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हिमाचल प्रदेश

खामोशियों को चिल्लाने दो, शब्दों में उतर जाने दो

May 28, 2020 06:08 AM

— शिखा शर्मा
वृद्ध मां- बाप की लाठी उनका पुत्र होता है। अगर लाठी कोने में अकड़ कर खड़ी रहे तो लड़खड़ाते पांवों और कांपते हाथों को सहारा कौन देगा? जीवनभर जिस पुत्र की छोटी- छोटी इच्छाओं को उन्होंने सर आंखों पर रखकर पूरा किया। वहीं मां- बाप पुत्रहित के लिए कुछ बोल दें तो उनको बूढ़ा होने और नासमझ होने के ताने सुनने को मिल जाते हैं। शायद! यही दिन देखने के लिए मां- बाप बुजुर्ग होते हैं। हालांकि ये बातें आम सुनने को मिल जाती हैं लेकिन कोरोना काल में लंबे समय से चल रहे लॉक डाउन में बुजुर्गों की दशा ज्यादा आहत है। कोरॉना महामारी काल बनकर सबके सिर पर तांडव कर रही है फिर भी अकड़ सातवें आसमान पर है। अगर इस वक़्त भी इंसानियत नहीं जागी तो ऐसे पुत्रों का इंसान होना पाप है।

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