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राष्ट्रीय

'दुखद: समाचार एवं श्रद्धासुमन'

June 05, 2020 10:58 AM

हिसार के टॉवर इनक्लेव निवासी श्री प्रेम सागर जी मित्तल 3 जून 2020 को अपनी संसारिक यात्रा पूर्ण कर ईश्वर के चरणों में विराजमान हो गए। कोरोना महामारी व लॉकडाउन के चलते बाहर रहने वाले उनके बहुत से नजदीकी उनके अंतिम दर्शनों के लिए अंतिम यात्रा में सम्मलित होने से वंचित रहे। 3 जून को हिसार के श्मशान घाट में उनका दाह संस्कार कर दिया गया। अपने नाम के अनुरूप 75 वर्षों तक सभी बड़े—छोटों को प्रेम बांटते रहे और अंतिम दिनों में अस्वस्थता के चलते इस दुनियां से विदा ले गए।
श्री जगन्ननाथ जी मित्तल तथा श्रीमती नन्हीं बाई के घर में 5 मई 1945 को प्रथम पुष्प रत्न हरियाणा के हांसी में खिला, जिसका नाम परिजनों ने प्रेम सागर रखा। और इस नश्वर संसार में वे प्रेम का सागर बनकर ही रहे। चार भाईयों व दो बहनों में सबसे बड़े थे प्रेम सागर जी। जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही उनका विवाह कैमरी हरियाणा निवासी पूजनीय श्री भगवत प्रशाद जी जिन्दल एवं श्रीमती कमला देवी की सुपुत्री श्रीमति दर्शना देवी के साथ सम्पन्न हुआ। जिनसे उनकी 4 संताने हुई। उन्हीं में से सबसे बड़ी संतान के जरिये उनसे जुड़ने व उन्हें पिता कहने का मुझे भी सौभाग्य मिला। काल की क्रूर गति ने उनके जीवत रहते ही बड़ी बेटी को समय से पूर्व छीन लिया। प्रेम सागर जी अपने पीछे पत्नी, बेटे—बहुएं, बेटी, दामाद व पोते—पोतियां, नाती—नातिन आदि भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। हम सब अति दु:खी हृदय से उन्हें याद करते हुए परमपिता परमात्मा से इस बिछुड़ी महान आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना करते हुए उनके मोक्ष की कामना करते हैं।
आशीष देने वाला एक और
हाथ सिर से उठ गया
खामोश सा हंसता हुआ वो
चेहरा सदा के लिए खो गया
सलामती की दुआएं देने वाला वो
शख्स आंखों से ओझल हो गया
पल-पल नसीहतें देने वाला
मौन की चादर औढ़ के सो गया
यथार्थ के प्रहार को कर आत्मसात वो
चुपचाप बिन डांट-डपट किए निकल गया
जब भी मिलते प्रभात सा दमकता वो
निशा के आवरण में चुपचाप बिखर गया
जिनके मिलने से एक अनाथ
बच्चा जो सनाथ हुआ था वो
आज फिर से अनाथ हो गया
दिल, मन तो है बोझिल
संतुष्टि इतनी सी कि
आत्मा परमात्मा में
जा के मिल गया।

संसार में व्यापक महामारी के कारण उनकी अंतिम रस्म—क्रिया में भी घर पर मौजूद परिजन ही शामिल होंगे। अत: प्रेमी सज्जनों, बन्धु—बांधवों से आग्रह है अपने स्थान से ही हमारे पूजनीय व आदरणीय की आत्मा की सद्गति लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।
हृदय की गहराईयों से नमन
— रोशन लाल गोयल
बंगलुरू

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