ENGLISH HINDI Monday, December 09, 2019
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
द स्काई मेंशन मैं पहुंचे करण औजला , लोगों का किया मनोरंजनसीएम की सुरक्षा में सेंध से डेराबस्सी के बहुचर्चित कब्जा विवाद ने पकड़ा तूल: दूसरे पक्ष ने लगाया मुख्यमंत्री के आदेशों के उल्लंघन का आरोप सिंगला की बर्खास्तगी को लेकर राज्यपाल को मिलेगा ‘आप’ का प्रतिनिधिमंडल - हरपाल सिंह चीमाअंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव : 18 हजार विद्यार्थी, 18 अध्यायों के 18 श्लोकों के वैश्विक गीता पाठ की तरंगें गूंजीअविनाश राय खन्ना हरियाणा व गोवा के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चुनाव हेतू आब्र्जवर नियुक्तहिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 9 दिसम्बर से तपोवन धर्मशाला में: डॉ राजीव बिंदलधर्मशाला में 10 दिसम्बर को लगेगा रक्तदान शिविरबिक्रम ठाकुर ने कलोहा में बाँटे 550 गैस कनेक्शन, कलोहा पंचायत में 35 सोलर लाईट और व्यायामशाला की घोषणा
संपादकीय

अर्थ तेरे कितने अर्थ

March 22, 2016 08:57 PM

— आर एल गोयल

शब्द—शब्द के अर्थ हैं
अर्थ—अर्थ के भेद
अर्थ—अर्थ की बात है पगले
अर्थ—अर्थ की गज़लें समझ सके तो
समझ ले प्यारे न समझो तो हारे
एक अर्थ तो पावन माटी
दूजा अंग है भाषा का
तीजा है धन सम्पदा
चौथा तो वो है जो देता उर्जा को सहारा
अजब चक्रव्यूह है अर्थ का
किसका पलड़ा भारी है और किससे मिले किनारा
कर लो अगर विश्लेषण तो
परिभाषा में छुपे है अर्थ अनेक
जो न होने देते बंटवारा
अर्थ की परख कर सके तो कर ले पगले
जीवन का भी है एक अर्थ
आसमां की ओर से
जमीं के छोर तक
शब्दों की है माला
मूक का भी अर्थ शोर भी नहीं व्यर्थ
तर्क से जुड़ा है वितर्क
समझ सको तो प्यारे समझ ले फर्क
अर्थ है तो शब्द है और
शब्द नही तो अर्थ व्यर्थ


कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और संपादकीय ख़बरें
पुत्रमोह मे फँसे भारतीय राजनेता एवं राजनीति, गर्त मे भी जाने को तैयार पवित्रता की याद दिलाती है ‘राखी’ करीब 50 गाँव के बीच में एक आधार केंद्र परबत्ता, 2-3 चक्कर से पहले पूरा नहीं होता कोई काम अपने हृदय सम्राट, पुण्यात्मा, समाज सुधारक स्व: सीताराम जी बागला की पुण्यतिथि पर नतमस्तक हुए क्षेत्रवासी क्या चुनावों में हर बार होती है जनता के साथ ठग्गी? क्या देश का चौकीदार सचमुच में चोर है? रोड़ रेज की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक नवजोत सिद्धू की गांधीगिरी ने दिया सिखों को तोहफा: गुरु नानक के प्रकाशोत्सव पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी भीड़ भाड़ वाले बाजारों से दूर लगने चाहिए पटाखों के स्टाल दश—हरा: पहले राम बनो— तब मुझे जलाने का दंभ भरो