महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के संदेश ‘कथा को सुना नहीं, पिया जाता है’ का पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने किया स्मरण
चंडीगढ़: सेक्टर-34 के मेला ग्राउंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पाँचवें दिन विजयदशमी के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। ‘जय वृंदावन बिहारी लाल की’ के जयकारों से गूंजते पंडाल में कथा व्यास पूज्य श्री इंद्रेश महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं, बाल गोपाल और लाली (श्री राधा रानी) के अलौकिक मिलन तथा दधि उत्सव के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और प्रभु भक्ति में लीन नजर आए। पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने सभी श्रद्धालुओं एवं शहरवासियों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मनीष बजाज जी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन संदीप चुग ने किया।
बाल गोपाल और लाली के दिव्य मिलन का भावपूर्ण प्रसंग
विजयदशमी के विशेष महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विजयदशमी के दिन बाल कृष्ण अपने माथे पर तिलक लगाकर घोड़े की सवारी करते हुए अपनी लाली अर्थात किशोरी जी, श्री राधा रानी से मिलने अटारी पर जाते हैं। महाराज जी ने बताया कि जब ठाकुर जी की आयु मात्र तीन से चार वर्ष की थी, तब विजयदशमी के पावन अवसर पर ठाकुर जी और किशोरी जी का प्रथम अलौकिक मिलन हुआ था। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल राधे-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
भक्ति और उल्लास के बीच मनाया गया दधि उत्सव
कथा के पाँचवें दिन दधि उत्सव बड़े हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े इस उत्सव के दौरान श्रद्धालु भजनों की मधुर धुनों पर झूमते नजर आए। पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया और श्रद्धालुओं ने भक्ति, प्रेम तथा आनंद के इस उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महामंत्र में श्रीकृष्ण और श्रीराम के नाम का आध्यात्मिक रहस्य
पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने 16 नामों वाले महामंत्र ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे’ की महिमा समझाते हुए बताया कि इसमें लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण का नाम पहले और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम बाद में क्यों आता है।
उन्होंने समझाया कि भगवान के नाम का स्मरण मनुष्य के जीवन में पवित्रता और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। कलियुग में मनुष्य की सीमाओं और अपूर्णताओं को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण के नाम को पहले स्थान दिया गया है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति सहज भाव से प्रभु के नाम का आश्रय लेकर भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ सके।
विजयदशमी: अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक
विजयदशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने भगवान श्रीराम की विजय का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है। भगवान श्रीराम की विजय का स्मरण करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सत्य, मर्यादा, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज का संदेश: “कथा को सुना नहीं, पिया जाता है”
संतों के विचारों का उल्लेख करते हुए पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने कथा श्रवण की वास्तविक भावना को समझाया। जूना पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के वचनों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा, “कथा को सुना नहीं जाता, कथा को पिया जाता है।” उन्होंने बताया कि सामान्य बातें सुनने के लिए होती हैं, लेकिन भगवद् कथा आत्मा के आध्यात्मिक रसपान का माध्यम है। कथा के संदेश को हृदय में उतारकर जीवन में अपनाना ही सच्ची भक्ति है।
गौ माता की सेवा और सम्मान के लिए आगे आने की अपील
पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने गौ माता की रक्षा, सेवा और सम्मान के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से गौ माता के संरक्षण के प्रति जागरूक होने और इस पुनीत कार्य में अपनी भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रत्यक्ष रूप से गौ सेवा करने में सक्षम नहीं हैं, वे ‘गौ सम्मान अभियान’ से जुड़कर भी योगदान दे सकते हैं।
महाराज जी ने जानकारी दी कि आगामी 17 दिसंबर को पंजाब और हरियाणा में गौ सम्मान अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने और जनजागरण में सहयोग देने का आह्वान किया।