छात्रों ने पुलिस में दी शिकायत. चेयरमैन और सचिव पर जबरन वसूली, मानसिक उत्पीड़न व ब्लैकमेल के आरोप, एफआईआर दर्ज करने की मांग
दीपक सिंह /चंडीगढ़
गांधी स्मारक भवन, सेक्टर-16ए, चंडीगढ़ में संचालित एनडीडीवाई (तीन वर्षीय डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी) के छात्रों ने संस्थान के चेयरमैन संजय सिंघा और सचिव आनंद शरण के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) एवं थाना सेक्टर-17 में संयुक्त शिकायत दर्ज कराई है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि कोर्स समाप्त होने के अंतिम चरण में प्रत्येक छात्र से बिना किसी वैधानिक आधार के ₹10,000 अतिरिक्त जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। छात्रों ने इसे अवैध वसूली, मानसिक उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग बताते हुए मामले में एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार छात्रों ने संस्थान में प्रवेश के समय प्रॉस्पेक्टस में निर्धारित नियमों एवं फीस संरचना के अनुसार दाखिला लिया था और पूरी फीस जमा कर दी थी। अब अचानक अतिरिक्त ₹10,000 की मांग की जा रही है, जबकि प्रॉस्पेक्टस या किसी अन्य दस्तावेज में इस तरह के अतिरिक्त शुल्क का कोई उल्लेख नहीं है। छात्रों का कहना है कि यह मांग पूरी तरह अनुचित और नियमों के विपरीत है।
छात्रों ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को पहले संस्थान के सचिव आनंद शरण के समक्ष उठाया और बाद में चेयरमैन संजय सिंघा से भी शिकायत की, लेकिन समाधान निकालने के बजाय लगातार अतिरिक्त राशि जमा कराने का दबाव बनाया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फीस जमा नहीं करने पर डिप्लोमा प्रमाणपत्र जारी नहीं करने और छह माह की अनिवार्य इंटर्नशिप रोकने की चेतावनी दी जा रही है, जिससे छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पिछले बैच के छात्रों से ऐसी कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली गई थी। ऐसे में वर्तमान बैच से अतिरिक्त शुल्क की मांग न केवल भेदभावपूर्ण है बल्कि कानून और संस्थान के निर्धारित नियमों का भी उल्लंघन है। छात्रों का आरोप है कि बीच सत्र में फीस और शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता और ऐसा करना विद्यार्थियों के साथ अन्याय है।
छात्रों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत के साथ छात्रों द्वारा पूर्व में संस्थान को दिए गए ज्ञापन और अनेक छात्रों के हस्ताक्षर भी संलग्न किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना पड़ेगा।