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हरियाणा

हाइकोर्ट ने हरियाणा राज्य फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार अरुण पराशर की नियुक्ति को किया रद्द

August 07, 2019 04:44 PM

चंडीगढ़, सुभाष जिन्दल 

  पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट ने हरियाणा राज्य फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार अरुण पराशर की नियुक्ति को रद्द कर दिया है और निलंबित चेयरमैन केसी गोयल द्वारा लगाई गई याचिका को मंजूर कर लिया गया है। 25 जुलाई 2019 को लिखे आदेशों के अनुसार सेक्शन 26 ऑफ फार्मेसी एक्ट के तहत अरुण पराशर की नियुक्ति टेंपरेरी थी, लेकिन उसके एक्ट की अवहेलना करते हुए उन्हें नियुक्ति 31 मार्च 2020 तक कर दी गई, जोकि बिल्कुल गलत है।

केसी गोयल ने कोर्ट के फैसले का स्वागत कर अरुण पराशर द्वारा अब तक ली गई लाखों रुपये के वेतन को वापिस जमा करवाने एवं उनके द्वारा कौंसिल के उन सदस्यों जोकि कोर्ट के आदेश के बाद हटा दिये गये थे, उनको दिये गये अलाउंस की भी रिकवरी की जाए।  केसी गोयल ने बताया कि फार्मेसी में डिप्लोमा से पीएचडी पास करने के बाद भी जब तक हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल से रजिस्ट्रेशन नहीं करवा लिया जाता, तब तक ना तो कोई लाइसेंस मिलता और ना ही कोई नौकरी जहां फार्मासिस्ट की सेवा जरूरी है।

निलंबित प्रधान केसी गोयल की याचिका स्वीकार, विस्तृत आदेशों में कोर्ट ने माना फर्जी है पराशर की बारहवीं , -आदेशों के अनुसार सेक्शन 26 ऑफ फार्मेसी एक्ट की अवहेलना हुई है, गोयल ने पराशर से लिये गये वेतन का पैसा वापिस जमा करवाने की अपील की

रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार केवल काउंसिल के रजिस्ट्रार का है। तत्कालीन एसीएस हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने एक मंत्री के दबाव में 26 नंबवर 2015 को अरुण पराशर जोकि बारहवीं फर्जी बोर्ड से फार्मेसी में डिप्लोमा कर्नाटक से लाया ग्रेजुएट नहीं होते हुए भी फार्मेसी एक्ट की धारा 26 जिसके तहत रजिस्ट्रार की नियुक्ति का अधिकार केवल काउंसिल को है सरकार को नहीं। धारा 46 जिसके अंतर्गत बतौर रजिस्ट्रार हस्ताक्षर करने से पहले बतौर रजिस्ट्रार नियुक्ति की सरकारी गजट नोटिफिकेशन जरूरी है कि अवहेलना करते हुए केवल 89 दिन के लिए डीसी रेट पंचकूला पर बगैर गजट नोटिफिकेशन के ही नियुक्त कर दिया गया था और मंत्री जी ने तनख्वाह 40 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करवा दी। 25 जुलाई 2019 को उच्च न्यायलय ने यह अवैध नियुक्ति को रद्द कर दिया, इसके लिए जो पैसा इसको कौंसिल के खाते से दिया गया पैसा अवैध है, वसूल किया जाये।

KC Goyal
  कौंसिल के निलंबित प्रधान कृष्ण चंद गोयल ने बताया कि 8 नंवबर 2016 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ ने सीडब्ल्यूपी 23 687/15 का फैसला सुनाते हुए सरकार को 6 महीने के अंदर-2 फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 26 नियम 108, 109 के तहत जरूरी अनुमति देने के आदेश दिए, लेकिन माननीय न्यायालय के आदेश को दरकिनार करते हुए अरुण पाराशर जिसको केवल 89 दिन के लिए ही नियुक्त किया था, का कार्यकाल 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दिया गया। न्यायालय की अवमानना का मामला दाखिल करने से पहले निर्वाचित प्रधान को उसके पद से हटाने के लिए (क्योंकि फार्मेसी एक्ट व नियम में ऐसी कोई भी प्रस्ताव नहीं जिसके तहत निर्वाचित सदस्य एवं प्रधान को हटाया जा सके) चौकसी ब्यूरो का दुरुपयोग करते हुए ब्यूरो के डीएसपी ओमप्रकाश खुराना जिसने एसपी, एवं डीजी, चौकसी ब्यूरो के सामने खुद कबूल किया कि एफआइआर नंबर 10 दिनांक 15 दिसंबर 17 दर्ज करने से पहले उसने कभी भी प्रधान केसी गोयल को जांच के लिए नहीं बुलाया, लेकिन दबाव में एफआइआर दर्ज करते हुए 22 दिसंबर 2017 को केसी गोयल को प्रधान पद से निलंबित कर दिया गया। सरकार व कौंसिल ने खुद लिखकर दिया है की निलंबित सदस्य एवं प्रधान को निलंबन नहीं किया जा सकता।

