Tuesday, 20 October 2026
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जागो ग्राहक जागो – ड्यूटी पर जाते या आते समय रास्ते में दुर्घटना तो मुआवजा के लिए कंपनी जिम्मेवार, सुप्रीम कोर्ट

संजय कुमार मिश्रा

नियोक्ता अपने कार्यस्थल पर हुए दुर्घटना के लिए दुर्घटनाग्रस्त कर्मचारी को मुआवजा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है ही, लेकिन अब घर से कार्यस्थल तक आने एवं वापस जाने के समय हुए दुर्घटना को भी कार्यस्थल पर हुआ दुर्घटना माना जाएगा और दुर्घटना ग्रस्त कर्मचारी, कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत संबंधित नियोक्ता से मुआवजे का हकदार होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में 29 जुलाई, 2025 को (Daivshala and Ors. Vs. Oriental Insurance Company Limited and Anr.) में साफ किया है कि कामगार एवं उनके परिवार अब न केवल कार्य के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए, बल्कि कार्यस्थल से घर आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए भी मुआवजे के हकदार होंगे, और ये मुआवजा कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत संबंधित नियोक्ता द्वारा कर्मचारी या उसके परिवार को दिया जायेगा।

सुप्रीम कोर्ट का नियम और शर्तें

समय और स्थान का संबंध : दुर्घटना का समय, स्थान और रास्ते की परिस्थिति का आपकी नौकरी / ड्यूटी से सीधा संबंध (Nexus) होना चाहिए।

नियोजित रास्ता : कर्मचारी अपने घर से सीधे ऑफिस के सामान्य और तय रास्ते पर होना चाहिए।

व्यक्तिगत काम न हो : यदि कोई कर्मचारी रास्ते में किसी निजी या व्यक्तिगत काम से बहुत दूर desviate (भटक) होता है, तो कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी।

किस कानून के तहत मिलता है मुआवजा

कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 (Employees’ Compensation Act 2023) : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस कानून के तहत ड्यूटी पर आते-जाते समय होने वाले हादसे भी कवर होते हैं।

ईएसआई अधिनियम 1948 (ESI Act) : इसकी धारा 51E के तहत भी रास्ते के हादसों को रोजगार से जुड़ी चोट माना गया है।

कब जिम्मेदार नहीं होगी कंपनी : यदि दुर्घटना के समय कर्मचारी शराब या किसी अन्य नशे में था।

लापरवाही या आदेश की अवहेलना करते: यदि कंपनी के सुरक्षा नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया हो।अनावश्यक देरी या भटकाव: बिना किसी वैध कारण के रास्ते में लंबा निजी ठहराव।

ज्ञात हो कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923, कर्मचारियों और उनके आश्रितों को औद्योगिक दुर्घटनाओं से चोट लगने की स्थिति में प्रतिकर के भुगतान का प्रावधान करता है, जिसमें रोजगार के दौरान या उसके दौरान उत्पन्न होने वाली कुछ व्यावसायिक बीमारियां भी शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु या विकलांगता हो जाती है।

ईएसआई अधिनियम 1948 की धारा 51 ई में भी कार्यस्थल पर आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए विशेष प्रावधान किया गया है और कहा गया है कि, ‘कर्मचारी के साथ उसके निवास से ड्यूटी के स्थान पर आने-जाने या काम करने के बाद रोजगार के स्थान से उसके निवास पर आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटना भी शामिल है,

सुप्रीम कोर्ट ने इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एवं इसे व्यापक बनाते हुए उपरोक्त निर्णय लिया।

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