, हरियाणा के महाधिवक्ता और सैकड़ों अधिवक्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक मांग पत्र भी प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने न्यायालयों में प्रयोग के लिए हिंदी भाषा को अधिकृत करने हेतु अपनी रुचि व्यक्त की है ताकि हरियाणा के नागरिक संपूर्ण न्याय प्रक्रिया को अपनी भाषा में समझ सकें और आसानी से अपने विचार न्यायालयों के समक्ष रख सकते हैं। हाल ही में, केरल उच्च न्यायालय के हीरक जयंती कार्यक्रम में, राष्टï्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने भी इस बात पर बल दिया कि न्यायालय को निर्णय वादी की भाषा में उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। भारत के अधिवक्ताओं, बुद्घिजीवियों और न्यायविदों द्वारा शुरू किया गया भारतीय भाषा अभियान इस दिशा में भी काम कर रहा है कि भारत के न्यायालयों में भारतीय भाषाओं में काम शुरू किया जाए। इसलिए, पंजाब एवं हरियाणा के उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों में हिंदी भाषा के प्रयोग को अधिकृत करना विवेक सम्मत है।
राज्य के लोगों की भाषा के रूप में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए, यह आवश्यक है कि इस भाषा का प्रयोग हमारे दिन-प्रतिदिन के काम में किया जाए। लोकतंत्र में न्याय का उद्देश्य यह है कि वादी को अपनी भाषा में जल्दी न्याय मिलना चाहिए और कार्यवाही के दौरान वादी अवाक नहीं रहना चाहिए। हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 को हरियाणा राज्य के आधिकारिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के रूप में हिंदी को अपनाने के लिए राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किया गया था। इस अधिनियम में पंजाब एवं हरियाणा के उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों में हिंदी के उपयोग के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं है।
विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं राज्यों में आधिकारिक कार्यों के लिए एवं निर्देशों में प्रयोग के लिए तेजी से अंग्रेजी की जगह ले रही हैं। लेकिन यह स्वाभाविक है कि प्रमुख भाषाओं को अपनी सही जगह सुरक्षित करनी चाहिए। हरियाणा राज्य में मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा हिंदी का, पंजाब एवं हरियाणा के उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों और अधिकरणों में काम करने के उद्देश्यों के लिए उसी का प्रयोग इस प्रकार व्यवहारिक आवश्यकता का विषय बन गया है। इसलिए यह विधेयक पारित किया गया है।

पंजाब आबकारी (हरियाणा संशोधन) विधेयक:
आबकारी एवं कराधान विभाग नकली शराब के निर्माण एवं बिक्री पर पूर्ण जांच सुनिश्चित करने, आबकारी शुल्क की चोरी के सभी प्रयासों को विफल करने, रिसाव/तीक्षणता को बंद करने, राजस्व के अनुकूलन, वैध और जिम्मेदार पीने के लिए माहौल बनाने और अच्छी गुणवत्ता प्रदान करने के लिए और शराब पीने वालों को उचित मूल्य पर शराब उपलब्ध करवाने हेतु प्रतिबद्घ है। शराब माफियाओं के प्रभुत्व को रोकने के लिए भी विभाग सभी प्रयास कर रहा है। राज्य में नागरिकों के स्वास्थ्य एवं भलाई को उचित महत्व दिया जा रहा है। इसलिए यह जरूरी था कि इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शराब के आयात, निर्यात, परिवहन, विनिर्माण और कब्जे संबंधी विधि को कठोर बनाया जाए। इसलिए पंजाब आबकारी अधिनियम 1914, हरियाणा राज्यार्थ को आगे संशोधित करने के लिए यह पंजाब आबकारी (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020 पारित किया गया है।

हरियाणा परियोजना भूमि समेकन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक:
हरियाणा परियोजना भूमि समेकन (विशेष उपबंध) अधिनियम, 2017 को संशोधित करने के लिए यह विधेयक पारित किया गया है। हरियाणा परियोजना भूमि समेकन (विशेष उपबंध), विधेयक, 2017 के मुख्य हरियाणा समेकन (2017 के हरियाणा अधिनियम संख्या 28) का उद्देश्य परियोजना की स्थापना के लिए बचे हुए भूमि के टुकड़ों को समेकित करने के उद्देश्यों से, परियोजना या सम्बन्धित मामलों के लिए विशेष प्रावधान करना है या आकस्मिक उपचार। किन्तु इन प्रावधानों की व्याख्या और उन्हें लागू करने में हरियाणा राज्य को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसलिए हरियाणा अधिनियम 2017 की संख्या 28 में कुछ संशोधन करना आवश्यक है। तदनुसार, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उपरोक्त अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक है।
हरियाणा परियोजना भूमि समेकन (विशेष उपबंध)संशोधन विधेयक, 2020 में जिन उद्देश्यों की पूर्ति की आवश्यकता है उनमें 2017 के अधिनियम संख्या 28 में धारा 3 को प्रतिस्थापित करना ताकि पटï्टे पर ली गई भूमि को भी शामिल किया जा सके; धारा 7 के खण्ड (द्बद्ब)में संशोधन करना ताकि त्रुटि को दूर किया जा सके; उक्त अधिनियम की धारा 7 में दूसरी प्रोविजो सम्मिलित करने के लिए कलेक्टर दरों पर 10 प्रतिशत के अतिरिक्त मुआवजे का प्रावधान करके, यदि कोई व्यक्ति मुआवजे के लिए, भूमि के बदले में, उक्त अनुभाग के खंड (प)के अनुसार विकल्प देता है। इसके अलावा, उक्त अनुभाग में तीसरा प्रोविजो सम्मिलित करने के लिए, ताकि परियोजना भूमि पर किसी भी इमारत या संरचना के लिए मुआवजा प्राप्त करने का प्रावधान किया जा सके; मुख्य अधिनियम में धारा 9-क सम्मिलित करने के लिए, ताकि अपील का प्रावधान किया जा सके; धारा 9-क की प्रविष्टिï के मद्देनजर धारा 10 में संशोधन करने के लिए और मुख्य अधिनियम में धारा 17 को संशोधित करना ताकि अपील दायर करने तथा अन्तिम संशोधित स्कीम के प्रकाशन बारे विधि बताई जा सके, शामिल हैं।