एफआइआर नंबर 10 15 दिसंबर 2017 कृषण चंद गोयल प्रधान हरियाणा राज्य फार्मेसी कौंसिल के खिलाफ दर्ज की गई जबकि फार्मेसी काउंसिल का गठन 1948 एवं स्टेट फार्मेसी नियम 1951 के तहत ही क्या जा सकता है, लेकिन एफआइआर में जो भी आरोप लगाए गए उनमे फार्मेसी एक्ट एवं नियमों की कोई भी अवहेलना नहीं की गई है, सभी आरोप झूठे एवं आधारहीन है।

केसी गोयल ने बताया कि काउंसिल के बैंक खाते से जो भी पैसा निकाला गया, वह सब स्टेट फार्मेसी नियंम 141 के तहत ही प्रधान के साथ रजिस्ट्रार के सयुंक्त हस्ताक्षर से ही निकाला गया। 2 जून 14 से 20 सितंबर 14 तक श्री सुरेंद्र यादव बतौर रजिस्ट्रार रहे, उसके व प्रधान के तौर पर मेरे हस्ताक्षर से निकाला गया। 22 सितंबर 2014 से 30 अक्तूबर 15 तक सोहन लाल कंासल बतौर रजिस्ट्रार रहे सोहन लाल कंसल एवं मेरे सयुंक्त हस्ताक्षर से पैसा निकाला गया। 26 नवंबर 15 से 22 दिसंबर 17 तक अरुण परासर बतोर रजिस्ट्रार रहे। उनके एवं मेरे सयुंक्त हस्ताक्षर से ही पैसा निकाला गया, लेकिन एफआइआर में केवल कृष्ण चंद गोयल को अकेले को ही आरोपी क्यों बनाया गया। जब अकेले प्रधान कोई पैसा नहीं निकाल सकता और न ही निकाला गया, लेकिन आरोपी केवल मंत्री के दबाव में बनाया गया। शिकायत में लिखा गया है कि 10 जून 2014 की जनरल बॉडी मीटिंग में केवल 18 प्रस्ताव पास हुए थे, लेकिन प्रधान ने अपने निजी लाभ के लिए इसको बढ़ाकर 23 कर दिया, जो यह साबित करता है कि यह एफआइआर झूठी व आधारहीन है। सरकारी आदेशो के विरुद्ध श्री सोहन लाल कंसल ने टीए एवं भत्ते वसूल किये जो की गबन है, की जांच होनी चाहिए।

गोयल ने बताया कि एफआइआर नंबर 10 में लिखा गया कि 10 जून 14 की मीटिंग में केवल 17 प्रस्ताव पास हुए थे, प्रधान ने बढ़ाकर 23 कर दिए। चौकसी ब्यूरो के जांच अधिकारी श्री सुरेश कुमार ने खुद अपने जवाब में माननीय हाईकोर्ट में लिख कर दिया है कि 22 प्रस्ताव पास हुए है, लेकिन नियम 125 के तहत कार्यवाही लिखते हुए रिकॉर्ड अपने कब्जे में संभाल कर रखने की जिम्मेवारी केवल रजिस्ट्रार की है। बतोर सदस्य एवं प्रधान मैंने जो भी पैसा कोर्ट केसों के लिए लिया, जिसको खुद चोकसी ब्यूरो ने ही पास हुए लिख कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद भी मेरी तरफ 8 लाख 40 हजार रुपये की रिकवरी निकाल कर भरवाए गये, लेकिन 50 लाख रुपये ऑडिट रिकवरी जोकि बाकी सदस्यों जिनमे शिकायतकर्ता भी शामिल है ,की तरफ बकाया है को आरोपी नही बनाया गया और ना ही केस दर्ज किया गया।

