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राष्ट्रीय

क्या करें अगर आपके खिलाफ कोई झूठी शिकायत दर्ज की गई है

July 11, 2020 02:30 PM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:

किसी रंजिशवश या खुनस निकालने के लिए किन्हीं सिरफिरों द्वारा आपके विरूद्ध झूठी शिकायत पुलिस में दर्ज करवा दी जाती है। जिसका सच से दूर—दूर का वास्ता नहीं होता। जो सिर्फ आपको परेशान करने, आपका वक्त और पैसा बरबाद करने तथा मानसिक परेशानी के लिए की जाती है। जिसके चलते परेशानी से बचने के लिए कई बार कुछ भ्रष्टाचारी लोगों द्वारा अर्थ की मांग भी की जाती है। आपको फसाने का डरावा दिया जाता है। तो आप कैसे अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं, पढिए—

१. सबसे पहले झूठी शिकायत देने के लिए शिकायतकर्ता के खिलाफ आप भी एक काउंटर शिकायत सम्बंधित या नजदीकी पुलिस स्टेशन में दें या उनके उच्चाधिकारी को दें। याद रखें शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी सबूत को साथ देने की जरूरत नहीं होती। ये जांच अधिकारी की जिम्मेवारी होती है कि वो शिकायत की जांच करे, गलत पाये जाने पर शिकायत बंद कर दे या फिर सही पाये जाने पर सम्बंधित धारा के तहत केस दर्ज करे।
२. झूठी शिकायतकर्ता के खिलाफ एक प्राईवेट शिकायत इलाके के मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा १९० (ए) के तहत भी दी जा सकती है। जो आपकी शिकायत पर धारा २०० के तहत कारर्वाई करेंगे।
३. सी आर पी सी की धारा १५६(३) के तहत मजिस्ट्रेट को शिकायत देकर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने वास्ते भी निवेदन किया जा सकता है।
४. अगर उपरोक्त झूठी शिकायत कोर्ट में जाती है तो आप कोर्ट से "नोटिस ऑफ़ एक्वाजेशन" की मांग कर उस झूठी शिकायत को कांटेस्ट करने की इच्छा जताएं। जैसे ही आप कॉन्टेस्ट की मांग रखेंगे तो अगली पार्टी को एक निश्चित समय सीमा के भीतर आपके खिलाफ सबूत एवं गवाह पेश करने होंगे। उस सबूत एवं गवाह को आप कोर्ट में क्रॉस परीक्षण कर सकते है एवं अपने पक्ष को रखते हुए केस की सच्चाई कोर्ट के सामने ला सकते है।
५. झूठे शिकायतकर्ता को यूँ ही ना छोड़े। विभिन्न धाराओं के तहत उनके ऊपर भी केस दर्ज कराने कि प्रक्रिया शुरू करे। अपने साथ हुए ज्यादती एवं मानसिक परेशानी व मानहानि का मुआवजा मांगे। याद रखे कि झूठे शिकायतकर्ता क़ानून का मालिक नहीं है बल्कि वो तो क़ानून की कमियों का फायदा उठानेवाला मेनुपुलेटर है।

विभिन्न धाराओं के तहत जैसे भारतीय दंड संहिता की धारा 182 एवं 206 के तहत शिकायत दर्ज कराने के अलावा जिस कोर्ट से आपके खिलाफ दर्ज को गई प्राथमिकी को रद्द की गई है उसी कोर्ट मे उस गलत शिकायतकर्ता के खिलाफ धारा 340 के तहत आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है ।
हमारे देश में क़ानून का सबसे बड़ा मालिक हमारे देश की संसद है और सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय उस क़ानून का संरक्षक। इन संविधानिक कोर्ट को किसी भी तरह के झूठी शिकायत या केस को ख़ारिज कर झूठी शिकायतकर्ता को समुचित दंड देने का पर्याप्त अधिकार है।

सी आर पी सी की धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय मे भी परिवाद दायर करके अपने खिलाफ दर्ज उस गलत प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की जा सकती है ।
याद रखे लड़ाई आपको ही लड़नी है और निर्भीक रूप से आपको आगे बढ़ना है, तभी इस तरह के झूठे शिकायतकर्ता को एक कड़ा सन्देश जाएगा जो कि एक तरह से जरूरी भी है।

 
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