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पंजाब

खबर का असर..... छतबीड़ बांध के पास "माइनिंग" मामला, मीडिया रीपोर्ट के बाद अधिकारियों ने किया दौरा, 500 मीटर तक माइनिंग पर है रोक

April 10, 2018 07:10 PM

जीरकपुर, जेएस कलेर                                                                                                              ड्रेनेज ऐंड क्लान विभाग द्वारा 2016 में घग्घर नदी पर बनूड़ क्षेत्र में पानी भेजने के लिए करोडों की लगात से छतबीड़ चिड़ियाघर के समीप घग्गर नदी पर बांध का निर्माण किया गया है, लेकिन आज बांध की सुरक्षा भगवान भरोसे है। बांध को सबसे ज्यादा नुकसान रेत खनन से है। रेत माफिया बांध के आसपास नियमों के विपरीत नदी के पाइप नुमा पुल बना बेखोफ होकर रेत निकाल रहे हैं।

 
 
 
बांध के कर्मचारियों ने बताया कि रात्रि 12 से सुबह 5 बजे के बीच घग्गर के दोनों छोर पर वर्जित भारी मशीनों से रेत निकाली जा रही है। रेत खनन बांध के साथ ही हो रहा है। स्थिति यह है कि बांध के एक किमी के दायरे में ही कई स्थानों से रेत और मिट्टी निकाली जा रही है। इससे बांध की सुरक्षा खतरे में है। वहीं खनन के लिए हैवी मशीनरी का इस्तेमाल वर्जित होने के बावजूद नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पोकलेन मशीने छुपाई गई है जो सूरज ढलते ही दनदनाने लगती है।         मीडिया की ओर से पिछले लंबे समय से छापी जा रही ख़बरों पर संज्ञान लेते हुए आज ड्रेनेज विभाग के जेई निशांत गर्ग ने मौके का दौरा किया उन्होंने मीडिया कर्मियों को बताया कि नियमानुसार बांध (निर्माणस्थल) के समीप 500 मीटर में माइनिंग प्रतिबंधित है, बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन किया जा रहा है। आज अधिकारियों के आने की सूचना होने के कारण कृत्रिम पुल तोड़ दिया गया ताकि अधिकारी मौके तक न पहुच सके। वही अवैध माइनिंग पर रोक लगाने के बजाए खनिज व राजस्व अधिकारी हाथ पर हाथ रखकर बैठे है।

खनन से जमीन हो रही खोखली

बांध के समीप लीज खदानों के अतिरिक्त आसपास भी बड़ी मात्रा में रेत निकाली जा रही है। इससे जमीन खोखली होती जा रही है। यहां बर्बादी के निशान साफ साफ देखे जा सकते हैं।इस ओर बांध रखरखाव विभाग का भी ध्यान नहीं। बांध की सुरक्षा के लिए 2 से 3 गार्ड नियुक्ति किए गए है, लेकिन गार्डो को सूचना पहुचने के लिए कोई विशेष उपकरण नहीं मिला क्योंकि इस क्षेत्र में मोबाइल नैटवर्क न के बराबर है वे इसकी सूचना अगले दिन ही दे पाते है। इस स्थिति में का फायदा उठाते हुए ठेकेदार व माफिया दिन-रात रेत निकालने में जुटे हैं।

गांवों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

घग्घर किनारे हो रहे अवैध उत्खनन से नदी का रूख भी बदलने लगा हैं। इस कारण डेराबसी तहसील के आधा दर्जन गांवों में बरसात के सीजन में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। जानकारी के अनुसार पिछले 10 सालों में बांध स्थल छतबीड़ के अलावा बाकरपुर, भँखरपुर, अमलाला, बोहड़ा, बोहड़ी सहित अन्य गांवों में भी में माइनिंग से बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है। इन गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों के अलावा बांध के कर्मचारियों की शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

खनन पर लगा रखी है रोक

इस क्षेत्र में एशिया का सुप्रसिद्ध छतबीड़ चिड़ियाघर होने के कारण ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा रेत खदानों से माइनिंग पर रोक लगा रखी है। बगैर अनुमति के ही क्षेत्र में लीज पर ली गई खदानों के साथ घग्घर के तटवर्ती क्षेत्रों में रेत का अवैध खनन व परिवहन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिदर सिंह के आदेशों के बाद जिले में कलेक्टर ने निर्देश जारी कर खनिज व राजस्व अमले को रेत खनन रोकने के लिए मैदानी जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद कुछ हद तक माइनिंग पर रोक भी लगी है। लेकिन क्षेत्र में खनिज और राजस्व विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। घग्घर के तटवर्ती क्षेत्र रेत माफियाओं के लिए चारागाह बन गए हैं।

कार्रवाई करेंगे

घग्घर बांध के निकट खनन की शिकायत मिली थी। निरीक्षण के दौरान बांध से 200 या 250 मीटर की दूरी पर रेत निकालने के स्पॉट दिखाई दिए हैं, लेकिन यह पुराने गड्ढे हैं। यदि फिर से खनन हो रहा है, तो कार्रवाई करेंगे। बलजीत सिंह, बी.एल.ओ माइनिंग, डेराबस्सी

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