Arun Prashar
गोयल ने बताया कि कौंसिल के खाते से जो भी पैसा निकला एवं खर्च किया गया एवं दूसरे कार्य किये गये, वह सब हर महीने नियम 48 के तहत एवं हर 6 महीने में होने वाली जनरल बाड़ी मीटिंग जो नियम 11 के तहत बुलाई गई। जनरल बाड़ी मीटिंग में उपस्थित सभी सदस्य ने पास किये हाजिरी के लिए टीए एवं भत्तों लिए इसके बाद भी प्रधान अकेले जिम्मेवार कैसे बताया जा सकता। तीन मनोनीत सदस्य कैलाश चंद खन्ना, वेद प्रकाश, अमित नागपाल जिनको सरकार ने खुद ही हटाया, जो हाईकोर्ट से स्टे ले आये थे। उच्च न्यायालय ने इनकी याचिका रद्द करते हुए 26579/17 को रद्द करते हुए माननीय उच्च न्यायलय ने इनको बर्खास्त कर दिया, इसके बावजूद भी इनको अवैध तोर पर 15-15 लाख रुपये दिए गये जो गबन ह,ै लेकिन इनको आरोपी नहीं बनाया।

गोयल ने आरोप लगाया कि सतपाल गर्ग को सरकार ने खुद 31 मार्च 18 के बाद हटाया, लेकिन आज भी वह कौंसिल में कार्यरत है। लाखों रुपये अवैध तौर पर इसके नाम से निकाले गये, जो गबन है। कैलाश चंद खन्ना, वेद प्रकाश यादव, अमित नागपाल ने मेरी जमानत को हाइकोर्ट एवं उच्च न्यायालय ने निजी तौर पर विरोध किया, लेकिन वकीलों की फीस एवं बाकी खर्च कौंसिल के खाते से दिए गये इसके खिलाफ भी एफआइ दर्ज की जाये। सोहन लाल कंासल ने अरुण पराशर के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक से 1.5 करोड़ रुपये निकाले, जो बगैर किसी वैध प्रस्ताव के ही निकाले गये जोकि गबन है, जिनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए।

केसी गोयल ने बताया कि 22 दिसंबर 2017 को मुझे प्रधान पद से निलंबित करते हुए पंकज कुमार जैन को कार्यकारी प्रधान को चार्ज दिया गया लेकिन सोहन लाल कंसल व् अरुण परासर ने साजिस रचते हुए केवल अरुण परासर की सिफारिश पर बगैर किसी भी मीटिंग के पस्ताव के ही धारा 23 नियम 7 की अवहेलना करते हुए प्रधान पद हथिया लिया मैंने अपने निलम्बन के खिलाफ सीडब्ल्यूपी 4965 माननीय उच्च न्यायलय में दाखिल की हुई है। 1 अगस्त 18 को माननीय उच्च न्यायालय ने नोटिस आफ मोशन, नोटिस रिगार्डनिंग स्टेजारी किया। 2, 3, 4 मार्च को सरकारी छूटटी होते हुए भी 4 मार्च रविवार छुटटी के दिन कौंसिल कार्यालय को सोहन लाल कंसल के हाथों बेच दिया। 4 मार्च 2018 को सोहन लाल कंसल ने बतोर कार्यकारी प्रधान का चार्ज दे दिया गया सोहन कंसल के खिलाफ चल रही जांच हरियाणा में दवा खरीद घोटाला की जांच पुलिस से लेकर सिविल सर्जनहिस्सार को देते हुए मामला रफा दफा कर दिया इसके लिए सोहन लाल कंसल से कितने पैसे लिए गये और किस किस ने लिए इसकी जांच केवल फार्मेसी एक्ट की धारा 45 (5) के तहत ही करवाई जावे
18/4/18 को माननीय हाई कोर्ट ने स्टेटस को जारी किया लेकिन ्रष्टस् ने धारा 23 नियम 7 की अवहेलना करते हुए सोहन कंसल की बतोर प्रधान ण्टीईआटीण जारी कर दी गयी जिसके लिए माननीय हाई कोर्ट में माननीय न्यायालय की अवहेलना के लिए सीएम /10006- सीआइआइ 2019 ,सीएम 10097 -सीआइआइ 2019, सीओसीपी 9889 -2018 दाखिल की गई। जो माननीय उच्च न्यायालय के विचाराधीन है। 

 पंकज कुमार से प्रधान पद हथियाने वालो ने पंकज की धर्मपत्नी को लगभग दो लाख रुपये रिश्वत कौंसिल के खाते से देकर मेरे और मेरे बेटे के खिलाफ झूठी शिकायत करवाई, लेकिन जांच के बाद डीसीपी गुरुग्राम ने शिकायत को झूठा साबित किया। मेरे खुद की ,मेरे बेटे की और पुत्रवधू की रजिस्टरेशन रद्द की गयी रद्द करने के नोटिस दिए गये जिन पर अपील की सुनवाई के बाद रोक लगाई गयी मुझे और मेरे परिवार को गुंडों से धमकी दिलवाई गई जिसकी शिकायत मैंने नरवाना थाने में भी दी हुई है।   गोयल ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अरुण पराशर की

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