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पंजाब

पंजाब में आपातकालीन चिकित्सा ई-पास एक भ्रम: क्या कोई कार्रवाई करेगा?

May 26, 2020 10:58 AM

चंडीगढ/बंठिडा, फेस2न्यूज:
सरकार लॉकडाउन अवधि के दौरान विभिन्न श्रेणियों के लोगों को ऑनलाइन ई-पास जारी करने का आश्वासन देती है, जिसमें ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें आपातकालीन चिकित्सा के लिए रोगी को छोटे कस्बों व गांवों से यात्रा करके इलाज के लिए बड़े शहरों के हस्पताल में जाना पड़ता है। लोग उम्मीद रखते हैं कि मरीज को अपूरणीय क्षति से पहले, प्राथमिकता के आधार पर, तुरंत, ऑनलाइन आवेदन के पश्चात जल्दी ई-पास मिलता होगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि पंजाब सरकार द्वारा मीडिया में विज्ञापन अथवा समाज में प्रचारित ऐसे दावे झूठे हैं क्योंकि आपातकालीन चिकित्सा केसों की तरफ ध्यान देते हुए तुरंत ऑनलाइन ई-पास भेजने में सरकार पूरी तरह विफल है।
ऐसे ही मामलों में एक मामला है जिला बठिंडा का, जहां 14 मई की शाम को बीमारियों से पीड़ित एक मरीज ने आपातकालीन चिकित्सा के लिए ई-पास के लिए आवेदन किया था ताकि वह अगले दिन सुबह मानसा के किसी हस्पताल से आपातकालीन चिकित्सा करवा सके। मरीज का पिछले 6-7 वर्षों से चंडीगढ़ के सरकारी मल्टी स्पेशलिटी हस्पताल से इलाज चला हुआ है। सरकार ने दो दिनों तक कोई जवाब नहीं दिया। जब किसी प्रभावशाली व्यक्ति के उपयुक्त "लिंक" का उपयोग किया गया, ताकि मरीज को बचाया जा सके, तो बड़ी मुश्किल से ऑनलाइन पास आया। तीन-दिन की वैधता वाला यह ई-पास तब जारी हुआ जब उसकी वैधता के दो दिन निकल चुके थे।
तत्काल चिकित्सा की जरूरत वाले बीमार लोगों के प्रति नौकरशाहों की चिंता का अभाव, उदासीनता और अक्षमता इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि इस देश या कम से कम पंजाब में बहुत लोग ऐसे हो सकते हैं जो सरकार द्वारा समय पर ई-पास जारी न करने की वजह से भी भयानक बीमारी का शिकार या मृत्यु को प्राप्त हुए होंगे, केवल कोरोना वायरस के कारण नहीं।
लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों और परिणामस्वरूप होने वाली मौतों से संबंधित आंकड़े नियमित रूप से समाचारों में दर्ज किए जाते हैं, लेकिन किसी को भी परवाह नहीं है कि वर्तमान संकट के समय में शीर्ष पर बैठे व्यक्तियों के गैर जिम्मेवार रवैये से कितने लोग मौत के मुंह में गए होंगे।

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