हरियाणा अनुसूचित जाति (सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण) विधेयक:
हरियाणा राज्य में वंचित अनुसूचित जातियों के लिए विशेष उपायों सहित अनुसूचित जातियों से संबंधित व्यक्तियों को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण के लिए और इससे संबंधित अथवा इससे आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करते हेतु हरियाणा अनुसूचित जाति (सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण) विधेयक, 2020 विधेयक पारित किया गया है।
हरियाणा राज्य में सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के साथ-साथ सार्वजनिक रोजगार में भी अनुसूचित जाति के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाता है। कर्मचारी डाटा के विशलेषण से पता चला है कि राज्य में सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों का एक वर्ग का कुल प्रतिनिधित्व गु्रप ए,बी और सी सेवाओं में क्रमश: केवल 4.7, 4.14 और 6.27 प्रतिशत है। चाहे उनकी आबादी राज्य की कुल आबादी का लगभग 11 प्रतिशत है। यह भी प्रकाश में आया है कि हरियाणा में अन्य अनुसूचित जातियों की जनसंख्या भी राज्य की कुल आबादी का लगभग 11 प्रतिशत है लेकिन सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व के संबंध में उनका हिस्सा गु्रप ए,बी और सी सेवाओं में क्रमश: 11, 11.31 और 11.8 प्रतिशत है।
सरकारी सेवाओं में वंचित अनुसूचित जातियों के खराब प्रतिनिधित्व का कारण सामाजिक-आर्थिक जाति गणना सर्वेक्षण 2011 में एकत्र किए गए शिक्षा आंकड़ों से पता चलता है। गु्रप ए,बी और सी के पदों के बहुमत के लिए न्यूनतम निर्धारित शैक्षणिक योग्यता राज्य में स्नातक है। सर्वेक्षण 2011 के आंकड़ों से पता चला कि शिक्षा के मामले में वंचित अनुसूचित जातियों की केवल 3.53 प्रतिशत आबादी स्नातक, 3.75 प्रतिशत वरिष्ठï माध्यमिक स्तर, 6.63 प्रतिशत मैट्रिक या माध्यमिक स्तर और 46.75 प्रतिशत निरक्षर है।
वंचित अनुसूचित जाति के इस वर्ग का शैक्षणिक पिछड़ापन उन्हें नागरिकों का एक अलग वर्ग बनाता है जो अन्य अनुसूचित जाति की जनसंख्या की तुलना में अवसर की समानता के लिए संवैधानिक अधिकारी से वंचित है। इसलिए शिक्षा में अवसर की समानता के माध्यम से राज्य के विभिन्न वर्गों के बीच आरक्षण के लाभों का अनुपातिक वितरण और वंचित अनुसूचित जातियों के उत्थान की आवश्यकता है। इसलिए स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर डिग्री प्रदान करने वाले सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश हेतु उनके लिए आरक्षण करना वांछनीय है।
स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के संबंध में उनके लिए आरक्षण के लाभों का अधिक अनुपातिक वितरण सुनिश्चित करने के लिए स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश करते समय शैक्षणिक संस्थानों में 20 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जातियों के सदस्यों के लिए आरक्ष्ति होंगी, जिनें से 20 प्रतिशत सीटों का 50 प्रतिशत आरक्षित सीटे वंचित अनुसूचित जातियों से संबंधित आवेदकों को दी जाएंगी। जहां शैक्षणिक संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश के लिए वंचित अनुसूचित जातियों को दी जाने वाली सीटें किसी भी शैक्षणिक वर्ष में अपेक्षित योग्यताओं वाले अनुसूचित अभ्यार्थियों के उपलब्ध न होने के कारण भरी नहीं जा सकती वो सीटें शैक्षणिक संस्थानों द्वारा अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को उपलब्ध करवाई जाएंगी।

हरियाण विनियोग (संख्या 2) विधेयक:
यह विधेयक मार्च, 2020 के इकतीसवें दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान सेवाओं के लिए हरियाणा राज्य की संचित निधि में से कतिपय राशियों के भुगतान और विनियोग का प्राधिकार देने के लिए पारित किया गया।
यह विधेयक भारत के संविधान के अनुच्छेद 204(1) के अधीन हरियाणा राज्य की संचित निधि में से ऐसी धन राशियों के विनियोग के लिए उपबन्ध करने हेतु पारित किया गया, जो विधानसभा द्वारा किये गये अनुदानों और राज्य की संचित निधि पर प्रभारित खर्च को पूरा करने के लिए आवश्यक है, किन्तु ऐसी राशियां किसी भी दशा में उस राशि से अधिक नहीं होंगी, जो सदन के सामने पहले रखे गये विवरण में दशाई गई हैं।

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