Thursday, 22 October 2026
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DELHI POLICE NOT GRANTED PERMISSION TO DILJIT DOSANJH CONCERT DUE TO THREATS श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर इंद्रेश महाराज का संदेश: विरह और प्रतीक्षा ही प्रेम का सच्चा स्वरूप 64TH DEDICATION DAY OF BHAKRA DAM CELEBRATED WITH REVERENCE & ENTHUSIASM VIGILANCE BUREAU NABS PRIVATE ASSISTANT OF PATWARI RED HANDED ACCEPTING BRIBE OF RS 30 THOUSANDS CHANDIGARH BUSINESS COUNCIL SEEKS RESOLUTION OF BUSINESS ISSUES FROM ADMINISTRATOR 10 FARMERS BOOKED FOR STUBBLE BURNING IN FEROZEPUR; 23 INCIDENTS REPORTED TILL OCTOBER 21 वाल्मीकि समाज ने अबोहर में निकाला रोष मार्च, सीएम का पुतला फूंका PILLAR TO POST FIGHT TO GET SUSPECTED DRUG ADDICTS SUCCEEDS AFTER DGP INTERVENES ABOHAR MUNICIPAL CORPORATION PARK BECOMES A HAVEN FOR STRAY ANIMALS VALMIKI COMMUNITY STAGES PROTEST MARCH IN ABOHAR; BURNS EFFIGY OF CHIEF MINISTER
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श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर इंद्रेश महाराज का संदेश: विरह और प्रतीक्षा ही प्रेम का सच्चा स्वरूप

महामंडलेश्वर श्री कपिलपुरी स्वामी जी और चंडीगढ़ के डीसी निशांत कुमार यादव ने कथा में पहुंचकर लिया आशीर्वाद; बी प्राक ने श्रद्धालुओं और आयोजकों का जताया आभार

चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित मेला ग्राउंड में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा एवं गीता वृंदावन प्रकट उत्सव के सातवें और अंतिम दिन भक्तिमय वातावरण में कथा का विश्राम हुआ। इस अवसर पर ‘कृष्ण गोविंद गोविंद गोपाल नंदलाल’ के मधुर भजनों से पूरा पंडाल गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर होकर झूम उठे। कथा के विश्राम दिवस पर महामंडलेश्वर श्री कपिलपुरी स्वामी जी तथा चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) श्री निशांत कुमार यादव (IAS) विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कथा श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 विरह ही प्रेम को बनाता है प्रगाढ़: इंद्रेश महाराज

कथा के अंतिम दिन पूज्य इंद्रेश महाराज जी ने विरह, प्रतीक्षा और प्रेम के आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि कथा का विश्राम भी आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि कथा निरंतर चलती रहे, तो मन में उसकी महत्ता को लेकर सहजता और लापरवाही का भाव आ सकता है। इसलिए विराम आवश्यक है, क्योंकि विरह और प्रतीक्षा ही प्रेम की गहराई का एहसास कराते हैं।

महाराज जी ने कहा कि विरह कभी प्रेम को कम नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। उन्होंने मीराबाई का उदाहरण देते हुए समझाया कि उनके हृदय में प्रभु के प्रति अगाध प्रेम और विरह की भावना ही उनकी भक्ति की सबसे बड़ी शक्ति थी। विरह के कारण ही भक्त के मन में प्रभु से मिलने की तीव्र इच्छा जागृत होती है।

श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण वृंदावन से विदा हुए, तो उनके विरह में गोपियां व्याकुल हो उठीं। यही विरह उनके प्रेम को और गहरा करता गया। भक्त की इसी तड़प और प्रेम के कारण ठाकुर जी अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। किसी को यमुना तट पर, किसी को वृंदावन की गलियों में, तो किसी को माखन चुराते और गाय चराते हुए श्रीकृष्ण के दर्शन होते हैं।

चिंता को प्रभु के चिंतन में बदलना ही भक्ति

जीवन के विभिन्न भावों पर प्रकाश डालते हुए इंद्रेश महाराज जी ने कहा कि मनुष्य जीवन में सुख-दुख, खुशी, प्रेम, चिंता और पीड़ा का अनुभव होना स्वाभाविक है। इन भावनाओं से गुजरना ही जीवन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चिंता और चिंतन के बीच बहुत कम अंतर है। यदि मनुष्य अपनी चिंता को प्रभु के चिंतन में बदल दे, तो वही चिंता उसे ईश्वर के और करीब ले जा सकती है।

महाराज जी ने कहा कि भक्त के जीवन में नाम जप, सेवा, भक्ति और गुरुजनों का संग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा का अपना विशेष महत्व है। प्रेम और सेवा के साथ धैर्य तथा प्रतीक्षा का भाव भी आवश्यक है। जब भक्त के हृदय में प्रभु से मिलने की सच्ची तड़प होती है, तभी उसकी भक्ति एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति बन जाती है।

उन्होंने कहा कि कथा का विश्राम भक्तों के लिए अंत नहीं, बल्कि अगली आध्यात्मिक यात्रा की प्रतीक्षा का आरंभ है। विरह और प्रतीक्षा भक्त के हृदय में प्रभु के प्रति प्रेम को निरंतर जीवंत बनाए रखते हैं।

बी प्राक ने श्रद्धालुओं और सहयोगियों का जताया आभार

कार्यक्रम के समापन पर आयोजक एवं प्रसिद्ध गायक बी प्राक ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि जैसे-जैसे श्रीमद् भागवत कथा का प्रत्येक दिन आगे बढ़ता है, उनके मन में एक भावुकता और उदासी का भाव गहराने लगता है। उन्होंने कहा कि विश्राम दिवस पर वे स्वयं को बेहद भावुक महसूस करते हैं, क्योंकि इस आयोजन से जुड़ी भक्ति और श्रद्धा उनके हृदय के बहुत करीब है।

बी प्राक ने पूरी ट्राईसिटी के लोगों को दंडवत प्रणाम करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं, कथा श्रवण करने वालों और भक्तों के सहयोग के बिना इस प्रकार के भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करना संभव नहीं है। उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा और गीता वृंदावन प्रकट उत्सव को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों, कार्यकर्ताओं, सेवाभाव से जुटे लोगों और कथा में पहुंचे समस्त श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।

सात दिनों तक चले इस भक्तिमय आयोजन का विश्राम दिवस भी प्रेम, विरह, प्रतीक्षा और प्रभु के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देकर संपन्न हुआ।

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