फेस2न्यूज/ चंडीगढ़
श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के छठे दिन आज उत्तम संयम धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आराधना की गई। प्रातःकाल भगवान के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के साथ श्रद्धालुओं ने इंद्रियों पर नियंत्रण, आत्मसंयम और विषय-वासनाओं से दूर रहने का संकल्प लिया।
आज के धार्मिक आयोजन में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य कैप्टन जे.के. जैन एवं श्रीमती शैल जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा श्रीमती स्वर्ण लता जैन एवं दीपक जैन, सेक्टर-21 द्वारा की गई, जबकि द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य श्रीमती स्नेह जैन, नितिन जैन, सेक्टर-28 तथा आदित्य जैन, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) को प्राप्त हुआ।
दशलक्षण विधान के दौरान सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य दिनेश जैन एवं श्रीमती स्वाती जैन, बूंदी (राजस्थान) को प्राप्त हुआ। कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य अभिनंदन जैन को प्राप्त हुआ।
उत्तम संयम का संदेश
इस अवसर पर अजय भैयाजी, जिनके मार्गदर्शन में दशलक्षण पर्व के समस्त धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ने उत्तम संयम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संयम का अर्थ केवल बाहरी नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों, इच्छाओं, वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना है। मनुष्य जब अपनी इच्छाओं और विषय-वासनाओं को नियंत्रित करता है तथा धर्म, विवेक और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलता है, तभी वास्तविक संयम की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मनिरीक्षण का अवसर है। हमें यह विचार करना चाहिए कि हमारी इंद्रियां हमें नियंत्रित कर रही हैं या हम अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर रहे हैं। संयम व्यक्ति के जीवन में शांति, अनुशासन और आत्मिक स्थिरता लाता है तथा उसे आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाता है।सुगंध दशमी पर भगवान शीतलनाथ का पूजन एवं धूप अर्पण
शाम को मंदिर परिसर में सुगंध दशमी (धूप दशमी) का धार्मिक आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 3:00 बजे भगवान शीतलनाथ के पूजन से हुआ। इसके पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हवन कुंड में धूप अर्पित की।
इस अवसर पर अजय भैयाजी ने सुगंध दशमी पर धूप अर्पित करने के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि जैन परंपरा में धूप अर्पण करना श्रद्धा, भक्ति और आत्मशुद्धि की भावना से जुड़ा है। जिस प्रकार धूप की सुगंध वातावरण में फैलती है, उसी प्रकार व्यक्ति के सद्विचार, सदाचार और अच्छे कर्म भी समाज में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करते हैं। धूप अर्पण का भाव हमें अपने भीतर के विकारों को दूर करने और जीवन को सद्गुणों की सुगंध से भरने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि सुगंध दशमी का अवसर केवल एक धार्मिक परंपरा निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने विचारों और आचरण को शुद्ध करने तथा आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है। सामूहिक हवन कुंड में धूप अर्पित करते हुए श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की औरआत्मकल्याण की भावना के साथ धार्मिक आराधना की।
दशलक्षण पर्व के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है और श्रद्धालु
आत्मचिंतन, संयम एवं धर्माराधना के माध्यम से आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आत्मचिंतन, संयम एवं धर्माराधना के माध्यम से आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
Chandigarh
Trending