ENGLISH HINDI Sunday, June 07, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
जिम खोलने की इजाजत मिले, डेराबस्सी में नॉर्थ इंडिया बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन ने की मांगवजन कम करना सबसे आसान काम है अगर सही तरीके से किया जाए : हनान चौधरीसमाजसेवी सुनील गुप्ता ने "तथास्तु चैरिटेबल ट्रस्ट" को हैंड सेनीटाइजर, मास्क और पौधे बांट कर मनाया पर्यावरण दिवस ट्रांसजेंडर वेलफेयर सोसायटी ने मनाया पर्यावरण दिवसएनजीओ इनविजिबल हैंड्स फाउंडेशन ने गरीबों में बाँटा राशनपंजाब में भी होंगी गुरुकुल शिक्षा केंद्रों की स्थापनाशराब के ग़ैर-कानूनी कारोबार और तस्करी जांच के लिए विशेष जांच टीम के गठन का ऐलानमाह तक 6 एमसीएच अस्पताल कार्यशील कर दिए जाएंगे: सिद्धू
राष्ट्रीय

कोविड-19 पर जागरूकता फैलाने की पहल, उद्देश्य मिथकों को दूर करने में मदद करना

April 01, 2020 08:31 PM

नई दिल्ली, फेस2न्यूज:
चीन से उपजे कोविड-19 के प्रकोप ने अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा महामारी घोषित यह बीमारी अब दुनिया के 204 देशों में फैल गई है। किसी महामारी के फैलने के साथ-साथ उससे जुड़ी भ्रांतियां, अंधविश्वास और डर भी लोगों के बीच तेजी से फैलने लगता है। कोविड-19 के मामले में एक महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि अलगाव, क्वारांटाइन और लॉक-डाउन जैसे चरम उपायों की समझ कैसे विकसित की जाए! और लोगों को यह कैसे समझाया जाए कि ऐसी स्थिति में एक-दूसरे से दूरी बनाए रखना क्यों जरूरी है?   

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा महामारी घोषित यह बीमारी अब दुनिया के 204 देशों में फैल गई है।


मिथकों को दूर करने और महामारी से निपटने के लिए अपनाए जा रहे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी वैज्ञानिक समझ प्रदान करने के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) ने संचार सामग्री का एक पैकेज पेश किया है। टीएफआईआर के शोधकर्ताओं ने बहु-भाषी संसाधनों (यूट्यूब वीडियो) का एक सेट बनाया है, जिसमें बताया गया है कि कोविड-19 जैसे वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखना क्यों आवश्यक है।
कोविड-19 के बारे में जागरूकता के प्रसार के लिए तैयार की गई यह सामग्री वाशिंगटन पोस्ट में हैरी स्टीवंस द्वारा प्रकाशित मूल सिमुलेशन पर आधारित है। टीआईएफआर द्वारा शुरू की गई इस सार्वजनिक आउटरीच पहल को 'चाय ऐंड व्हाई?' नाम दिया गया है। यह एक ऐसा मंच है, जहां वैज्ञानिक सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के साथ संवाद करते हैं और गलत सूचनाओं की वास्तविकता को स्पष्ट करते हैं। इसके साथ-साथ वे वायरस के पीछे के विज्ञान की व्याख्या भी करते हैं।
टीआईएफआर के वैज्ञानिक प्रोफेसर अर्नब भट्टाचार्य ने बताया कि “फैकल्टी, छात्रों और परिवारों के स्वैच्छिक प्रयासों से हमने नौ भाषाओं - अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली, कोंकणी, मराठी, मलयालम, उड़िया, तमिल और तेलुगू में जागरूकता प्रसार की पहल शुरू की है।” जल्द ही यह प्रचार सामग्री गुजराती, पंजाबी, हरियाणवी और असमिया में भी जारी की जाएगी।
इस पहल को शुरू करने का उद्देश्य सही सूचना को प्रसारित करना और विभिन्न मिथकों को दूर करने में मदद करना है। इसके अंतर्गत सूचनाएं कुछ इस तरह से पेश जाती हैं, जिससे उन्हें आसानी से समझा जा सके। डॉ भट्टाचार्य ने कहा, "यह बीमारी विदेशों से उभरी है, लेकिन हमें अपने नागरिकों को इसके बारे में जागरूक करना है, तो स्थानीय भाषा एवं जरूरतों के मुताबिक संचार सामग्री विकसित विकसित करना महत्वपूर्ण हो सकता है।"
इस पहल के अगले चरण में हमारी टीम घरेलू सामग्री द्वारा मास्क बनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए पोस्टर और वीडियो जल्द ही जारी किए जाएंगे।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और राष्ट्रीय ख़बरें
मास्क पहनने का औचित्य 'दुखद: समाचार एवं श्रद्धासुमन' जेसिका लाल हत्याकांड: जेल में अच्छे व्यवहार के चलते सिद्धार्थ शर्मा उर्फ मनु रिहा मॉनसून ऋतु (जून–सितम्बर) की वर्षा दीर्घावधि औसत के 96 से 104 प्रतिशत होने की संभावना अनलॉक-1 के नाम से देश में 30 जून तक लॉकडाउन 5 लागू, क्या-क्या खुलेगा, किस पर रहेगी पाबंदी आखिर क्यों नहीं पीएमओ पीएम केयर फंड आरटीआई के दायरे में ? कितनी गहरी हैं सनातन संस्कृति की जड़ें कोरोना से युद्ध में रणनीति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव सीआईपीईटी केंद्रों ने कोरोना से निपटने के लिए सुरक्षात्मक उपकरण के रूप में फेस शील्ड विकसित किया एन.एस.यू.आई. ने छात्रों को एक-बार छूट देकर उत्तीर्ण करने का किया आग्रह