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पंजाब

पलायन कर रहे भूखे प्यासे प्रवासी मजदूरों के लिए छलका दर्द, दिया मानवता का परिचय—लगाया लंगर

May 16, 2020 12:59 PM

डेराबस्सी, पिंकी सैनी:
कोरोना वायरस के खौफ के चलते भूख से परेशान प्रवासी मजूदरों का पलायन का दर्द डेराबस्सी निवासियों ने समझा है। शहर के समाज सेवियों ने बिना किसी राजनीतिक प्लेटफार्म के प्रवासी मजदूरों के लिए जनता लंगर के नाम से 24 घंटे चलने वाली लंगर सेवा शुरु की है। वीरवार दोपहर से शुरु किए गए इस लंगर में अब तक हजारों लोग अपने पेट की भूख मिटा चुके है। लंगर में छोटे बच्चों व महिलाओं के लिए विशेष तौर पर दूध दिया जा रहा है।
जानकारी देते हुए लंगर के आयोजक मुकेश गांधी ने बताया कि पिछले कई दिनों से शहर की सड़कों से प्रवासी मजदूर अपने परिवारों, जिनमें महिलाएं, बजुर्ग व बच्चों के साथ पैदल भूखे प्यासे अपने घरों को जा रहे थे। जिनके खाने पीने व रहने के लिए प्रशासन व सरकार की ओर से कोई प्रबंध नही किया गया। जिसको देखते हुए शहरवासियों ने बिना किसी राजनीतिक पार्टीबाजी से ऊपर उठ कर गरीब लोगों के लिए लंगर लगाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि इस लंगर में राजू बतरा, मिंटू बतरा, अमित थम्मन, रमनदीप सिंह, कमल सचदेवा हर समय सेवा कर रहे है। जबकि इस कार्य में सेवा भारती के संयोजक अश्वनी जैन, सोनू जैन, सनातन धर्म के सभा के प्रधान सुभाष गुप्ता, विनय गुप्ता, डाक्टर बरखा राम, विमल जैन, अशोक गुप्ता विशेष सहयोग दें रहें है। उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों का प्लायन जारी रहेगा तब तक यह लंगर सेवा जारी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि रोजाना इस लंगर में हजारों लोग लंगर खा रहे है।
दर्द सुन कर छलके शहरवासियों के आंसू:
लंगर दौरान प्रवासी मजदूरों का दर्द सुनकर शहरवासियों की आंखें नम हो रही है। इस दौरान एक महिला ने बताया कि वह अपने दो छोटे बच्चों के साथ पिछले पांच दिन से स्थानीय सरकारी स्कूल में आ रही है जहां वह पानी के सहारे समय निकाल रहें है। लेकिन उनको खाने को कुछ नही मिला। इस दौरान एक म‌हिला अपने दो साल के बीमार बच्चे को लेकर जब दर्द बताया तो शहरवासियों के आंसू थमने का नाम नही लिया। बच्चे को स्थानीय डाक्टर से दवाई दिलवाई गई। इसके अलावा प्रवासी मजदूरों ने बताया कि हालत ‌इतने बुरे है कि उनको पीने के लिए पानी भी नही मिल रहा। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद उनके घरों तक जाने का कोई प्रबंध नही किया जा रहा है।
घर जाकर मरना चाहते है हम:
प्लायन कर रहें मजदूरों से जब बातचीत की कि अब राज्य में स्थिति समान्य होने लगी है तो वह घर क्यों जा रहें है। तो प्रवासी मजदूरों ने बताया कि इस महांमारी के दौर में वह अपने घर जाकर मरना चाहते है। उन्होंने कहा कि वहां उनके माता पिता व बच्चे अकेले है जिनसे अब वह दूर नही रह सकते। उन्होंने बताया कि उनके परिजन उनको रोजाना घर आने के लिए कह रहें है। उन्होंने कहा कि अब वह अपने घरों में रुखी सुखी खा लेंगे लेकिन यहां नहीं रह सकते। जिसको देख कर लगता है कि प्रवासियों में जहां डर बैठ गया है। वहीं रोटी का इंतजाम न होने के कारण वह अपने घरों को लौट रहें है।

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