चंडीगढ़। राज्यसभा सांसद डॉ विक्रमजीत सिंह साहनी ने पंजाब सरकार द्वारा एक बार फिर लगभग ₹2,500 करोड़ का बाजार से ऋण लेने पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जबकि राज्य का कुल कर्ज चिंताजनक रूप से ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। डॉ. साहनी ने कहा कि लगातार कर्ज लेने के बावजूद लगभग 7 लाख सरकारी कर्मचारी एवं पेंशनभोगी अब भी लगभग ₹15,000 करोड़ के लंबित महंगाई भत्ता (डीए) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दे चुका है। डॉ. साहनी ने आगे कहा कि पंजाब के 136 सहायता प्राप्त कॉलेजों, जिनमें कई प्रतिष्ठित शताब्दी पुराने संस्थान भी शामिल हैं, को जनवरी 2026 से अब तक ग्रांट-इन-एड जारी नहीं की गई है, जिसके कारण हजारों शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। डॉ. साहनी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बढ़ते कर्ज के बावजूद लाखों कर्मचारी, पेंशनभोगी, शिक्षक एवं सहायता प्राप्त संस्थान अब भी अपने वैध बकायों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पंजाब सरकार को तुरंत लंबित डीए एवं ग्रांट-इन-एड वेतन राशि जारी करनी चाहिए तथा आवश्यक सार्वजनिक दायित्वों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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चंडीगढ़। राज्यसभा सांसद डॉ विक्रमजीत सिंह साहनी ने पंजाब सरकार द्वारा एक बार फिर लगभग ₹2,500 करोड़ का बाजार से ऋण लेने पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जबकि राज्य का कुल कर्ज चिंताजनक रूप से ₹5 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। डॉ. साहनी ने कहा कि लगातार कर्ज लेने के बावजूद लगभग 7 लाख सरकारी कर्मचारी एवं पेंशनभोगी अब भी लगभग ₹15,000 करोड़ के लंबित महंगाई भत्ता (डीए) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दे चुका है। डॉ. साहनी ने आगे कहा कि पंजाब के 136 सहायता प्राप्त कॉलेजों, जिनमें कई प्रतिष्ठित शताब्दी पुराने संस्थान भी शामिल हैं, को जनवरी 2026 से अब तक ग्रांट-इन-एड जारी नहीं की गई है, जिसके कारण हजारों शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। डॉ. साहनी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बढ़ते कर्ज के बावजूद लाखों कर्मचारी, पेंशनभोगी, शिक्षक एवं सहायता प्राप्त संस्थान अब भी अपने वैध बकायों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पंजाब सरकार को तुरंत लंबित डीए एवं ग्रांट-इन-एड वेतन राशि जारी करनी चाहिए तथा आवश्यक सार्वजनिक दायित्वों को प्राथमिकता देनी चाहिए।