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पंजाब

किसानों को मुफ़्त बिजली मिलती रहेगी: कैप्टन

May 31, 2020 11:47 AM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब के किसानों को उपलब्ध करवाई जा रही मुफ़्त बिजली की सुविधा वापिस लेने के दोषों को रद्द करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की तरफ से पेश किये वित्तीय घाटे के वृद्धि के हिस्से को छोडऩे के लिए तैयार है परन्तु किसी भी कीमत पर किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी।
केंद्र की तरफ से मुफ़्त बिजली के विकल्प के तौर पर किसानों को डी.बी.टी. के द्वारा फ़ायदा देने के सुझाव को सिरे से ख़ारिज करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इसको वह बिल्कुल भी नहीं सहेंगे और यह सीधे तौर पर देश के संघीय ढांचे पर हमला है। उन्होंने कहा कि वह यह मामला केंद्र के पास उठाएंगे कि कोविड महामारी के चलते वित्तीय सहायता बढ़ाने की आड़ में वित्तीय घाटा बरदाश्त कर रहे राज्यों में किसान विरोधी शर्त लागू नहीं कर सकते।    

किसान विरोधी कदम उठाने के लिए केंद्र पर बरसते हुये मुख्यमंत्री ने सुखबीर और हरसिमरत को पंजाब के हितों के लिए एन.डी.ए. छोडऩे के लिए कहा


कैप्टन ने कहा कि जब तक उनकी सरकार सत्ता में है, किसानों को मुफ़्त बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए कर्ज लेगी और भारत सरकार राज्य सरकार पर अधिकारित कर्ज लेने के लिए शर्तें थोप नहीं सकती।
अमरिन्दर सिंह ने अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल पर बरसते हुये कहा कि वह केंद्र सरकार के दुष्कर्मों का दोष राज्य सरकार पर न मढ़ें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मार्च 2017 में सत्ता में आने के बाद किसानों को निर्विघ्न मुफ़्त बिजली की सुविधा दे रही है, चाहे अकाली-भाजपा के 10 साल के कुशासन के चलते राज्य बुरी तरह वित्तीय संकटों में घिरा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से राज्यों को मुफ़्त बिजली वापिस लेने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं जबकि कोविड और लॉकडाऊन में राज्य और यहाँ के लोगों को किसी भी तरह की राहत देने में केंद्र सरकार फैल साबित हुई है। उन्होंने सुखबीर को कहा कि केंद्र में वह हिस्सेदार होने के नाते पहला वह अकाली दल का एन.डी.ए. से नाता तोड़ेें। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और अकाली नेता हरिसमरत कौर बादल के केंद्रीय कैबिनेट में से इस्तीफे की भी माँग की।
अकालियों की तरफ से लगाऐ गए दोषों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुये कैप्टन ने केंद्र या संसद में किसानों समेत पंजाब और यहाँ के लोगों के हकों के लिए आवाज़ न उठाने पर अकाली लीडरशिप की सख्त आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब के भले की बात करने के समय पर अकाली चुप्पी नहीं तोड़ते जबकि राष्ट्रीय सरोकार के गंभीर मुद्दों पर भी घटिया और शर्मनाक राजनीति खेलने से बाज़ नहीं आते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और उसकी हिस्सेदार अकाली दल यह स्पष्ट करें कि पंजाब पर ऐसी शर्त थोप कर दबाव डालने की कोशिश क्यों की गई।

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