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पंजाब

पंजाब विधान सभा के विधायकों की कमेटी ने बनूड़ कैनाल प्रोजेक्ट का लिया जायजा

July 06, 2018 09:21 PM

जीरकपुर, जेएस कलेर

 
 
पंजाब विधानसभा के विधायकों की एक कमेटी ने शुक्रवार को छतबीड़ चिड़ियाघर के पीछे बने डैम व बनूड़ कनाल प्रोजेक्ट का जायजा लेने के लिए दौरा किया। पंजाब विधानसभा द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए राजपुरा के विधायक हरदियाल सिंह कंबोज की अध्यक्षता में 11 मैंबरी सर्वदलीय कमेटी का गठन किया गया है जिसमें विधायक अरुन डोगरा दसुआ, विक्रम मजीठिया मजीठा, हरमिंदर सिंह गिल पट्टी, जय कृशन सिंह गढ़शंकर, जोगिंदर पाल बोआ, पिरमल सिंह धौला, लखबीर सिंह लोदिनंगल बटाला, मदनलाल जलालपुर घनोर व चौधरी सुरिंदर सिंह करतारपुर शामिल है आज विक्रम मजीठिया को छोड़ सभी 10 मैंबर राज्य में सिंचाई प्रबंध और मज़बूत एवं बेहतर करने के मकसद से बनाए गए छतबीड़ बांध व बनूड़ कनाल प्रोजेक्ट का जायजा लेने पहुचे हुए थे। यह प्रोजेक्ट 1215 हेक्टयर अतिरिक्त क्षेत्र को पानी की सुविधा देने के लिए 95.50 करोड़ की लागत से बनाया गया है।
हरदियाल सिंह कंबोज ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रौजेक्ट के कार्य जैसे कि गाइड बांधों का निर्माण, बनूड़ नहर का निर्माण, युद्ध स्तर पर चल रहा है और यह समूचे कार्य दिसंबर, 2018 तक पूरे कर दिये जायेंगे। कंबोज ने बताया कि घग्गर दरिया छतबीड़ के समीप बनूड़ नहर में 12 महीने पानी देने के लिए बनाए जा रहे बनूड़ कनाल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य दिसंबर 2018 तक मुकम्मल कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बांध पर 75 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं जब्कि बनूड़ नहर रजबाहों पर करीब 30 करोड़ रूपए खर्च से बनाया गया है। बांध के पूरा होने के बाद बनूड़ नहर में दिसबंर 2018 तक पानी छोड़ कर डेराबसी, बनूड़, राजपुरा व घनोर क्षेत्र के 80 गावों के 40 हजार एकड़ रकबे को सिंचाई सुविधा प्रदान की जा सकेगीं।
उन्होंने बताया कि इस प्रौजेक्ट से कई अन्य लाभ जैसे कि धरती के नीचे पानी के स्तर को नीचे जाने से बचाना, टेलों तक पानी की सप्लाई, सिंचाई योग्य क्षेत्र में वृद्धि और लोगों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध करवाना आदि भी प्राप्त होंगे। उन्होंने अन्य विवरण देते हुये बताया कि यह प्रौजेक्ट कांग्रेस सरकार की बहुमूल्य प्राप्ति है कि उसने अपने कार्यकाल दौरान यह प्रौजेक्ट पूरा किया जा रहा है क्योंकि यह पिछले लंबे समय रूकावट की अवस्था में चल रहा था और क्षेत्र के लोगों को अपने बनते हक अनुसार पानी से वंचित रहना पड़ रहा था।
उन्होंने बताया कि घग्गर दरिया से बनूड़ नहर सिस्टम के अतिरिक्त कोई भी अन्य सिंचाई सिस्टम अस्तित्व में नही है और यह छिमाही सिस्टम भी 100 वर्ष पुराना है। स. कंबोज के अनुसार यह सिस्टम बनूड़ नहर की लंबाई 37 कि.मी है और इसमें से निकलने वाली नौ माईनरों, तीन सब-माइनरों जिनकी कुल अनुमानित लंबाई 44 कि.मी है।

पत्रकारों द्वारा श्री कंबोज को नए तथ्यों से अवगत करवाते हुए बताया गया कि 2006 में जिस मकसद से यह प्रोजेक्ट बनाया गया था उन्हें नहीं लगता कि वह मकसद हासिल हो सकेगा क्योंकि जिस समय इस प्रोजेक्ट का प्लान तैयार क्या गया था उस समय घग्घर दरिया में 400 क्यूसिक पानी आता था लेकिन 2012 में पिंजौर में कौशल्या डैम बनने के बाद जिस जगह डैम बनाया गया है वहाँ पानी की मात्रा घटकर 115 क्यूसिक रह गई है जिसमें स्वच्छ बरसाती पानी की मात्रा केवल 30 प्रतिशत व बाकी का 70 प्रतिशत पानी चंडीगढ़, ज़िरकपुर और डेराबसी क्षेत्र के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों व डेराबसी औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों का कैमिकल युक्त जहरीला व विषैला पानी है।

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