Monday, 13 July 2026
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स्कूलों में पारदर्शिता लाने के लिए मोदी सरकार के ‘मास्टरस्ट्रोक’ से स्कूल संचालकों में बेचैनी

नए दिशानिर्देशों से स्कूल मैनेजमेंट कमेटियां महज निगरानी करने वाली संस्थाओं से ऊपर उठकर एक वास्तविक विद्यालय समुदाय संचालन संस्था बन जाएंगी, समिति का अध्यक्ष अभिभावक ही बनेगा जबकि समिति के सचिव स्कूल के प्राचार्य होंगे, स्कूलों का बैंक खाता हेड मास्टर और अभिभावक प्रतिनिधि के संयुक्त हस्ताक्षर से चलेगा, निसा के अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने जताया कड़ा ऐतराज जबकि आईएसए के अध्यक्ष एचएस मामिक ने कहा कि निजी स्कूल इसके दायरे में नहीं आते

चण्डीगढ़ : सरकारी और निजी स्कूलों में वर्षों से अभिभावकों की भागीदारी केवल रिकार्ड और बैठकों तक सीमित रहने के आरोप लगते रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ बैठक के आधार पर तैयार पहली स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की नई गाइडलाइंस पिछले बुधवार को जारी कर दी है जिसके मुताबिक देशभर के निजी एवं सरकारी स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी अब अभिभावक संभालेंगे। नए दिशानिर्देशों से स्कूल मैनेजमेंट कमेटियां महज निगरानी करने वाली संस्थाओं से ऊपर उठकर एक वास्तविक विद्यालय समुदाय संचालन संस्था बन जाएंगी। अब स्कूल मैनेजमेंट में 75% सदस्य बच्चों के अभिभावक व संरक्षक होंगे। समिति का अध्यक्ष भी अभिभावक ही बनेगा जबकि समिति के सचिव स्कूल के प्राचार्य होंगे।

स्कूलों का बैंक खाता हेडमास्टर और अभिभावक प्रतिनिधि के संयुक्त हस्ताक्षर से चलेगा। इसका मकसद स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, परीक्षा का तनाव कम करना, ड्रॉपआउट में लाने, शिक्षा व पोषण में सुधार, 12वीं कक्षा में सौ फीसदी एनरोलमेंट पर फोकस करना है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक एसएमसी से स्कूलों का बुनियादी ढांचा सुधरेगा। अभी तक स्कूल के प्रिंसिपल स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का संचालन करते थे। केंद्र और राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठकों के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत समग्र शिक्षा अभियान 3.0 में पॉलिसी रिफॉर्म के तहत एसएमसी में संशोधन किया गया है।

इसमें अभिभावकों के साथ-साथ आम लोग भी शामिल होंगे। स्कूलों खासकर सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों के वेतन आदि की जिम्मेदारी तो सरकार की रहेगी, लेकिन स्कूलों के बेहतर संचालन का जिम्मा अभिभावकों को सौंपा जाएगा। इसमें स्थानीय लोगों व प्रतिनिधि भी जुड़ेंगे। यह पढ़ाई, खेलकूद, कौशल, फीस और शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी सुझाव देगी।

स्कूलों की स्वायत्तता को खतरे में नहीं पड़ने देंगे, कानूनी सलाह लेंगे : डॉ. कुलभूषण शर्मा, अध्यक्ष, निसा

स्कूलों में पारदर्शिता लाने के लिए मोदी सरकार के इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ से स्कूल संचालकों में बैचनी का माहौल हैं। नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्ज अलायन्स (निसा) के अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने एसएमसी की नई गाइडलाइंस पर ऐतराज जताते हुए इसे स्कूलों की स्वायत्तता व निजता पर प्रहार बताया व कहा कि वे स्कूल संचालकों के साथ बैठक करके इस पर विचार विमर्श करेंगे व कानूनी सलाह भी लेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था के साथ जुड़े स्कूल स्व-पोषित हैं व बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में अग्रणी भूमिका अदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालन में बेहद मेहनत व पैसा लगता है, परन्तु सरकार इस प्रकार घुसपैठ करके स्कूल संचालकों पर अत्याचार करने पर तुली है और ऐसा होने से सारी शिक्षा प्रणाली अस्त-व्यस्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो निसा सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।

उधर इंडिपेंडेंट स्कूल्ज एसोसिएशन (आईएसए) के अध्यक्ष एचएस मामिक से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आरटीई पर सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के मुताबिक निजी स्कूल इसके दायरे में नहीं आते।

स्कूल प्रबंधन समिति का ऐसा होगा स्वरूप: स्कूलों में बच्चों की संख्या के आधार पर तय होगा। यदि किसी स्कूल में सौ बच्चे है, तो वहां समिति 12 से 15 सदस्यीय होगी। वहीं यदि बच्चों की संख्या पांच सौ से अधिक होगी तो समिति के सदस्यों की कुल संख्या 20 से 25 सदस्यीय होगी। इस समिति के अध्यक्ष वहीं अभिभावक होंगे, जिनके बच्चे उस स्कूल में पढ़ते है। वहीं समिति की कुल सदस्य संख्या के 75 प्रतिशत अभिभावक होंगे, जबकि समिति के बाकी 25 प्रतिशत सदस्यों में एक तिहाई सदस्य स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचित सदस्य होंगे, जबकि एक तिहाई सदस्य विद्यालय के शिक्षक, बाकी एक तिहाई में स्थानीय शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, नर्स, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आदि रहेगी।

नई गाइडलाइंस की मुख्य बातें: 75% भागीदारी: एसएमसी में 75 प्रतिशत सदस्य उसी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक या संरक्षक होंगे।

अध्यक्ष का चुनाव: समिति का अध्यक्ष अभिभावकों में से ही चुना जाएगा।
समिति की संरचना: 25% सदस्यों में स्थानीय प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद, नर्स और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शामिल होंगे।
संयुक्त हस्ताक्षर: स्कूल का बैंक खाता अब हेडमास्टर और एक अभिभावक प्रतिनिधि के संयुक्त हस्ताक्षर से चलेगा।
महिला प्रतिनिधित्व: 50 प्रतिशत महिला सदस्यों की भागीदारी अनिवार्य है।
कार्यकाल: समिति का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।