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रिसर्च बताते हैं कि कैनोला ऑयल पेट की चर्बी को कम करने एवं मेटाबॉलिक सिंड्रोम में सुधार करने में सहायक

November 23, 2016 08:50 PM

चंडीगढ,। अमेरिका के न्यू ऑर्लीन्स में आयोजित मोटापा सप्ताह, 2016 में एक अनुसंधान के परिणामों की जानकारी दी गई, जिसमें सलाह दी गई कि सफेद सरसों का तेल (कैनोला ऑयल) और उच्च-तैलीय सफेद सरसों का तेल पेट के मोटापे को कम करने में सहायता कर सकता है, जोकि मेटाबॉलिक सिंड्रोम को मज़बूत कर सकता है।[i]भारत[ii] की बड़े शहरों के करीब एक-तिहाई जनसंख्या उपापचय सिंड्रोम से ग्रसित हैं, जोकि मोटापे सहित कई बीमिरयों की जड़ है और यह हृदय संबंधी रोगों, दिल का दौरा तथा मधुमेह जैसे रोगों के खतरे को बढ़ाता है। पेन्न स्टेट यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन के प्रोफेसर, पेन्नी क्रिस-एथर्टन, पीएच. डी., आर. डी. ने अपने अध्ययन में बताया है कि, "इस तरह के परिणामों का कारण मोनोअनसैचुरेटेड फैट या "अच्छा" फैट होता है, जोकि कैनोला या उच्च-तैलीय कैनोला के तेल के अधिकांश हिस्से को बनाता है।" "इस अध्ययन में यह भी बताया गया है कि मोनोअनसैचुरेटेड फैट पेट की चर्बी को कम करने में सहायता करता है और हृदय संबंधी स्वास्थ्य को मज़बूती प्रदान करता है।" तीन केंद्रों कनाडा के मानीटोबा और लावल विश्वविद्यालय एवं अमेरिका के पेन्न स्टेट विश्वविद्यालय ने करीब 101 प्रतिभागियों पर पांच अलग-अलग तेलों, कैनोला तेल, उच्च-तैलीय कैनोला तेल, डीएचए के साथ उच्च-तैलीय कनोला तेल, मक्का और कुसुम का एक मिश्रित तेल और सन एवं कुसुम के बीज के मिश्रित तेल और पेट की चर्बी के प्रभावों के ऊपर अध्ययन किया है। अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों ने प्रत्येक दिन दो बार प्रतिभागियों के दैनिक आहार के एक भाग के रूप में इन तेलों का उपयोग किया। परीक्षण के समय चार सप्ताह तक इन्हें इन तेलों के साथ पांच सामान्य भोजन कराया गया। इस तरह इस दौरान सभी लोगों को चार-चार सप्ताह तक पांचों तेलों के साथ सामान्य भोजन दिया गया और उसकी समीक्षा की गई। परीक्षण में शामिल सभी लोगों में मोटापा आ गया और इसके साथ ही उच्च रक्त चाप, मधुमेह, ट्राईग्लिसराइड्स या "अच्छे" एचडीएल कोलेस्टेरोल की कमी आदि जैसी परेशानियाँ शुरू हो गईं। दो साल के अध्ययन के बाद, अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने कैनोला या उच्च-तैलीय कैनोला तेल का उपयोग अपने खाने में किया था, उनके पेट की चर्बी में पर्याप्त कमी आई है। इसके साथ ही यह पाया गया कि उन लोगों के रक्तचाप में भी कमी आई है। इस अनुसंधान को नवंबर, 2016 के ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित किए जाने वाले पांच अध्ययनों में शामिल किया गया, जोकि नवीन अनुसंधानों के माध्यम से पेट की समस्या के समाधान पर आधारित अनुसंधानों के लिए किया गया था। इस अध्ययन का परिणाम कैनोला ऑयल मल्टिसेंटर इंटरवेंशन ट्रायल (सीओएमआईटी) का एक हिस्सा रहा है और इसे 2013 में न्यू ऑर्लीन्स के अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ईपीआई/एनपीएएम साइंटिफिक सेशन्स में प्रस्तुत भी किया गया था। "इस अध्ययन के अनुसार, जैसा कि मुंबई के एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल के रिहैब मेडिसिन एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. आशीष कॉन्ट्रैक्टर का कहना है कि, "मोनोअनसैचुरेटेड फैट वाले तेल के प्रतिदिन उपयोग ने लोगों के स्वास्थ्य के ऊपर उचित प्रभाव डाला है।" डॉ. आशीष ने "द हर्ट ट्रूथ: एवेरीथिंग यू वांटेड टु नो एबाउट प्रिवेंशन, ट्रीटमेंट एंड रिवर्सल ऑफ़ हार्ट डिसीज़ (नवंबर, 2016) पुस्तक के लेखक भी हैं।" पेट की चर्बी को कम करने से न केवल मेटाबॉलिक सिंड्रोंम का खतरा कम होता है, बल्कि इससे जुड़ी हुई अन्य स्थितियाँ, जैसे, रक्त दाब आदि की समस्या भी कम होती है। कैनोला ऑयल में न केवल अधिकांशतः मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है, बल्कि इसमें सैचुरेटेड फैट और पादप आधारित ओमेगा-3 फैट कम से कम होता है, जोकि दूसरे खाने के तेल में अधिक होता है।" कैनोला ऑयल के स्वास्थ्य संबंधी फायदों की अधिक जानकारी के लिए देखें:www.canolainfo.org 

इस अध्ययन के लिए एग्रिकल्चर एवं एग्रि-फूड कनाडा, कैनोला काउंसिल ऑफ़ कनाडा, डो एग्रोसाइंसेज़, द फ्लैक्स काउंसिल ऑफ़ कनाडा और द नेशनल सेंटर फॉर एड्वान्सिंग ट्रांसलेशनल साइंसेज़ की ओर से धन उपलब्ध कराया गया था। ट्रायल को यहाँ पंजीकृत किया गया www.clinicaltrials.govNCT01351012.

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